नीतिवचन 11:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

कोप के दिन धन से तो कुछ लाभ नहीं होता, परन्तु धर्म मृत्यु से भी बचाता है।

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नीतिवचन 11:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 11:4 का टिप्पणी-आधार

पद्य: कोप के दिन धन से तो कुछ लाभ नहीं होता, परन्तु धर्म मृत्यु से भी बचाता है।

तत्काल संदर्भ और पाठ का पृष्ठ-पन्ना

यह वाक्य नीतिवचन के नैतिक ज्ञान के भाग का भाग है जहाँ धन-सम्पदा की क्षणिक महत्ता बनाम धार्मिक आचरण की स्थायित्वपूर्ण महत्ता बताई गई है। कारण-धर्म से ही बाहरी लाभों से अधिक आंतरिक शांति और शास्त्र-सार का लाभ मिलता है, विशेषकर तब जब विपत्ति या दंड का समय आये।

ईश्वरीय दृष्टि से पाठ का संदेश

यह उद्धाटन दिखाता है कि ईश्वर के सामने मानवीय व्यवहार की सही कसौटी क्या है: तात्कालिक धन-सफलता से अधिक धर्म, जिसकी गहराई से जीवन की दिशा बनती है। कोप (क्रोध) के दिन धन से लाभ न होने का तात्पर्य यह कि सच्चे लाभ तब मिलते हैं जब व्यक्ति परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप सचेतन रहता है और अन्याय से दूर रहता है। धर्म here मृत्यु के प्रभाव—यानी शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की मृत्यु—से बचाता है, जो कि नीतिवचन के चिंतनशील विमर्श का केंद्र है।

शब्दों और चित्रों के स्पष्टीकरण

  • कोप के दिन — क्रोध, विभ्रम या उन्माद का समय; ऐसी परिस्थिति जहाँ मनुष्य व्यवहार की अस्थिरता से नुकसान उठाता है।
  • धर्म — सत्य, नैतिकता, ईश्वर के अनुसार जीवन-नीति का पालन; 성령-प्रेरित आचरण जो जीवित संबंध को बनाये रखता है।

उल्लेखनीय क्रॉस-रेफरेंसे

1) रोमियों 8:6-7 — शरीर-जीवन के मर्यादा बनाम आत्मा-जीवन के लाभ का तुलनात्मक विचार। धर्मीय आचरण से मोक्ष और शांति मिलती है।

2) मत्ती 6:19-21 — धन की सुरक्षा क्षणिक है, परन्तु स्वर्गीय धरोहर स्थायी है; वस्तुओं के पीछे न भागकर आंतरिक धन की खोज ज़रूरी है।

3) व्यवस्थापक 5:10 — जो धन को अधिकारपूर्वक उपयोग नहीं कर पाते, वे उसका अभाव अनुभव करते हैं; धर्मी आचरण से आशीषों का लाभ स्थिर रहता है।

ऐतिहासिक टिप्पणियों के सार (संक्षेप)

इतिहासिक पंडितों के विचारों में यह वाक्य एक स्पष्ट संदेश देता है कि सांसारिक लाभ समय-सीमा के भीतर होते हैं, जबकि धर्म-जीवन स्थायित्व देता है।

मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के अनुभागों का आवश्यक संक्षेप इस प्रकार है: धर्म-जीवन को प्राथमिकता देने से व्यक्ति की आत्मा और समुदाय की सुरक्षा होती है; धन के वैराग्य से कुछ क्षणिक लाभ मिलते हैं परन्तु वे अंततः नष्ट हो जाते हैं जब बाहरी संकट आते हैं।

वर्तमान-जीवन में लागू करने योग्य शिक्षा

  1. विपत्ति के समय धन के बजाय आस्थावान आचरण का चयन करें।
  2. अपने नैतिक मूल्य बनाए रखें — क्रोध या भय से धन-लाभ के पीछे भागना उचित परिणाम नहीं देता।
  3. धर्म का अभ्यास परिवार, समुदाय और समाज के लिए सुरक्षा का आधार बनता है; छोटे-छोटे नैतिक निर्णयों में भी सत्य-आचरण दिखाएँ।

सार-सार: यह पाठ धन की क्षणिक महत्ता के विरुद्ध धर्म की स्थायित्वपूर्ण सुरक्षा पर प्रकाश डालता है—धर्म मृत्यु से भी बचाता है, यानि धार्मिक सत्य और ईश्वर-आस्था से वास्तविक जीवन की सुरक्षा मिलती है।

सूक्ष्म उद्धरण (यदि आवश्यक): “धर्म मृत्यु से भी बचाता है”—आडंबर-रहित ईमानदारी और सत्य के साथ जीवन जीने की प्रेरणा।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 11:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहोवा के रोष के दिन में, न तो चाँदी से उनका बचाव होगा, और न सोने से; क्योंकि उसके जलन की आग से सारी पृथ्वी भस्म हो जाएगी; वह पृथ्वी के सारे रहनेवालों को घबराकर उनका अन्त कर डालेगा।

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वे अपनी चाँदी सड़कों में फेंक देंगे, और उनका सोना अशुद्ध वस्तु ठहरेगा; यहोवा की जलन के दिन उनका सोना चाँदी उनको बचा न सकेगी, न उससे उनका जी सन्तुष्ट होगा, न उनके पेट भरेंगे। क्योंकि वह उनके अधर्म के ठोकर का कारण हुआ है।

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