Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 11:15 - सरल संकेतार्थ का स्पष्ट अर्थ
इस पद का संदेश स्पष्ट है: जब आप किसी परदेशी का उत्तरदायित्व लेते हैं, तब वेदना और जोखिम आपके ऊपर आ सकता है; पर यदि आप जमानत लेने से बचते हैं, तो आप साहस और निज स्वतंत्रता पाते हैं। यहाँ धुर-दृढ़ भेद यह है कि जिम्मेदारी के साथ जुड़ी चिंता कितनी भारी हो सकती है, जबकि सुरक्षा के लिए डरावनी नहीं, बल्कि विवेकयुक्त सावधानी जरूरी है।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
नीतिवचन के इस हिस्से में व्यवहारिक बुद्धिमत्ता पर जोर है—व्याकुलता से बचना, ऋण-उद्धार और जमानत के सार्वजनिक या कानूनी दायित्वों से सावधान रहना। यह सीख प्रायः व्यक्तिगत वित्त, रिश्तों की जवाबदेही, और शासन-व्यवस्था से जुड़ी नीति-निर्णय से जुड़ी है। पारंपरिक अभिप्राय में यह संयम का पाठ है: अत्यधिक दायित्व उठाने से पहले सावधानी से विचार करें, ताकि संकट से बचा जा सके।
interpretive observations
- एहतियात बनाम साहस: जमानत देना मित्रता या कर्ज के बदले जिम्मेदारी बढ़ाने जैसा है। इन्वॉल्वमेंट से नुकसान और विवाद सामने आ सकता है; जबकि डर से दूर रहना एक प्रकार की मुक्त/स्वतंत्रता देता है।
- सामाजिक सूचना: उत्तरदायित्व का भारी बोझ सामाजिक रिश्तों और संपत्ति पर असर डाल सकता है। बुद्धिमान व्यक्ति वह है जो खतरों को तौलकर कदम उठाए।
- नैतिक विवेक: निरपेक्ष रूप से “हाँ” कह देना कभी-कभी अन्यायपूर्ण हो सकता है; विवेक से कहा जाना चाहिए कि कब पीछे हटना है, कब मदद चाहिए।
2–3 संकेतक विचार
क्रॉस-रेफरेंस (संक्रिय संदर्भ)
- नीतिवचन 6:1-3: आवश्यकता पड़ने पर ऋण-उद्धार के परिणाम—कभी-कभी स्वयं को बंधन में डालना पड़ता है, पर विवेक से बचा जा सकता है।
- नीतिवचन 22:26-27: बिना अनुमति के उधार-सम्बन्धी प्रतिज्ञा में न उलझें; अधिकार रखें ताकि आप लाभ-हानि के बीच संतुलन बनाए रखें।
- मत्ती 5:37: “हाँ–हाँ, नहीं–नहीं” की स्पष्टता और सीमा-रेखा: जमानत या प्रतिबद्धता के समय स्पष्टता बनाए रखना चाहिए।
पूर्व-व्याख्या से प्रमुख पाठ
यह वाक्य सामाजिक और वित्तीय निर्णयों में विवेकपूर्ण सीमाओं की वकालत करता है। जो लोग जमानत या अन्य दायित्व लेते हैं, उन्हें संभव जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है; इसके विपरीत, भयमुक्तन से भरे रहने का आह्वान है—परिणामतः मनुष्यों के प्रति ईमानदार और सावधान बने रहने की नीति।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जो व्यक्ति अस्थिर दायित्वों से बचता है, वह आत्म-नियंत्रण और शांति प्राप्त करता है। लेकिन यह कुशलता केवल ठहराव नहीं है; आवश्यकता पड़ने पर सत्य-निष्ठ रहते हुए सही सलाह और सहायता मांगना भी उचित है।