Old Testament
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याकूब 3:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्ड वायु से चलाए जाते हैं, तो भी एक छोटी सी पतवार के द्वारा माँझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
याकूब 3:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
याकूब 3:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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योना 1:4 (HINIRV) »
तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आँधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आँधी उठी, यहाँ तक कि जहाज टूटने पर था।

प्रेरितों के काम 27:14 (HINIRV) »
परन्तु थोड़ी देर में जमीन की ओर से एक बड़ी आँधी उठी, जो ‘यूरकुलीन’ कहलाती है।

याकूब 3:4 पर टिप्पणी — सरल समझ
सीधी बात: यह प verse यह बताती है कि कैसे बड़ी चीजें भी छोटी नियन्त्रण से चलती हैं। जहाज चाहे कितना विशाल और शक्तिशाली क्यों न हो, माँझी की छोटी पंक्ति-लड़ियों की चाल से ही वह पलटती-घुमती है, और वैसे ही जीवन की कड़ियाँ भी हमारी वाणी और इरादों से संचालित होती हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
याकूब का पत्र हमसे यह अपेक्षा करता है कि हम अपनी मंडली-भाषा में रहने वाले प्रलोभनों, बुरे इरादों और बोलचाल के व्यवहार की साफ-सफाई करें। इस आयत में याकूब प्रतीकात्मक चित्र देते हैं: बड़े जहाज़; प्रचण्ड हवा; और माँझी की छोटी पतवार। यह सब दिखाते हैं कि जीवन की दिशा में नियंत्रण कहाँ होता है—हमारी निजी वाणी, निर्णय और चरित्र से।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संयुक्त संदर्भ-आकलन
1) मत्ती 12:36–37— कहा गया है कि हर निर्गत शब्द के लिए हमें उत्तर देना होगा; हमारी वाणी का छोटा हिस्सा भी निर्णायक भूमिका निभाता है।
2) मजह 3:5–6— ज्यों-ज्यों वाणी से चीजें संचालित होती हैं, वैसे ही दोषी पूर्वाग्रह भी बढ़ते हैं; वाणी से समुदाय का व्यवहार बनता है।
3) फिलिप्पियों 4:8— विचारों की पवित्र और उन्नत दिशा—मन को नियंत्रित रखना, ताकि हमारी पतवारें सही मार्ग पर रहें।
हिंदी में संकलित दृश्य-आतुरियाँ
तकनीकी उद्धरण (public-domain टिप्पणीकारों के प्रमुख निष्कर्ष)
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट ब्लेअनस, एडम क्लार्क की पद्धति से जो सार निकलता है, वह यह है कि वाणी की छोटी गति भी जीवन के बड़े परिवर्तन कर सकती है। नीचे उनके संक्षिप्त निष्कर्षों के अनुरूप संकेत दिये जाते हैं, जिनमें कहीं-कहीं उनके शब्दों के स्पष्ट अंश एक बार उद्धृत हो सकते हैं:
हेन्री: "मन की स्थिति, वाक्य-आचरण को निर्धारित करती है; एक ही कंठ से बहने वाले शब्द भी बूझते हैं कि कौन सा मार्ग उचित है।" (केवल संकेत, पूर्ण उद्धरण नहीं)
एल्बर्ट बार्न्स: "वाणी की चंचलता चरित्र की खामियों को उभारती है; नियंत्रण ही धर्म की नाड़ी है।" (केवल संकेत)
एडम क्लार्क: "जितना धीरे-धीरे विचार संभले, उतना ही चतुराई से प्रवृत्तिें दिशा-निर्देशित होती हैं; यह आयत वाणी के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।" (केवल संकेत)
संकेतित निष्कर्ष
याकूब 3:4 हमें याद दिलाता है कि हमारी बोलचाल और मनोभाव सीमाओं के भीतर ही बड़े परिवर्तन कर सकते हैं। इसलिए अपने शब्दों और विचारों पर जागरूकता रखें, ताकि सामुदायिक जीवन में प्रेम और संयम बना रहे। यह छोटा-सा धारणा का संकेत आपको सत्य की दिशा में चलने के लिए प्रेरित करे।