Old Testament
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जकर्याह 14:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोवा निकलकर उन जातियों से ऐसा लड़ेगा जैसा वह संग्राम के दिन में लड़ा था।
जकर्याह 14:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 14:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 12:9 (HINIRV) »
उस दिन मैं उन सब जातियों का नाश करने का यत्न करूँगा जो यरूशलेम पर चढ़ाई करेंगी।

2 इतिहास 20:15 (HINIRV) »
तब वह कहने लगा, “हे सब यहूदियों, हे यरूशलेम के रहनेवालों, हे राजा यहोशापात, तुम सब ध्यान दो; यहोवा तुम से यह कहता है, 'तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है।

दानिय्येल 2:44 (HINIRV) »
और उन राजाओं के दिनों में स्वर्ग का परमेश्वर, एक ऐसा राज्य उदय करेगा जो अनन्तकाल तक न टूटेगा, और न वह किसी दूसरी जाति के हाथ में किया जाएगा। वरन् वह उन सब राज्यों को चूर-चूर करेगा, और उनका अन्त कर डालेगा; और वह सदा स्थिर रहेगा; (प्रका. 11:15)
मुख्य व्याख्या बिंदु
जकर्याह 14:3 में कहा गया है कि यहोवा उन जातियों से युद्ध करेगा जैसे वह संग्राम के दिन लड़ा था। इसका आशय यह है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए निर्णायक संरक्षण और अविश्वसनीय उपस्थिति से लड़ाई को जीतेंगे, और यह युद्ध अंतिम चेतावनी नहीं, बल्कि उद्धार की दृढ़ गारंटी है। यह पवित्र भूमि का उद्धार और विश्वासियों के लिए अतिशय सुरक्षा का स्मारक है, जहाँ ईश्वर अपने वायदे के अनुसार इतिहास की धारा को मोड़ते हैं।
साहित्यिक प्रसंग
प्यारे पवित्र शहर पर आक्रमण की आशंका के बीच योद्धा-पराक्रम से भरे हुए अध्यायों में यह आग्गमन स्पष्ट करता है कि यहोवा अपने लोगों के ऊपर न सिर्फ आशीष, बल्कि निर्णायात्मक दण्ड भी लाता है। जकर्याह के प्रकरणों में यह दोहराव है कि परमेश्वर की सत्ता संसार के राजाओं से अधिक है; वह न्याय और उद्धार दोनों को एक साथ लाता है।
धार्मिक महत्त्व
यह वाक्य विश्वासी जीवन के लिए दो संदेश देता है: पहली बात, भरोसा है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ है और युद्ध उसके अनुसार होता है; दूसरी बात, नीति और शौर्य के साथ भित्र-आत्मा की रक्षा भी निर्णायक बनती है। अतः यह पंक्ति भविष्य की महिमा को उभारती है- परमेश्वर की नियति के अनुसार धर्मी का राज्य स्थिर रहता है।
ईश्वरीय संबंध और पवित्र शास्त्र के बीच कड़ियाँ
पाठ के भीतर प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
जकर्याह 14:3 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के हाथ सर्वथा शक्तिशाली हैं और उनके द्वारा किया गया युद्ध सही और न्यायपूर्ण होता है। यह ঈश्वर-प्रणाली का एक चिह्न है कि वह अपने लोगों के साथ है, चाहे किस प्रकार की विपदा आ जाए; अंतिम विजय उसी की है।
नियमित उद्धरण (जहाँ संभव)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के पारंपरिक टिप्पणीकारों के विचारों से मिलते-जुलते सांकेतिक बिंदु यहाँ एकीकृत करते हैं। उनके अनुसार परमेश्वर का यह युद्ध उसके लोगों के लिए सुरक्षा और न्याय की पुष्टि है; उन्होंने यह भी दर्शाया है कि कठिन समय में परमेश्वर की उपस्थिति संतुष्टि और शांति प्रदान करती है।
क्रॉस-रेफरेंस
यशायाह 9:5–6 के प्रकार में "विद्युत प्रभुता" और रोम 8:31–39 के अंदेशा-आश्वासन आते हैं—इनमें परमेश्वर की विश्वव्यापी नियंत्रण शक्ति दर्शती है। यह उल्लेखनीय है कि इन संदर्भों में भी ईश्वर की रक्षा और उद्धार का भाव एक समान है और यह हमारे दुखद समयों में स्थिरता प्रदान करता है।