Old Testament
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सपन्याह 3:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण यहोवा की यह वाणी है, “जब तक मैं नाश करने को न उठूँ, तब तक तुम मेरी बाट जोहते रहो*। मैंने यह ठाना है कि जाति-जाति के और राज्य-राज्य के लोगों को मैं इकट्ठा करूँ, कि उन पर अपने क्रोध की आग पूरी रीति से भड़काऊँ; क्योंकि सारी पृथ्वी मेरी जलन की आग से भस्म हो जाएगी। (प्रकाशित. 16:1)
सपन्याह 3:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 3:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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योएल 3:2 (HINIRV) »
उस समय मैं सब जातियों को इकट्ठा करके यहोशापात की तराई में ले जाऊँगा, और वहाँ उनके साथ अपनी प्रजा अर्थात् अपने निज भाग इस्राएल के विषय में जिसे उन्होंने जाति-जाति में तितर-बितर करके मेरे देश को बाँट लिया है, उनसे मुकद्दमा लड़ूँगा।

सपन्याह 1:18 (HINIRV) »
यहोवा के रोष के दिन में, न तो चाँदी से उनका बचाव होगा, और न सोने से; क्योंकि उसके जलन की आग से सारी पृथ्वी भस्म हो जाएगी; वह पृथ्वी के सारे रहनेवालों को घबराकर उनका अन्त कर डालेगा।

भजन संहिता 27:14 (HINIRV) »
यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बाँध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हाँ, यहोवा ही की बाट जोहता रह! (भज. 31:24)
संकेत और संदर्भ: सपन्याह 3:8 (HINIRV)
पसल का यह पाठ सपन्याह के उद्धारक-केन्द्रित संदेश में एक कठोर चेतावनी के रूप में आता है। यहाँ यहोवा कहता है कि जब तक वह नाश करने को नहीं उठेगा, तब तक प्रजा को धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करनी है; फिर जाति-जाति और राज्य-राज्य के समूहों को एकत्र कर उनके ऊपर अपने क्रोध की आग जलाकर पूरी रीति से जलाया जाएगा, क्योंकि सारी पृथ्वी उसकी जलन से ज्वालामय हो जाएगी। इसका संकेत न सिर्फ दंड का है, बल्कि अविश्वास और बिखराव के अंधकार में ईश्वर के न्याय की निर्णायक पलक की ओर इशारा है।
मुख्य अर्थ संक्षेप
इस वाणी में ईश्वर अपनी योजनाओं की स्पष्टता और समय-सारिणी की मांग कैसे बनाते हैं, यह दिखता है। वह कहता है कि प्रतीक्षा महत्त्वपूर्ण है—उसे हाथ में लेने के बजाय, वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ठान लेता है और फिर वह जाति-जाति के समूहों को इकट्ठा कर—उन पर न्याय की आग लाएगा। यह संदेश प्रकट करता है कि धैर्य और आस्था, परमेश्वर के नियोजन के संदर्भ में जरूरी हैं; और साथ ही यह दर्शाता है कि पथभ्रष्ट राज्यों और राष्ट्रों के विरुद्ध परमेश्वर का न्याय अवश्य क्रियान्वित होगा।
केंद्रीय विषय
कानूनी और संदर्भित सूक्तियाँ (cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के न्याय का आना अवश्य है, पर मनुष्यों को उसका इंतजार और आत्म-नियमन भी आवश्यक है।
ऐतिहासिक-आध्यात्मिक प्रकाश
पसन्याह की किताब में प्रेषित चेतावनी एक समय की प्रतीक्षा की घंटी है—उस समय जब दया के साथ न्याय भी एक साथ पूर्ण होंगे। एडम क्लार्क, एलबर्ट बर्स और मैथ्यू हेनरी जैसे पुरान टिप्पणीकारों के समझ के अनुसार यह शास्त्रीय संदेश एक चेतावनी है कि विश्व-व्यवस्था के प्रति मानवीय विश्वास और नीति-व्यवस्था के द्वारा भी सुरक्षा नहीं मिलती; परमेश्वर की योजना और उसके न्याय-युक्त समय पर ही भलाई संभव है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जहाँ उपलब्ध):
“जब तक मैं नाश करने को न उठूँ, तब तक तुम मेरी बाट जोहते रहो”—यह पाठ में स्पष्ट चेतावनी के साथ धैर्य की मांग है।
व्यावहारिक ध्यान
संक्षिप्त सार
सपन्याह 3:8 एक कठोर, परन्तु स्पष्ट संदेश देता है कि परमेश्वर के समय पर न्याय आएगा और विश्व की पथभ्रष्ट व्यवस्थाओं पर उसकी आग पड़कर समस्त पृथ्वी पवित्रता के साथ पश्चात्ताप करेगी। प्रतीक्षा में आस्था और नैतिकता दोनों की रक्षा करें—क्योंकि ईश्वर के क्रोध का दिन समय पर आएगा, लेकिन वह अपने लोगों के लिए उद्धार और आशा भी बनाए रखता है।