Old Testament
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जकर्याह 14:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि मैं सब जातियों को यरूशलेम से लड़ने के लिये इकट्ठा करूँगा, और वह नगर ले लिया जाएगा। और घर लूटे जाएँगे और स्त्रियाँ भ्रष्ट की जाएँगी; नगर के आधे लोग बँधुवाई में जाएँगे, परन्तु प्रजा के शेष लोग नगर ही में रहने पाएँगे।
जकर्याह 14:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 14:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 9:27 (HINIRV) »
और यशायाह इस्राएल के विषय में पुकारकर कहता है, “चाहे इस्राएल की सन्तानों की गिनती समुद्र के रेत के बराबर हो, तो भी उनमें से थोड़े ही बचेंगे। (यहे. 6:8)

लूका 21:20 (HINIRV) »
“जब तुम यरूशलेम को सेनाओं से घिरा हुआ देखो, तो जान लेना कि उसका उजड़ जाना निकट है।

यशायाह 13:16 (HINIRV) »
उनके बाल-बच्चे उनके सामने पटक दिए जाएँगे; और उनके घर लूटे जाएँगे, और उनकी स्त्रियाँ भ्रष्ट की जाएँगी।
जकर्याह 14:2 का महत्व और इसका संदर्भ
यह पद एक भविष्यवाणी का हिस्सा है जहाँ परमेश्वर के उद्धार और न्याय की योजना को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया गया है। यरूशलेम पर विविध शक्तियाँ टूट पड़ेंगी, परन्तु परमेश्वर का नियन्त्रण बना रहता है। यह वचन हमें लाभ देता है कि कठिन समय में भी प्रभु की संदर्शनीय योजना सत्य है और उसकी बईमानों के विरुद्ध न्याय होगा।
आसक्ति और मूल संदर्भ
पंक्तियाँ अठाहरवीं-चौदहवीं अध्याय के क्षेत्र में आती हैं, जहाँ जोकरीह के भविष्यवाणीकार ने यरूशलेम के भाग्य के बारे में परमेश्वर की योजना का नाटक-सा चित्रण किया है। उस समय की राजनीतिक उथल-पुथल, राष्ट्रों का गठबंधन और परमेश्वर की सत्ता के सामने उनके计划 का सीमित हो जाना—ये सब मिलकर यह संदेश देते हैं कि परमेश्वर अपने निर्दिष्ट समय पर सत्य को स्थापित करेगा।
मुख्य संदेश
कहावत का तात्पर्य यह है कि यरूशलेम को बाहरी आक्रमणों से बहुधा "कंधे-से-कंधे" लड़ना पड़ेगा; नगर पर कब्जा हो सकता है, लूट-भरे और अपमानजनक परिस्थितियाँ पैदा हो सकती हैं; परन्तु परमेश्वर के लक्ष्य के अनुरूप, शेष प्रत्यक्ष-प्रभुीय संरक्षण रहता है। अंततः परमेश्वर के न्यायपूर्ण शासन की स्थापना होगी और उसकी पवित्रता के कारण शहर की स्थिति सुधरेगी।
उद्धृत विचार और क्रिस-टेस्टेड अंतर्दृष्टि
यहाँ प्रकट होते हैं: - परमेश्वर की सार्वभौमिक सत्ता: ऐसी विपत्तियाँ भी নিয়ंत्रण के दायरे में हैं; राष्ट्र कितने भी बड़े क्यों न हों, परमेश्वर का निर्णय सर्वोपरि है। - परीक्षण के समय में विश्वासी आशा: कठिन समय में भी प्रजा में से कुछ लोग सुरक्षित रहेंगे; यह प्रभु की रक्षा और विश्वास की निरंतरता पर संकेत देता है। - अभिमुख-उद्धार की पूर्व-घोषणा: आंतरिक बदलाव और नैतिक सुधार की अपेक्षा बन सकती है, ताकि ईश्वर के निकटता की अनुभूति बनी रहे।
कुछ उपयोगी क्रॉस-रेफरेंसे
ये संदर्भ बतलाते हैं कि कठिन परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, परमेश्वर का राजा-तंत्र स्थिर रहता है और उसकी शान्ति में हमारी आस्था टिके रहती है।
प्रायोगिक और आध्यात्मिक उपयोग
- विश्वासियों के लिए: कभी-कभी जीवन में अराजकता आती है; स्रोत चाहे बाहरी शक्तियाँ हों या आंतरिक संकट—हम प्रभु में स्थिर रहें, क्योंकि वह समय-समय पर उद्धार की राह दिखाते हैं।
- समुदाय के लिए: सामाजिक असमानताएँ और भय के बावजूद, परमेश्वर का लक्ष्य है न्यायपूर्ण व्यवस्था। इस आशा के साथ सामुदायिक सहभागिता और दया बढ़ानी चाहिए।
चिंतनात्मक devotional विचार
जो कुछ भी क्षणभर दर्द दे, वह परमेश्वर के आख्यान का हिस्सा है। हमारी सुरक्षा उसकी योजना के अनुरूप है, और पवित्र मार्ग पर चलते हुए हम परमेश्वर के न्याय और दया के साथ आगे बढ़ते हैं।
सूक्ष्म उद्धरण नोट
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के तुलनात्मक टिप्पणी-उद्धरण ग्रहण करें, तो स्पष्ट शब्दों में वे यह बताते हैं कि परमेश्वर की योजना समय पर पूरी होती है और विश्वासी उसकी सुरक्षा में सुरक्षित रहते हैं।
संक्षिप्त समापन
यजरूशलेम के संघर्ष के बीच भी, प्रभु का राज स्थापित होगा। यह संदेश हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन में धैर्य, विश्वास और नैतिकता बनाए रखने के लिए एक प्रेरणा है।