योना 1:2 बाइबल पद की व्याख्या
योना 1:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में आ चुकी है।”
योना 1:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योना 1:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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योना 4:11 (HINIRV) »
फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिसमें एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उसमें रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊँ?”


योनाहा 1:2 का अर्थ परिचय
यह पद यह बताता है कि परमेश्वर नीनवे नगर के विरुद्ध एक बहु-स्तरीय बुलावा दे रहा है: उठो और जाकर वहां प्रचार कर, क्योंकि वहाँ की बुराई मेरी दृष्टि में आ पहुँची है। सरल शब्दों में, परमेश्वर ने नीनवे की असत्य-धारणा, हिंसा और दमन को देखते हुए निर्णय लिया कि उसे दंडित या शिक्षित करने के लिए प्रचार द्वारा सचेत किया जाए।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
निनवे प्रमुख राजनीतिक-औद्योगिक शहर था, अस्थिरता और क्रूरता के लिए जाना जाता था। योना—यहोशू-निपटित ईश्वर-सेवा से दूर एक दूत-प्रेषित के रूप में उनके सामने आता है। यहाँ “आ चुकी है” का वचन केवल दंड का संकेत नहीं, बल्कि दयालु चेतावनी भी है कि परिवर्तन संभव है यदि लोग पश्चात्ताप करें। यह उद्धार-यात्रा का आरम्भ है, जो न सिर्फ योना के व्यक्तिगत परिवर्तन, बल्कि समस्त शहर की नैतिक दिशा को बदलने के लिए है।
व्याख्यात्मक Observations
थीम-नोट
अन्य प्राशंस (Cross-References)
1) यशायाह 58:1 जैसे संदर्भ, जहां परमेश्वर प्रेषकों से स्पष्ट उद्घोष की अपेक्षा कर रहे हैं ताकि लोग आत्म-सत्य को पहचाने।
2) दानिएल 9:13-14 में भी दंड और पश्चात्ताप की प्रक्रिया का चित्रण है—यही नीनवे संदर्भ के साथ समन्वय बनाता है कि समय पर प्रकटीकरण और परिणाम दोनों आवश्यक हैं।
3) मत्ती 3:2, जिसमें बपतिस्मा-प्रचारक कहते हैं—परिवर्तन और पश्चात्ताप की आवश्यकता का स्पष्ट संदेश दिया गया है।
कैसे पढ़ें और व्यवहार में उतारें
- ईमानदारी से परमेश्वर के संदेश को ग्रहण करना।
- अन्याय के विरुद्ध साहसपूर्वक आवाज उठाना, परन्तु दयालुता बनाए रखना।
- अपनी धारणाओं से ऊपर जाकर समुदाय के विकास की दृष्टि रखना।
संक्षिप्त निष्कर्ष: योना 1:2 एक बुलावा-पत्र है जो बताता है कि परमेश्वर के न्याय के साथ अवसर और परिवर्तन की संभावना हर समय खुली रहती है। नगर नीनवे के लिए यह संदेश पहले चेतावनी है, फिर तीव्र आह्वान—ताकि लोग पश्चात्ताप कर सकें और परमेश्वर के मार्ग पर चलें।
महत्वपूर्ण उद्धरण-नोट: इस पंक्ति पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट शब्द-टुकड़े उपलब्ध नहीं हैं; यदि उपलब्ध हों तो उन्हें उद्धृत किया जाएगा।