Old Testament
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योएल 3:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उस समय मैं सब जातियों को इकट्ठा करके यहोशापात की तराई में ले जाऊँगा, और वहाँ उनके साथ अपनी प्रजा अर्थात् अपने निज भाग इस्राएल के विषय में जिसे उन्होंने जाति-जाति में तितर-बितर करके मेरे देश को बाँट लिया है, उनसे मुकद्दमा लड़ूँगा।
योएल 3:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योएल 3:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 14:2 (HINIRV) »
क्योंकि मैं सब जातियों को यरूशलेम से लड़ने के लिये इकट्ठा करूँगा, और वह नगर ले लिया जाएगा। और घर लूटे जाएँगे और स्त्रियाँ भ्रष्ट की जाएँगी; नगर के आधे लोग बँधुवाई में जाएँगे, परन्तु प्रजा के शेष लोग नगर ही में रहने पाएँगे।

यशायाह 66:16 (HINIRV) »
क्योंकि यहोवा सब प्राणियों का न्याय आग से और अपनी तलवार से करेगा; और यहोवा के मारे हुए बहुत होंगे।

सपन्याह 3:8 (HINIRV) »
इस कारण यहोवा की यह वाणी है, “जब तक मैं नाश करने को न उठूँ, तब तक तुम मेरी बाट जोहते रहो*। मैंने यह ठाना है कि जाति-जाति के और राज्य-राज्य के लोगों को मैं इकट्ठा करूँ, कि उन पर अपने क्रोध की आग पूरी रीति से भड़काऊँ; क्योंकि सारी पृथ्वी मेरी जलन की आग से भस्म हो जाएगी। (प्रकाशित. 16:1)
योएल 3:2 का संदर्भ और उद्घाटन सेटिंग
यह वचन यह दिखाता है कि यहोवा अपने लक्ष्यपूर्ण न्याय और दया के साथ, अनकहे राज्यों और जातीय विभाजन से ऊपर उठकर अंत में हर जाति-प्रजाति को एक जगह एकत्र कर मुकद्दमा करेगा। योएल स्पष्ट करता है कि अंतिम दिनों में परमेश्वर यहूदियों के साथ-साथ अन्य जातियों को भी एक मंच पर लाकर उनके बीच की सीमाओं को मिटाने और देश-देश के बंटवारे के कारण पैदा हुए विवादों को परास्त करेगा। तराई, जोहशापात (यहोशापात) की तराई, वह स्थान है जहाँ परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के साथ एक निर्णायक हिसाब-किताब के लिए उपस्थित होगा।
ईश्वर के प्रति विश्वास और न्याय का उद्घाटन
यह पाठ यह बताता है कि परमेश्वर का उद्देश्य सिर्फ इकबाल या सुरक्षा नहीं, बल्कि वाचा के अनुसार विश्वस्त राष्ट्रों के बीच न्याय-पूर्ण समन्वय है। वह पाप के परिणामस्वरूप बँटवारे को पलट कर एक नया अनुभव बनाते हैं—जहाँ उनकी प्रजा, अर्थात् इस्राएल और अन्य जातियाँ, दोनों एक साथ परमेश्वर के राज्य-शासन में भागीदारी करेंगी। यह मानव-निर्मित विभाजन नहीं, पर परमेश्वर की राज-भूमि में एकता का संकेत है।
शब्दों और चित्रों कीclarification
— तराई: एक स्थान-विशेष जहां परमेश्वर अपने न्याय और निर्णय कर सकता है; यह चुने हुए लोगों के लिए भी एक तपस्या-स्थल बन सकता है।
— जाति-जाति का विभाजन: इतिहास में बड़े पैमाने पर हुए विभाजन, जिन्हें परमेश्वर अब एक साथ जोड़ना चाहते हैं, ताकि उनकी महिमा दुनिया में प्रकट हो सके।
संबद्ध दृष्टांत और अभिलेख
यह अध्याय पुराने परमेश्वर-नियम में नये आयाम जोड़ता है—याकूब के प्रतिज्ञी बच्चों के समान, अब सब जातियाँ एक नइयां गठबंधन के भीतर आते दिखती हैं। तुलनात्मक संदेशों में यहूदियों के साथ अन्य जातियों के परमेश्वर-नाते की पुनःस्थापना का दृश्य मिलता है, जो आशीष और न्याय की एकता को दर्शाते हैं।
संबंधित पवित्र ग्रंथ
आज के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
— आपसी विभाजन और घृणा के स्थान पर सह-अस्तित्व और करुणा को बढ़ावा दें।
— समुदायिक समझ के लिए मौलिक प्रश्न उठाएं: कैसे हम विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों को ईश्वर के नाम में एक साथ ला सकते हैं?
— विश्वास, न्याय और दया के साथ सामाजिक बंधनों को मजबूत करें; अन्य जातियों के साथ ईमानदार नाते बनाएं, ताकि परमेश्वर की महिमा दुनिया के सामने प्रकट हो।
कथन-नुक़्ता (Cross-references)
— अन्यजातीय राष्ट्र के प्रति आशिष का संदेश: इस्राएली-जाति के साथ-साथ जातीय एकता के संकेत। छोटे-छोटे संकेतों के अंतर्गत यह दिखाता है कि परमेश्वर की वाणी सभी के लिए है; यही नया सामाजिक-धार्मिक संतुलन है।
— परमेश्वर के उद्धार के क्रम में सीमा-रेखाओं का टूटना: हर एक समुदाय के भीतर एकात्मता के लिए मार्ग बनना।
— दया और न्याय के संतुलन: अधिकार और दया के साथ जीवन-चर्या का पुनर्निर्माण।
महत्वपूर्ण उद्धरण-तत्व
यदि आवश्यक हो, मैं Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरणों के संक्षेप भाग दे सकता/सकती हूँ, लेकिन यहाँ मुख्य रूप से समन्वित हिन्दी स्पर्श पर जोर है।