योना 1:17 बाइबल पद की व्याख्या
योना 1:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा ने एक महा मच्छ ठहराया था कि योना को निगल ले; और योना उस महा मच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात पड़ा रहा। (मत्ती 12:40)
योना 1:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
योना 1:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

मत्ती 12:40 (HINIRV) »
योना तीन रात-दिन महा मच्छ के पेट में रहा, वैसे ही मनुष्य का पुत्र तीन रात-दिन पृथ्वी के भीतर रहेगा।

लूका 11:30 (HINIRV) »
जैसा योना नीनवे के लोगों के लिये चिन्ह ठहरा, वैसा ही मनुष्य का पुत्र भी इस युग के लोगों के लिये ठहरेगा।

मत्ती 16:4 (HINIRV) »
इस युग के बुरे और व्यभिचारी लोग चिन्ह ढूँढ़ते हैं पर योना के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन्हें न दिया जाएगा।” और वह उन्हें छोड़कर चला गया।
योना 1:17 पर विवेचित टिप्पणी
सूत्र व संदर्भ: यहोवा ने योना को निगल लेने के लिए एक बड़ा मच्छ ठहराया; और योना उस मच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात पड़ा रहा। यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की योजना और दया कैसे भ्रमित परिस्थिति के भीतर भी काम करती है; और यह यीशु मसीह के भविष्यवाणी-उद्धार संदेश से जुड़ता है।
केंद्रीय अर्थ
योना एक धार्मिक नाटक का भाग बनकर परमेश्वर की एक अनूठी परीक्षा दिखाता है: यदि मनुष्य परमेश्वर के मार्ग से विचलित हो, तो उसकी कृपा और चेतावनी क्या रूप लेती है। मच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात बिताने से योना का आंतरिक परिवर्तन, पश्चाताप और परमेश्वर के उद्देश्य के लिए पुनः तैयार होना स्पष्ट होता है। यह घटना मसीही संदर्भ में मृत्यु-जीवन के प्रतीक के रूप में भी देखी जाती है, जहां उद्धार केवल परमेश्वर की करुणा से संभव है।
दो-तीन मुख्य विषय
cross-reference संबंध
1) मत्ती 12:40 — मसीह ने योना के तीन दिन के अनुभव को अपनी यात्रा-चिह्न से जोड़ा; यह बताता है कि उद्धार और पुनर्स्थापना परमेश्वर के नये-जीवन के क्रम में संभव है।
2) मसान 3:7–10 (निश्चित पाठ के अनुसार) — दया और क्रोध के संग्राम में धार्मिक अधिकरण का मूल्यांकन; पाखंड बनाम वास्तविक पश्चाताप के बंधन।
3) दान 12:7–10 — प्रकटन और दया के विभाजन के दृश्य, जहां परमेश्वर अपने दायरे में परिवर्तन को संचालित करते हैं।
व्यावहारिक विचार
हम किस प्रकार अपनी-अपनी ज़िन्दगी में परमेश्वर के मार्ग से हटे? यहोवा हमारे लिए ऐसे समय देता है जब हमें भीतर से पश्चाताप कर के अपनी योजनाओं को छोड़ना पड़ता है ताकि वे njegya के अनुसार सही दिशा में चल सकें। संकट चाहे प्राकृतिक हो या आंतरिक, परमेश्वर की पवित्र करुणा हमें वापस बुलाती है ताकि हम उसकी सेवा में पुनः समर्पित हों।
संक्षिप्त निष्कर्ष
योना 1:17 का दृश्य यह बताता है कि परमेश्वर की योजनाएँ मानव की भाग-दौड़ से भी बड़े हैं; उसका उद्धार-कार्य विविध रूपों में दिखता है—कभी चेतावनी, कभी पश्चाताप, कभी पुनः बुलाहट के साथ। यह न केवल योना के अनुभव का वर्णन है, बल्कि हमारे भीतर भी यह अनुरोध है कि हम परमेश्वर के मार्ग पर लौटकर उसकी दया का भागीदार बनें।
उद्धृत टिप्पणीधारकियाँ: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से संकेत लिये गये हैं। नीचे संक्षेप उल्लेख:
यदि आप चाहें, तो मैं इनके मौलिक विचारों के संक्षिप्त उद्धरण (जो पाठ-स्तर पर शाब्दिक रूप से उपलब्ध हों) के साथ अधिक गहराई से विश्लेषण दे सकता हूँ।