Old Testament
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जकर्याह 14:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उस दिन यहोवा की ओर से उनमें बड़ी घबराहट पैठेगी, और वे एक दूसरे के हाथ को पकड़ेंगे, और एक दूसरे पर अपने-अपने हाथ उठाएँगे।
जकर्याह 14:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 14:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 12:4 (HINIRV) »
यहोवा की यह वाणी है, उस समय मैं हर एक घोड़े को घबरा दूँगा, और उसके सवार को घायल करूँगा। परन्तु मैं यहूदा के घराने पर कृपा-दृष्टि रखूँगा*, जब मैं अन्यजातियों के सब घोड़ों को अंधा कर डालूँगा।

न्यायियों 7:22 (HINIRV) »
और उन्होंने तीन सौ नरसिंगों को फूँका, और यहोवा ने एक-एक पुरुष की तलवार उसके संगी पर और सब सेना पर चलवाई; तो सेना के लोग सरेरा की ओर बेतशित्ता तक और तब्बात के पास के आबेल-महोला तक भाग गए।

1 शमूएल 14:15 (HINIRV) »
और छावनी में, और मैदान पर, और उन सब लोगों में थरथराहट हुई; और चौकीवाले और आक्रमण करनेवाले भी थरथराने लगे; और भूकम्प भी हुआ; और अत्यन्त बड़ी थरथराहट हुई।
जकर्याह 14:13 — पाठ का तात्पर्य और समझ
इस पद का तत्काल दृश्य यह है कि यहोवा की दिनचर्या में ऐसी विचित्र घटनाओं का संकेत देता है जब ईश्वर के कानून के अनुरूप राष्ट्र-युद्ध और उद्धार के क्षण अत्यंत विकट बन जाते हैं। यहाँ घबराहट और हाथ पकड़ने-झुकने जैसी हरकतें दिखती हैं; लोग एक-दूसरे से सहारा मांग रहे हैं, दुख के कारण नियंत्रण खो रहे हैं। यह दृश्य तब आता है जब यरूशलेम के आस-पास के लोग एक दूसरे से संघर्ष करते हैं, परन्तु यह घबराहट परमेश्वर की कमान और न्याय के अभाव में नहीं, बल्कि उसके अनुग्रह और उद्धार के समय में घटती है। यह बात ध्यान देती है कि परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा के लिए कैसे क्रिया-शील रहता है, भले ही स्थितियाँ कितनी भी अस्थिर क्यों न हो जाएं।
यह पाठ क्या बताता है: परमेश्वर की भूमिका और विश्वास
वचन यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपने पवित्र शहर और निवासियों के उद्धार के लिए शक्ति प्रदर्शित करेगा। बड़े भय के समय लोग अपनी सुरक्षा के लिए एक-दूसरे के हाथ पकड़ेंगे—जो मानवीय निर्भरता और घबराहट को भी दर्शाता है—परन्तु यह भी दिखाता है कि परमेश्वर अपना हस्त-संयम रखते हैं और ऐसे क्षणों में भी उनकी योजना पूरी होती है। यह विश्वास देता है कि संकट के बीच faith की एकता बनती है: एक ही परमेश्वर की ओर सहायता और बचाव की उम्मीद।
प्रमुख शब्दों और छवियों की स्पष्टीकरण
घबराहट से तात्पर्य है डर और उलझन का एक संग्राम जिसमें मन साहस नहीं पाता; परन्तु यह घबराहट परमेश्वर के कार्य के समय में आती है, ताकि उद्धार का स्पष्ट प्रकोप दिखे। हथ पकड़ना एक एकात्मता और सुरक्षा की खोज है—यह दर्शाता है कि मानवीय ढांचे कितने ही मजबूत हों, वास्तविक सुरक्षा परमेश्वर के कार्य के लिए आह्वान है।
अन्य प्रासंगिक पाठ
− से एक: यशायाह 33:6 में धार्मिक और सामाजिक स्थिरता परमेश्वर के ज्ञान और भय के कारण बनी रहती है।
− से एक: जश्च 40:31 में परमेश्वर की ओर भरोसा रखने वालों के लिए बल और साहस की वर्षा का उल्लेख है।
− से एक: दानियाल 3–4 के दृश्यों में दुखी समयों में ईश्वर के उद्धार की गवाही मिलती है, जिससे विश्वास बढ़ता है।
इन तुलनाओं से स्पष्ट होता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर अपने लोगों के लिए सुरक्षा और आशा की व्यवस्था बनाते हैं।
आज के अभ्यास—जीवन में अनुप्रयोग
सीधे उद्धरण — ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के संक्षेप विचार
मैथ्यू हीन्री (Matthew Henry) ने इस तरह के दृश्य को “परमेश्वर की राजधानी और उसकी सुरक्षा के लिए गरीबों-चाहने वालों की सहायता” के रूप में समझाया है—परमेश्वर के उद्धार के अनुकूल एकजुटता का संकेत।
अल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) ने कहा है कि यह स्थिति मानव भय और निर्भरता की कड़ी परीक्षा है जो बताती है कि उद्धार कैसे दिखाई देता है जब लोग एक दूसरे के साथ हाथ पकड़ते हैं।
एडम क्लार्क (Adam Clarke) के अनुसार यह दृश्य दिखाता है कि परमेश्वर अपने न्याय की शीघ्रता से प्रतिक्रिया करता है और धर्मी के लिए सुरक्षा और राजसी शक्ति को प्रकट करते हैं।
इन विचारों में एक संगत धुरी दिखती है: संकट के समय लोग एक दूसरे का सहारा बनते हैं, पर वास्तविक उद्धार और सुरक्षा परमेश्वर के हाथों में है।