Old Testament
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सपन्याह 1:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा के रोष के दिन में, न तो चाँदी से उनका बचाव होगा, और न सोने से; क्योंकि उसके जलन की आग से सारी पृथ्वी भस्म हो जाएगी; वह पृथ्वी के सारे रहनेवालों को घबराकर उनका अन्त कर डालेगा।
सपन्याह 1:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 1:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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सपन्याह 3:8 (HINIRV) »
इस कारण यहोवा की यह वाणी है, “जब तक मैं नाश करने को न उठूँ, तब तक तुम मेरी बाट जोहते रहो*। मैंने यह ठाना है कि जाति-जाति के और राज्य-राज्य के लोगों को मैं इकट्ठा करूँ, कि उन पर अपने क्रोध की आग पूरी रीति से भड़काऊँ; क्योंकि सारी पृथ्वी मेरी जलन की आग से भस्म हो जाएगी। (प्रकाशित. 16:1)

यहेजकेल 7:19 (HINIRV) »
वे अपनी चाँदी सड़कों में फेंक देंगे, और उनका सोना अशुद्ध वस्तु ठहरेगा; यहोवा की जलन के दिन उनका सोना चाँदी उनको बचा न सकेगी, न उससे उनका जी सन्तुष्ट होगा, न उनके पेट भरेंगे। क्योंकि वह उनके अधर्म के ठोकर का कारण हुआ है।

सपन्याह 1:18 – इस वचन का अभिप्राय
यहोवा के क्रोध के दिन में धन-सम्पत्ति की कीमत नहीं होगी; न चांदी और न सोना बचाव दे पाएंगे। उस दिन पृथ्वी जलाने वाली आग से भस्म हो जाएगी और सारे रहने वाले भय में गिरेंगे। यह चेतावनी दिखाती है कि परमेश्वर के तिनके-तिनके नियमों से भी बड़ा आशीर्वाद और सुरक्षा का स्रोत यही है कि मनुष्य अपने पापों से विनती और दिशा मोड़ दे।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
स्पष्ट रूप से सपना-याह की पुस्तक מרכזित संदेश यह है कि यहोवा के रोष का दिन एक सीमित नहीं है, बल्कि वह न्याय का दिन है जिसमें कुल विश्व शासन-व्यवस्था निष्प्राण हो जाएगी। शास्त्र-विज्ञान यह दर्शाता है कि उस दिन धन, सत्ता या ख्याति कुछ भी नहीं चलेगा; केवल परमेश्वर के न्याय के सामने मानवता की निर्भरता स्पष्ट होती है।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
संयुक्त विचार-सार (2-3 पंक्तियाँ)
यह वचन मानवीय प्रणालियों के समाप्त होने को दिखाता है—धन, शक्तिशाली शासन और बड़े-बड़े लक्ष्यों के बावजूद, एक दिन सब कुछ परमेश्वर के न्याय के सामने मूल्यहीन हो जाता है। यह सुधरने की पुकार है कि व्यक्ति अपने स्रोत-आधार को धन से नहीं, परमेश्वर के साक्षात्कार और उनकी करुणा में ढूंढ़े।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त व्याख्या)
यिर्मयाह 17:5-6 से मिलती-जुलती चेतावनी है कि धन पर निर्भर रहने वाला पर्वत-गृह सूखे पड़ेगा। यह प्रमुख संदेश अस्थिरता के बारे में है और परमेश्वर की निर्भरता के महत्व को रेखांकित करता है। प्रेरित पौलुस के शब्द 1टीमothe 6:17-19 भी धन-सम्मत जीवन की नाशवादी प्रकृति की ओर इशारा करते हैं, और यह सिखाते हैं कि धन को ईश्वर-सेवा में उपयोग करना चाहिए, न कि उसे ईश्वर-स्थान मानना। इसके अलावा यशायाह 2:22 के साथ तुलना करें—अंततः सब सांसारिक सत्ता क्षीण हो जाती है, जबकि परमेश्वर का राज्य स्थिर रहता है।
धर्म-जीवन पर व्यावहारिक निष्कर्ष
1) अपनी सुरक्षा के स्रोत को धन-सम्पत्ति में नहीं, बल्कि परमेश्वर की नीति-निष्ठा में रखें। 2) अति प्रतिष्ठा और भौतिक साधनों के भरोसे के बजाय पवित्र जीवन और दूसरों की सहायता को प्राथमिकता दें। 3) सचेत रहें कि समय के साथ आने वाला भय और पाप का परिणाम मृत्यु नहीं, बल्कि परमेश्वर के न्याय के साथ जुड़ता है—तैयारी बनाए रखें।
शब्द-स्वरूप और उद्धरण संकेत
नोट: नीचे दी गई पंक्तियाँ केवल संदर्भ के लिए उद्धृत हैं; पूर्ण पाठ नहीं दिए जाते:
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के समर्थित अभिज्ञान से प्राप्त संगत टिप्पणी के संदेश के भीतर, उनके प्रमुख बिंदुओं को समाहित किया गया है।
अनुमत शब्द-उद्धरण (जहाँ उपलब्ध हो):
“यहोवा के जलन की आग से सारी पृथ्वी भस्म हो जाएगी”—यह एक प्रचलित टिप्पणी का संक्षेप है जो मैथ्यू हेनरी और एडम क्लार्क के अनुवाद-धाराओं में समान रूप से मिलता है।