2 इतिहास 20:36 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अर्थात् उसने उसके साथ इसलिए मेल किया कि तर्शीश जाने को जहाज बनवाए, और उन्होंने ऐसे जहाज एस्योनगेबेर में बनवाए।

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2 इतिहास 20:36 पद-दर-पद बाइबल टीका

मतलब का संक्षेप

यह पद बताता है कि राजा यहोशाफ़ात ने तर्शीश जाने के उद्देश्य से समुद्री जहाज बनवाने को कुछ मेल-फेर किया ताकि उन्हें मार्गदर्शक जलयान मिल सके। यह दृश्य यह दिखाता है कि वे लोग अपने सैन्य-योजना के लिए समुद्री मार्ग की खोज में थे, परन्तु परमेश्वर की अनुमति और मार्गदर्शन से ही आगे बढ़ना चाहिए था।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

2 इतिहास 20 में यहोशाफ़ात के समय का इतिहास है। खास तौर पर यह पद का भाग वह है जहाँ राजा तर्शीश (हबकीय या असीरियन क्षेत्र के साथ) की यात्रा के लिए जहाजों के निर्माण की योजना बनाते हैं। इस संदर्भ में यह दिखता है कि वे अपने साम्राज्य की सुरक्षा के लिए व्यापारी मार्ग और नौ-यात्रा को महत्त्व देते थे, परन्तु परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चलना सर्वोपरि है।

व्याख्यात्मक निष्कर्ष

  • योजना बनती है, पर प्रयोग का मार्गदर्शन परमेश्वर से चाहिए। जहाज बनाने का विचार यह संकेत देता है कि यहोशाफ़ात अपनी सामर्थ्य और संसाधनों पर निर्भर थे, जो अच्छे विचार होते हुए भी परमेश्वर की वाणी के अनुरोध के बिना अधूरा था।
  • क्योंकि ईश्वर की अनुमति बिना सफलता नहीं मिलती, इस लिए परमेश्वर ने यह योजना रोक दी। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि आध्यात्मिक सुरक्षा हेतु क्रिया से पहले परमेश्वर की अनुमति ज़रूरी है।
  • धार्मिक और राजसी शक्ति को बाहरी संसाधनों से बढ़ाने का प्रयास भी हो सकता है, परन्तु विनम्रता से परमेश्वर के मार्ग में विचरण करना अनिवार्य है।

संकेत भविष्य के पाठों के लिए सन्निहितCross-References

1) समुचित निर्णय लेने के लिए परमेश्वर की प्रेरणा की आवश्यकता को उजागर करने वाले अन्य उद्धरण: एक अन्य स्थान जहां राजा लोग अपनी योजनाओं के लिए परमेश्वर की सहायता माँगते हैं। यह दिखाता है कि नेतृत्व के लिए परमेश्वर की मार्गदर्शन कितनी निर्णायक भूमिका निभाता है।

2) विश्वास और योजनाओं के मेल पर विचार: यहूदी-प्रशस्त मार्ग में मानव योजना बनती है पर परमेश्वर की इच्छा सर्वोपरि होती है; इससे सीख मिलती है कि संसारिक उपायों को भी परमेश्वर की योजना के अधीन रखना चाहिए।

छोटा थीमैटिक सूची

अनुष्ठानिक उल्लेख और तुलनात्मक दृष्‍टि

यह घटना हमें यह सिखाती है कि राजा अपनी योजनाओं के समय परमेश्वर के निर्देश को प्राथमिकता दें। यह Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सामान्य चिंतन के अनुरूप है कि बाहरी संसाधनों के जरिए सफलता पाने का प्रयास तब तक अधूरा है जब तक परमेश्वर की इच्छा स्पष्ट न हो।

कंक्रिट-सीधी सीख

व्यवहारिक तौर पर आज के पाठक के लिए यह सीख है: किसी भी बड़े योजना के पहले प्रार्थना करें, आत्म-निर्भरता से हटकर परमेश्वर की इच्छा को अपना मार्ग बनाएं, ताकि सफलता बिना बाधा पीछे न रहे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 20:36 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फिर राजा सुलैमान ने एस्योनगेबेर में जो एदोम देश में लाल समुद्र के किनारे एलत के पास है, जहाज बनाए।

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क्योंकि समुद्र पर हीराम के जहाजों के साथ राजा भी तर्शीश के जहाज रखता था, और तीन-तीन वर्ष पर तर्शीश के जहाज सोना, चाँदी, हाथीदाँत, बंदर और मयूर ले आते थे।

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क्योंकि हीराम के जहाजियों के संग राजा के जहाज तर्शीश को जाते थे, और तीन-तीन वर्ष के बाद तर्शीश के ये जहाज सोना, चाँदी, हाथीदाँत, बंदर और मोर ले आते थे।

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