Old Testament
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2 इतिहास 20:15 पर टिप्पणी (HINIRV)
योशफात के समय यहोवा का संदेशातंर भीड़ से डरने के बजाय परमेश्वर पर भरोसा करने की प्रेरणा देता है। यहवह समय जब यहूदियों के सामने शक्तिशाली सेना खड़ी थी; परमेश्वर उनके डर को दूर कर कहते हैं कि यह युद्ध उनका नहीं, परमेश्वर का है। संदेश यह है कि विरोध के मुख पर अड़ी भय के बजाय विश्वास और ध्यान केंद्रित कर परमेश्वर की सहायता की मांग करें।
मुख्य अर्थ
यह verse यह दर्शाता है कि लड़ाइयाँ मानव उपायों से नहीं, परमेश्वर के निर्देश और उसकी शक्तिप्राप्ति से जीती जाती हैं। यहूशाज (यहोशापात) और उसके साथियों के लिए यह चेतावनी और आश्वासन दोनों है: भयग्रस्त न हों, चरण-कदम मिलाकर यरूशलेम के प्रभु पर विश्वास रखें; “युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है।”
तीन प्रमुख विषय
संदर्भित अन्य बाइबिल अंश (cross-references)
- यशायाह 41:10: “डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ; यह मुझे स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर हर संकट में साथ है।”
- यिर्मयाह 1:19: “वे तुम्हारे विरुद्ध नहीं टिक सकेंगे; क्योंकि मैं तुम्हारे साथ हूं।”
- पतरस 5:7: “सब चिंता ऊपर डाल दो, क्योंकि वह तुम्हारा खयाल रखेगा।”
नोट: इन संदर्भों में भी भय बनाम विश्वास का संघर्ष और परमेश्वर की सहायता का आश्वासन स्पष्ट होता है, जो इस verse के साथ गहन संगतता बनाते हैं।
मुख्य पंक्ति विचार
यहोवा का वचन यह है कि मानव-युद्धों की दिशा परमेश्वर के हाथ में है। हमरा दृढ़ विश्वास तब उभर कर सामने आता है जब हम परिस्थितियों के बावजूद इस बात को मान लेते हैं कि परमेश्वर हमारे साथ है और उनका इरादा हमारे लिए कल्याण का है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
सार-सार
2 इतिहास 20:15 यह याद दिलाता है कि परमेश्वर के साथ विश्वास रखने पर भय के क्षण भी अवसर बन जाते हैं। यह संदेश आज भी प्रेरक है: संकट के समय भी हमारा युद्ध परमेश्वर का है और उसी की सहायता पर टिका रहने से विजयी मार्ग खुलते हैं।
अनुदेश-सार: इस विशिष्ट पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों से संक्षिप्त, ठोस टिप्पणियाँ स्वाभाविक रूप से समाहित की गई हैं—परंतु विस्तृत उद्धरणों के लिए नीचे दिए गए स्पष्ट संकेतों के अनुसार संयोजन किया गया है:
“यह युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है।” (Matthew Henry, सार-संक्षेप)