Old Testament
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योएल 3:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“क्योंकि सुनो, जिन दिनों में और जिस समय मैं यहूदा और यरूशलेमवासियों को बँधुवाई से लौटा ले आऊँगा,
योएल 3:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योएल 3:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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सपन्याह 3:19 (HINIRV) »
उस समय मैं उन सभी से जो तुझे दुःख देते हैं, उचित बर्ताव करूँगा। और मैं लँगड़ों को चंगा करूँगा, और बरबस निकाले हुओं को इकट्ठा करूँगा, और जिनकी लज्जा की चर्चा सारी पृथ्वी पर फैली है, उनकी प्रशंसा और कीर्ति सब कहीं फैलाऊँगा।

यिर्मयाह 30:3 (HINIRV) »
क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं कि मैं अपनी इस्राएली और यहूदी प्रजा को बँधुआई से लौटा लाऊँगा; और जो देश मैंने उनके पितरों को दिया था उसमें उन्हें फेर ले आऊँगा, और वे फिर उसके अधिकारी होंगे, यहोवा का यही वचन है।”

आमोस 9:14 (HINIRV) »
मैं अपनी प्रजा इस्राएल के बन्दियों को लौटा ले आऊँगा, और वे उजड़े हुए नगरों को सुधारकर उनमें बसेंगे; वे दाख की बारियाँ लगाकर दाखमधु पीएँगे, और बगीचे लगाकर उनके फल खाएँगे।
योएल 3:1 पर टिप्पणी — संदर्भ व प्रमुख विचार
योएल की पुस्तक में यह आयत एक निर्णायक आश्वासन का भाग है। यहह प्रमुख घोषणा करती है कि परमेश्वर उन दिनों में फिर से इस्राएल और यातना के बाद उनकी स्थिति में परिवर्तनकारी कदम उठाने का संकल्प ले रहे हैं। बाइबल के पाठ में ‘तभी’ और ‘जब समय’ का संकेत एक बहुधा प्रार्थनात्मक और प्रतीकात्मक संदेश के रूप में आता है: परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों को पुनः समृद्धि, स्वतंत्रता और हरेक बंधन से शोधित होने की ओर लौटाएंगे।
मुख्य विचार
यह आयत दो चीजों की पुष्टि करती है: पहला, परमेश्वर की कृपा के समय-सारणी में बंधुवाई से लौटना एक वास्तविक और सामूहिक घटना है; दूसरा, लौटने का उद्देश्य यह है कि यहूदा और यरूशलेमवासियों के साथ नई स्थापना बन सके—रिश्ता पहले जैसा गाढ़ा हो, और परमेश्वर की उपस्थिति पुनः उनके बीच स्थिर हो।
दो-तीन प्रमुख विषय
अनुसंगत आयत-उद्धरण (cross-references)
- इब्रानियों 8:10 के अनुसार परमेश्वर का नया वाचा कर्तव्य के साथ जुड़ा है, ताकि लोग उनके नियमों को अपने हृदय में रखें; यह लौटने के पीछे की आंतरिक परिवर्तन की परंपरा का संकेत देता है।
- यशायाह 44:28 और 60:1-3 में भी लौटते समय परमेश्वर की विजय और उज्जवल आहुति दिखती है; वे प्रजा की मुक्ति के लिए फिर से उठते हैं।
- रोमियों 11:26-27 में यहूदियों के अद्भुत फिर वापसी और उन पर निर्मित शांति का संकेत मिलता है।
इन संदर्भों से मालूम होता है कि बन्धन से मुक्ति और पुनःस्थापना एक समग्र योजना का हिस्सा है, जिसमें परमेश्वर की वाणी और भक्तों की आस्था मिलकर नवीन अवस्था बनाते हैं।
व्यावहारिक विचार
हम कैसे इस आयत के अनुसार जीते हैं? पहले, विश्वास की दिशा स्पष्ट होनी चाहिए—परमेश्वर की कृपा act करें; दूसरे, हमारी आस्थागत प्रतिक्रिया यह कि हम दयालुता, सामर्थ्य और उद्धार का जीवन अपनाएं। तीसरे, समुदाय के भीतर बंधन टूटे—मालूम हो कि पुनःसमारोह और भलाई के अवसर एक साथ आते हैं; इसलिए प्रार्थना और सहयोग के साथ एक नया आरम्भ करें।
संक्षेप
योएल 3:1 बताता है कि परमेश्वर अपने निर्णयों के अनुसार लौटने और बंधन-बंधन से मुक्ति के समय का निर्धारण कर रहे हैं, ताकि यहूदा और यरूशलेमवासियों के लिए नई आशा और नई स्थापना संभव हो सके। यह आयत भविष्य की तुलनात्मक विजय और आध्यात्मिक पुनर्निर्माण की दिशा दिखाती है, जिसमें आस्था और लगन दोनों मिलकर परमेश्वर के उद्धार के मार्ग को खोलते हैं।
पंजीकृत उद्धरण (अगर उपलब्ध हों)
प्रमुख सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों से मिलते तत्वों को समाहित किया गया है। यदि Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शॉर्ट उद्धरण उपलब्ध होते, तो वे नीचे उद्धृत किए जाते, पर यहाँ मूल विचारों के साथ एकीकृत साहित्यिक धारा बनी है।