Old Testament
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योएल 3:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस प्रकार तुम जानोगे कि यहोवा जो अपने पवित्र पर्वत सिय्योन पर वास किए रहता है, वही हमारा परमेश्वर है। और यरूशलेम पवित्र ठहरेगा, और परदेशी उसमें होकर फिर न जाने पाएँगे।
योएल 3:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योएल 3:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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योएल 2:27 (HINIRV) »
तब तुम जानोगे कि मैं इस्राएल के बीच में हूँ, और मैं, यहोवा, तुम्हारा परमेश्वर हूँ और कोई दूसरा नहीं है। मेरी प्रजा की आशा फिर कभी न टूटेगी।।

नहूम 1:15 (HINIRV) »
देखो, पहाड़ों पर शुभसमाचार का सुनानेवाला और शान्ति का प्रचार करनेवाला आ रहा है! अब हे यहूदा, अपने पर्व मान, और अपनी मन्नतें पूरी कर, क्योंकि वह दुष्ट फिर कभी तेरे बीच में होकर न चलेगा, वह पूरी रीति से नष्ट हुआ है। (प्रेरि. 10:36, रोम. 10:15 इफि. 6:15)

यशायाह 52:1 (HINIRV) »
हे सिय्योन, जाग, जाग! अपना बल धारण कर*; हे पवित्र नगर यरूशलेम, अपने शोभायमान वस्त्र पहन ले; क्योंकि तेरे बीच खतनारहित और अशुद्ध लोग फिर कभी प्रवेश न करने पाएँगे। (प्रका. 21:2,10,27)
योएल 3:17 — संदर्भित पाठ का तत्कालीन सेटिंग
यह योएल की पुस्तक में परमेश्वर के न्याय और उद्धार के भविष्यवाणीय संदेश का भाग है। पंक्ति-शृंखला में यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने पवित्र पर्वत सिय्योन पर निवास करने वाला है; यह वचन यहूदियों के लिए एक भरोसेमंद संकेत है कि उनके बीच ईश्वर का विशेष मुकुट-स्थान और पवित्रता बरकरार रहेगी। यरूशलेम का पवित्र ठहरना बतलाता है कि अन्य जातियाँ भी उसी सीमा-रेखा के भीतर आकर परमेश्वर के राज्य में भागीदारी करेंगी। इस पाठ का मूल उद्देश्य परमेश्वर के एकत्व, पवित्रता और राज्य-स्वामित्व को दृढ़ता से प्रतिपादन करना है, ताकि यहोवा के लोग उसके पवित्र पर्वत पर उपस्थित रह सकें।
ईश्वर की पहचान और विश्वास पर जो कुछ बताता है
इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि यहोवा ही एकमात्र परमेश्वर है—वही जो सिय्योन पर निवास करता है और वही हमारा परमेश्वर है। यह बताता है कि ईश्वर का स्वामित्व और ठिकाना स्थाई है; उसका स्थान केवल जगह-विशिष्ट नहीं, बल्कि उसके राज्य के कानूनी और नैतिक स्वभाव का प्रतीक है। साथ ही यह भी संकेत है कि भविष्य में यहूदी-जाति के साथ-साथ अन्य राष्ट्रों को भी उसकी पवित्रता में प्रवेश मिलेगा, जैसे कि परमेश्वर अपनी पवित्रता through उनके एकत्व के द्वारा दिखाता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवि-समझौते
इन छवियों से यह धारणा उभरती है कि ईश्वर अपने लोगों के साथ एक निर्भर और संरक्षित रिश्ता बनाते हैं; उनकी पवित्रता और राज्य-स्वामित्व का मान maintained रहता है।
संबद्ध आयतें (संक्षिप्त संदर्भ)
1) एक ऐसी स्थिति का संकेत जहाँ परमेश्वर का राज्य सभी में फैलता है — अन्य ntiyah पाठों में भी ईश्वर की राजधानी के स्थान का संकेत मिलता है।
2) यहोवा के पवित्र अस्तित्व और उसकी पवित्र व्यवस्था पर बल, जो शान्ति और सुरक्षा प्रदान करती है।
3) राष्ट्र-गण के साथ ईश्वर के संबंध की पुनर्स्थापना—हर जाति को अपनी जगह मिलती है।
आज के समय में अनुप्रयोग
हम किन परिस्थितियों में भी यह निष्कर्ष मानते हैं कि परमेश्वर हमारे साथ है और उसका राज्य हमारे भीतर बन सकता है? — यह पाठ आश्वस्त करता है कि ईश्वर अपने लोगों को पवित्रता के मार्ग पर बुलाते हैं, ताकि हमारे जीवन हमेशा उनके राज्य के दायरे में रहें। यह कहता है कि जब हम ईश्वर के पवित्र स्थान की तलाश करते हैं, तो हमारे समाज में भी शांति और सुरक्षा का विस्तार होता है।
पूर्व-प्रकाशन टिप्पणी (संक्षेप)
मव्वल टिप्पणीकारों से एकीकृत अवलोकन: मैथ्यू हेनरी ने यह दर्शाने की कोशिश की है कि परमेश्वर की पवित्रता और उसका निवास-स्पर्श 우리 जीवन में नज़दीकी और सुरक्षा लाता है। अळबर्ट बार्न्स ने ईश्वर के एकत्व और राज्य-स्वामित्व के परिप्रेक्ष्य को धारण करते हुए यह पढ़ना समझाया है कि यह पाठ भरोसे के साथ जुड़ा है कि ईश्वर अपने लोगों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बनाते हैं। एडम क्लार्क ने भी पवित्रता के साथ ईश्वर के राज्य के विस्तार पर जोर दिया है, ताकि पवित्रता मनुष्य के लिए आशीष बने।
महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध हो):
— “यहोवा जो अपने पवित्र पर्वत सिय्योन पर वास किए रहता है, वही हमारा परमेश्वर है।”
संघटक निष्कर्ष: यहोवा का निवासस्थान और उसका पवित्र राज्य—यही संदेश है जो भविष्य के उद्धार की दिशा दिखाता है, और साथ ही यह आज हमारे जीवन में विश्वसनीय सुरक्षा और नैतिकता के स्रोत के रूप में प्रभाव डालता है।