2 इतिहास 20:29 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और जब देश-देश के सब राज्यों के लोगों ने सुना कि इस्राएल के शत्रुओं से यहोवा लड़ा, तब उनके मन में परमेश्‍वर का डर समा गया।

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2 इतिहास 20:29 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 इतिहास 20:29 संदर्भ और immediate setting

यहोशाफ़ात के समय, यरूशलेम और सामर्थ्यशाली सेनाओं के ठिकाने से बाहर, यहोवा ने इस्राएल के शत्रुओं को परास्त कर दिया। तब सब देश-देश के राज्यों ने सुना कि यहोवा ने इस्राएल के साथ लड़कर उनकी शक्तियों को पराजित किया है, और उनके मन में परमेश्वर का डर समा गया। यह घटना राष्ट्रीय ध्वनि के रूप में उनका भय और ईश्वर के सामर्थ्य की एक सार्वजनिक स्वीकृति बन जाती है।

ईश्वर या विश्वास के बारे में इस पाठ से जो स्पष्ट होता है

पहचानने योग्य संदेश यह है कि युद्ध-जगत में परमेश्वर का क्रोध या संकेत केवल इक़ायती विरोध के बजाय, राष्ट्र-समूहों के लिए एक सार्वजनिक प्रमाण बनता है कि यहोवा ही असली परमेश्वर है। इस साहसिक विजय के पीछे विश्वास की सच्चाई—यहोवा के साथ रहने और उसकी आज्ञाओं का पालन—उच्चा ऊँचा प्रभाव डालता है। यह पाठ यह भी बताता है कि ईश्वर की महिमा जब प्रकट होती है, तब अन्य राष्ट्र भी दया और भय से प्रतिक्रिया करते हैं, न कि केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट समझ

“परमेश्‍वर का डर” एक ऐसी स्थिति है जिसमें लोग ईश्वर के महानता, पराक्रम और न्याय के सामने अपने अहंकार को छोड़कर सम्मान और विनय स्वीकार करते हैं। यह डर केवल भय नहीं, बल्कि विश्वासी आस्था की स्वीकृति है कि ईश्वर सब कुछ के मालिक हैं।

संबंधित आयतें और उनके विचार

  • यशायाह 2:11-12: राष्ट्रों के सिंहासन एक दिन शून्य हो जाएंगे और परमेश्वर के अद्भुत नाम से भय होगा—विश्वास की सार्वजनिक मान्यता का स्वरूप।
  • गिनती 14:9: परमेश्वर की सहायता पर स्थिर रहने से डर नहीं होना चाहिए; विश्वास के साथ चलना है।

इन संदर्भों में यह दिखता है कि परमेश्वर के साथ आस्था रखने से जातीय मानवीय भय घटता है और उसके साक्ष्य से लोगों के हृदयों में नम्रता आती है।

पवित्र ग्रंथों के साथ सम्वाद और अभ्यास

2 इतिहास 20 में यहोवा की विजय के बाद सन्नद्ध प्रत्यक्ष परिणाम एक जन-धार्मिक जागृति के रूप में सामने आते हैं: देश-देश के राज्यों में ईश्वर के डर का जागरण। इस प्रकार अभ्यास में यह प्रेरणा मिलती है कि कठिन समय में ईश्वर की सहायता पर विश्वास बनाए रखना चाहिए, क्योंकि उसकी महिमा बड़ी है और वह अपने लोक के उद्धार के लिए कार्य करता है।

आज के संदर्भ में व्यावहारिक शिक्षा

  • विश्वास के समय स्पष्ट संकेत मिलते हैं: परमेश्वर के साथ कदम मिलाकर चलना भय को कम करता है और विश्वास से विजय मिलती है।
  • समूहिक चेतना में ईश्वर के डर का प्रसार—नए विश्वासियों के लिए प्रेरणा बनता है, और पुराने विश्वास को भी पुष्ट करता है।

पंरिचयात्मक टिप्पणी और हार-जीत के पीछे एकीकृत दर्शन

मत्ती हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरी-उद्धरणों की सहज-समवायता इस निष्कर्ष की पुष्टि करती है कि परमेश्वर के विरुद्ध साहस दिखाने वालों के लिए भय, विनय और ईश्वर-भक्ति के मिश्रण में सही दृष्टि आती है। (याद रहे: यदि आपके पाठ में प्रत्यक्ष उद्धरण उपलब्ध हों, तो नीचे उल्लेखित हैं।)

उद्धरण (संभाव्य): “परमेश्वर का डर” शब्द-चित्र का अर्थ यह है कि राष्ट्र अपने स्वरूप में ईश्वर के नियमों के अनुसार ढलते हैं; यह भय सम्मान और समर्पण का संतुलन है।

कुल मिलाकर, यह संदेश देता है कि जंग के समय भी ईश्वर के साथ जुड़ना विश्वास के अनुरूप है और यहोवा की महिमा से भय और सम्मान दोनों आते हैं—जो सामाजिक-धार्मिक एकता और शांतिपूर्ण मानवीय-आचरण के लिए प्रेरणा बनती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 20:29 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहूदा के आस-पास के देशों के राज्य-राज्य में यहोवा का ऐसा डर समा गया, कि उन्होंने यहोशापात से युद्ध न किया।

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तब उन्होंने कूच किया; और उनके चारों ओर के नगर निवासियों के मन में परमेश्‍वर की ओर से ऐसा भय समा गया, कि उन्होंने याकूब के पुत्रों का पीछा न किया।

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उन्होंने गरार के आस-पास के सब नगरों को मार लिया*, क्योंकि यहोवा का भय उनके रहनेवालों के मन में समा गया और उन्होंने उन नगरों को लूट लिया, क्योंकि उनमें बहुत सा धन था।

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