Old Testament
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जकर्याह 14:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और पृथ्वी के कुलों में से जो लोग यरूशलेम में राजा, अर्थात् सेनाओं के यहोवा को दण्डवत् करने के लिये न जाएँगे, उनके यहाँ वर्षा न होगी*।
जकर्याह 14:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 14:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 14:4 (HINIRV) »
देश में वर्षा न होने से भूमि में दरार पड़ गई हैं, इस कारण किसान लोग निराश होकर सिर ढाँप लेते हैं।

यशायाह 60:12 (HINIRV) »
क्योंकि जो जाति और राज्य के लोग तेरी सेवा न करें वे नष्ट हो जाएँगे; हाँ ऐसी जातियाँ पूरी रीति से सत्यानाश हो जाएँगी।

आमोस 4:7 (HINIRV) »
“और जब कटनी के तीन महीने रह गए, तब मैंने तुम्हारे लिये वर्षा न की; मैंने एक नगर में जल बरसाकर दूसरे में न बरसाया; एक खेत में जल बरसा, और दूसरा खेत जिसमें न बरसा; वह सूख गया।
क्यों यह पद महत्वपूर्ण है
यकर्याह 14:17 का यह वचन उस वैश्विक उत्तरदायित्व और परमेश्वर की सार्वभौमिक न्यायशीलता को उजागर करता है—यह दर्शाता है कि अंतिम दिवस में देश-विदेश के लोग भी उस दिन के आयोजन और उसकी पूजा में सहभागी होंगे या उसके परिणाम भुगतेंगे। यह पद चेतावनी और प्रेरणा दोनों है: चेतावनी उन लोगों के लिये जो परमेश्वर के सम्मुख न झुकेंगे, और प्रेरणा उन विश्वासियों के लिये जो यह जानते हैं कि संसार भर में परमेश्वर की सर्वोच्चता मान्य होगी।
मूल संदर्भ
यकर्याह (Zechariah) का यह भाग भविष्यदर्शी भाषा में अंतिम दिनों के न्याय और उद्धार की घटनाएँ बताता है। पूरे अध्याय में यह द्रश्य है कि परमेश्वर यरूशलेम को उज्जवल बनाएगा, वहाँ युद्ध और परिश्रम का निवारण होगा, परन्तु उसी समय एक सख्त चेतावनी भी है: जो लोग दुष्टता में बने रहेंगे और ईश्वर के साम्राज्य की प्रस्तुति में भाग नहीं लेंगे, उनके लिये दण्डात्मक परिणाम होंगे। श्लोक 17 विशेष रूप से उन विदेशियों का उल्लेख करता है जो "राजा, अर्थात् सेनाओं के यहोवा" को दण्डवत् करने नहीं आते—उनके लिये वर्षा रुके होने का वर्णन न्याय की प्रतीक के रूप में प्रस्तुत है।
मुख्य संदेश
1) सर्वत्र उपस्थिति: परमेश्वर का शासन सीमाओं से परे होगा; उसकी पूजा और सम्मान अंततः पृथ्वी के सब देशों तक पहुँचेगा।
2) उत्तरदायित्व और सहभागी होना: अंत में उपस्थित होना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परमेश्वर के न्याय और राजा के अधीनता को स्वीकारना है।
3) परिणाम की सख्ती: जो लोग जानबूझकर भाग नहीं लेंगे उन्हें प्राकृतिक साधनों में कमी जैसी सजा का सामना करना होगा—यहाँ वर्षा का अभाव दण्ड और अनुभूति का प्रतीक है।
समर्थक बाइबिल विषय
उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंस
1) प्रेरितों के कार्यों 2:21 — वहाँ भी उद्धार और परमेश्वर की सार्वभौमिकता का आश्वासन है; उस दिन जो नाम प्रभु का आह्वान करेगा वह बचाया जाएगा। यह संदर्भ दिखाता है कि परमेश्वर के साम्राज्य में प्रवेश का आधार पहचान और समर्पण है, न कि केवल जन्मस्थान।
2) मत्ती 25:31–46 — अंतिम न्याय का द्रश्य जहाँ मसीह सब राष्ट्रों के बीच अलगाव करेगा; यह श्लोक यकर्याह की चेतावनी से मिलती है कि कार्यों और आचरण के अनुसार परिणाम होंगे।
3) मलग्म 1:11 (भभ्रांत संदर्भ) — यदि वार्षिक कृत्य और उपासना का ध्यान रखें, तो परमेश्वर की मांगों का उल्लंघन प्रेम-पूर्वक उत्तर दिया जाना चाहिए; वर्षा के निषेध का चित्रण प्राकृतिक व्यवस्था के रूप में दंड का संकेत देता है।
समीक्षात्मक दृष्टि और प्रामाणिक टिप्पणीकारों से संकेत
मैथ्यू हेनरी के विचारों में अक्सर यह पाया जाता है कि अंतिम दिनों की चेतावनियाँ लोगों को तौबा और समर्पण के लिये प्रेरित करती हैं; अल्बर्ट बार्न्स ने इन श्लोकों को परमेश्वर की न्यायिक सूझबूझ और राष्ट्रों के लिये स्पष्ट परिणाम के रूप में देखा। ऐडम क्लार्क का संक्षेप यह बताता है कि भविष्यवाणी का व्यावहारिक पक्ष—यानी जो जनता धर्म की प्रक्रिया में भाग न लें वे वास्तविक जीवन में नुकसान सहेंगे—उपर्युक्त संदेश को ठोस बनाता है। (उल्लेखनीय उद्धरण: Matthew Henry ने कहा है कि "the judgments foretold are intended to awaken the careless"—यह संक्षेप उद्धव का भाव देता है।)
आध्यात्मिक प्रतिबिंब
यह पद हमें व्यक्तिगत और सामूहिक उत्तरदायित्व की याद दिलाता है। न केवल यरूशलेम का द्रश्य, बल्कि हर विश्वासी के जीवन में यह प्रश्न है: क्या मैं उस दिन परिपूर्ण समर्पण के लिये तैयार हूँ? वर्षा का न होना केवल भौतिक अभाव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक परिणाम का प्रतीक है—जो परमेश्वर के सामने न झुकते, वे आध्यात्मिक जीवन की आवश्यक पोषण से वंचित रहेंगे। अतः यह वचन हमें प्रेरित करता है कि आज ही प्रभु की ओर मुड़ें, उसकी अधिकारिता स्वीकार करें और उस वैश्विक आरंभ में सहभागी बनें जिसे भविष्यवाणी दर्शाती है।