Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयोएल 3:18 बाइबल पद की व्याख्या
योएल 3:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उस समय पहाड़ों से नया दाखमधु टपकने लगेगा, और टीलों से दूध बहने लगेगा, और यहूदा देश के सब नाले जल से भर जाएँगे; और यहोवा के भवन में से एक सोता फूट निकलेगा, जिससे शित्तीम की घाटी सींची जाएगी।
योएल 3:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
योएल 3:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

प्रकाशितवाक्य 22:1 (HINIRV) »
फिर उसने मुझे बिल्लौर के समान झलकती हुई, जीवन के जल की एक नदी* दिखाई, जो परमेश्वर और मेम्ने के सिंहासन से निकलकर,

यशायाह 35:6 (HINIRV) »
तब लँगड़ा हिरन की सी चौकड़ियाँ भरेगा और गूँगे अपनी जीभ से जयजयकार करेंगे। क्योंकि जंगल में जल के सोते फूट निकलेंगे और मरूभूमि में नदियाँ बहने लगेंगी; (मत्ती 11:5, यशा. 41:17-18)

यशायाह 30:25 (HINIRV) »
उस महासंहार के समय जब गुम्मट गिर पड़ेंगे, सब ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों और पहाड़ियों पर नालियाँ और सोते पाए जाएँगे।
यहोवा की चंगाई का आशीर्वाद: योएल 3:18 की व्याख्या
सीधा अर्थ: उस समय पहाड़ों से नया दाखमधु टपकने लगेगा, चोटों से दूध बहने लगेगा, यहूदिया के नाले जल से भर जाएँगे, और परमेश्वर के भवन (यूहन्ना-स्थल) से एक स्रोत फूट निकलेगा जो शित्तीम की घाटी को सींचेगा। यह बिजली-सी सृष्टि-प्रतीति उस समय की प्रतीक है जब परमेश्वर अपने लोगों पर अनुग्रह और प्रसन्नता की बहारी वर्षा भेजता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ: योएल (यहोवा से सम्बद्ध) का लेख छोटा-सा मगर गहराई से रहस्यपूर्ण है।योएल के समय क्षेत्र में अकाल, विभिन्न विपत्तियाँ थीं; परन्तु इन बातों के बीच परमेश्वर अपने लोगों के बीच पुनः निवास करें—यह संदेश है। इस उच्छ्वासन में परमेश्वर का डिक्री-स्तर देखी जा सकती है: पवित्र चंगा, आशीर्वाद का प्रवाह और स्थल-स्थापना का पुनर्निर्माण।
जो सामान्यतः देखने को मिलता है ( interpretive observations ):
मुख्य विषयवस्तु (संक्षेप): - दिव्य आशीर्वाद और पुनर्निर्माण का समय। - प्रकृति और मंदिर के समन्वय में जीवन का प्रवाह। - यहूदा-राज्य में भरे हुए जल-जीवन और शांति की उम्मीद।
cross-references (संकेतन) और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण:
व्यावहारिक निष्कर्ष: यदि परमेश्वर अपने लोकों पर आशीर्वाद का नाथ खोलता है तो जीवन की बहार हमारे दैनिक जीवन में भी झलकती है—आत्मा की ताज़गी, रिश्तों में संतुलन, और समाज में मदद-परिवहन की प्रेरणा। व्यक्तिगत विवेक में यह विचार करें: क्या मैं अपनी उम्मीदों को इस आशीर्वाद-प्रवाह के अनुरूप ढाल रहा हूँ? क्या मुझे अपने आचरण में ऐसी प्रार्थना और सहायता के लिए खुला रहना चाहिए?
आखिरी सार: योएल 3:18 बताता है कि परमेश्वर का राज जीवन-प्रवाहों के रूप में आता है—प्रकृति, जीव-जीवन और मंदिर-केन्द्रित आशीर्वादों से भरा। यह संदेश हर युग के विश्वासियों के लिए है: आध्यात्मिक प्यास बुझाने वाला स्रोत, जहाँ से एक नई घाटी सींचती है और समाज-जीवन मेंresurrection जैसी खुशियाँ लाता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (एच.एम. केरल से हल्का संदर्भ): यदि उपलब्ध हो तो नीचे दिये गए छोटे उद्धरणों को संदर्भित किया गया है।
-Albert Barnes से छोटा उद्धरण: “...” (यदि मिलेंगे) नहीं मिला तो नहीं दिया गया।
-Adam Clarke से छोटा उद्धरण: “...” (यदि मिलेंगे) नहीं मिला तो नहीं दिया गया।