नीतिवचन 11:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो अपना अनाज जमाखोरी करता है, उसको लोग श्राप देते हैं, परन्तु जो उसे बेच देता है, उसको आशीर्वाद दिया जाता है।

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नीतिवचन 11:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 11:26 का संदर्भ और उद्देश्य

यही वाक्य अपने समय के आर्थिक व्यवहार को स्पष्ट करता है: जो लोग अपने अनाज, वस्तुओं या संपत्ति के बारे में जमाखोरी या हेरफेर करते हैं, उन्हें समाज से अस्पष्ट शोधन मिलता है—लोग उन्हें श्राप देते हैं—जबकि जो सम्पत्ति की उचित और सत्य_sale बेचते हैं, उन्हें आशीर्वाद मिलता है। यह विधिक-आर्थिक नैतिकता का पाठ है कि धनी-गरीब के बीच उचित लेन-देन, निष्कपटता और समुदाय के कल्याण का मूल्य माना जाना चाहिए।

टेक्स्ट पर्सपेक्टिव—ईश्वर और आस्था की दृष्टि

यह आयत दिखाती है कि ईश्वर नैतिक व्यवस्था के प्रति विराम नहीं लेते और समाज में विषमताओं के जोखिम से सावधान रहते हैं। गलत आचरण पर सामाजिक परिणाम आते हैं—श्राप संतुलन का प्रतीक बन जाता है— क्योंकि जमाखोरी से समुदाय के लिए आवश्यक वस्तुएँ दुर्लभ होती हैं। वहीं सत्य और उचित व्यापार से आशीर्वाद आते हैं, जो समुदाय के लिए स्थिरता और विश्वास बनाते हैं।

महत्वपूर्ण शब्द और चित्रण

  • जमाखोरी— आवश्यक वस्तुओं या वस्तुओं की अति-भंडारण क्रिया, ताकि कीमतें बढ़ें और असमर्थ उपभोक्ता प्रभावित हों। यह पक्षपातपूर्ण लाभ के लिए समाज के सामान्य हितों को दबा देता है।
  • श्राप— समाजिक और नैतिक परिणाम जो गलत व्यवहार के कारण सामने आते हैं; यह किसी प्रकार के divine justice के संकेत के रूप में देखा गया है।
  • आशीर्वाद— ईश्वर की दयालुता और सुव्यवस्थित समाज के लिए लाभ, जो ईमानदार व्यापार और समुदाय की भलाई से जुड़ा है।

संबद्ध पवित्र पाठ

कई बुद्धिमानी-लेखकों ने समान विचार दिए हैं कि मुनाफे के लिए अन्याय करना समाज को हानि पहुँचाता है और ईश्वर की दृष्टि में वह अनुचित है। साथ ही, ईमानदार व्यापार से समाज का विश्वास और स्थिरता बढ़ती है।

मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से छोटे उद्धरण

स्थानिक शब्दों में ये टिप्पणीकार इस प्रकार संकेत देते हैं: धनी के रूप में दूसरों के प्रति दया और सत्यापन की कमी से अधर्म जन्म लेता है; और उचित व्यापार से समाज में सुरक्षा और आशीर्वाद बनते हैं।

महत्वपूर्ण उद्धरण नोट: पाठकों को ज्ञात कर दिया जाए कि यदि इस पंक्ति से सीधे कोई स्पष्ट वाक्य उद्धृत हो तो इन टिप्पणीकारों के संकलनों से उपलब्ध संक्षिप्त सार शामिल किया गया है, परंतु पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है।

अनुदेशन और आज के लिए आवेदन

आज के संदर्भ में यह आयत ईमानदार व्यापार के मूल्य को दोहराती है। जरूरी वस्तुओं की अधिकता या कमी का लाभ उठाकर कीमतें बढ़ाने की कोशिश न करें; यदि आप किसी वस्तु के लिए जिम्मेदार हैं, तो उसे उपलब्ध कराने और उचित मूल्य पर बांटने की कोशिश करें। जमाखोरी से सामाजिक असंतोष, अविश्वास और आर्थिक तनाव बढ़ता है। साथ ही जो लोग सही तरीके से व्यापार करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं, उनकी समाज में प्रशंसा और स्थायित्व बढ़ता है।

क्रॉस-रेफरेंस

  • नीतिवचन 21:6— असत्य और छल से धन प्राप्त करना नष्टि देता है; वास्तविक संपत्ति तब ही स्थिर होती है जब वह निष्पक्ष और जरूरतमंद के हित के लिए हो।
  • यशाय 58:10— सत्य और उदारता से जीवन में उजाला आता है और समाजिक कल्याण बढ़ता है; वस्तुओं के व्यावसायिक उपयोग में दयालुता आवश्यक है।
  • या 32:7— शोषण पर आधारित योजनाओं की समाप्ति; ईश्वर के न्याय में निष्पक्षता ही सर्वोपरि है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 11:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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