योना 1:4 बाइबल पद की व्याख्या
योना 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आँधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आँधी उठी, यहाँ तक कि जहाज टूटने पर था।
योना 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
योना 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

भजन संहिता 107:23 (HINIRV) »
जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर होकर व्यापार करते हैं;

भजन संहिता 135:7 (HINIRV) »
वह पृथ्वी की छोर से कुहरे उठाता है, और वर्षा के लिये बिजली बनाता है, और पवन को अपने भण्डार में से निकालता है।

आमोस 4:13 (HINIRV) »
देख, पहाड़ों का बनानेवाला और पवन का सिरजनेवाला, और मनुष्य को उसके मन का विचार बतानेवाला और भोर को अंधकार करनेवाला*, और जो पृथ्वी के ऊँचे स्थानों पर चलनेवाला है, उसी का नाम सेनाओं का परमेश्वर यहोवा है! (2 कुरि. 6:18,)
योना 1:4 का परिचय और संदर्भ
यहोना की पुस्तक की इस कड़ी में उद्धारप्रवृत्ति की चपलता देखते हैं कि कैसे नबियों के दायित्व से भागते यात्रियों पर परमेश्वर का आदेशित नियंत्रण प्रकट होता है। इस वाक्य में तेज़ आंधी से समुद्र को क्रुद्ध किया गया और जहाज़ डगमगा उठे। यह घटना एक स्पष्ट संकेत है कि परमेश्वर के निर्देशन के बिना मानवीय प्रयास असफल हो सकता है, और उसकी योजना के सामने प्रकृति भी जवाब देती है।
कथा का तात्पर्य: परमेश्वर का नियंत्रण और भय
यह वाक्य यह दिखाता है कि प्रभु परमेश्वर प्रकृति पर पूर्ण अधिकार रखते हैं। एक प्रचण्ड आँधी जो समुद्र को हिलाकर रख देती है, देव के मन के विरुद्ध नहीं चल सकती। जो लोग नाव पर हैं, वे डर के मारे बिखर जाते हैं, पर परमेश्वर के इरादे के अनुसार यह आँधी चली है ताकि परमेश्वर की आवाज़ और मानव विवेक दोनों उजागर हों।
शब्दार्थ और छवि की व्याख्या
“प्रचण्ड आँधी” तथा “समुद्र में बड़ी आँधी उठी” शब्द समुद्री tumult और प्रकृति की विराटता को दर्शाते हैं; यह संकेत है कि भौतिक संसार भी तूफान के माध्यम से परमेश्वर की शक्ति को प्रदर्शित करता है। जहाज़ टूटने के खतरे से संकेत मिलता है कि मनुष्यों की सुरक्षा और सफलता कितनी अस्थिर हो सकती है जब वे परमेश्वर के मार्ग से भटकते हैं।
सम्बन्धित बाइबल पद
इन संदर्भों में एक सामान्य धारा है: प्रकृति और भयभीत मानवता में परमेश्वर की सत्ता का प्रत्यक्ष साक्षात्कार।
आज के लिए व्यावहारिक शिक्षा
- कभी-कभी परिस्थिति बद से बदतर प्रतीत होती है, पर परमेश्वर के पूर्ण नियंत्रण पर भरोसा रखें।
- भय के समय करने योग्य पहला कदम prayer और शांत आत्मा रखना है; समस्या पर उद्धारक की दृष्टि बनाए रखें।
- समुदाय के भीतर मदद मांगना भी एक मार्ग है, जैसे नाविक भागते हैं और दूसरों के साथ सुरक्षित रहने का प्रयास करते हैं; पर अंततः समान लक्ष्य परमेश्वर की महान योजना की प्राप्ति है।
एतिहासिक-विश्वास के एकीकृत विवेचन
यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रमुख व्याख्यानों के अनुरूप एक संयोजन-निष्कर्ष प्रस्तुत करता है: परमेश्वर की सत्ता प्रकृति और मनुष्य के निर्णय दोनों पर हावी है, और जब लोग उसकी आज्ञाओं के विरुद्ध चलते हैं, तब उसकी शक्ति दिखती है ताकि संपूर्ण उद्देश्य पूरा हो सके—जो कि उद्धार और भक्ति की अनुभूति को जगाए।
कवितीय उद्धरण संकेत: Henry ने कहा कि परमेश्वर अपनी इच्छा को पूर्ण बनाते हैं, और जीवन के तूफान भी उसकी योजना के अनुसार होते हैं (संकेतपूर्ण सार, विस्तृत टिप्पणी के लिए देखें Henry के टिप्पणियाँ). Barnes और Clarke इस तथ्य पर प्रकाश डालते हैं कि ईश्वर के नियंत्रण के सामने मानव प्रयास निर्भर होते हैं, और डायलेक्टिक विश्वास को मज़बूती मिलती है जिससे लोग उद्धार की ओर बढ़ते हैं (उद्धरण-चयनित अंश Books of Barnes/Clarke, अभिलेखित शब्दावली).