Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 20:1 2 इतिहास 20:2 2 इतिहास 20:3 2 इतिहास 20:4 2 इतिहास 20:5 2 इतिहास 20:6 2 इतिहास 20:7 2 इतिहास 20:8 2 इतिहास 20:9 2 इतिहास 20:10 2 इतिहास 20:11 2 इतिहास 20:12 2 इतिहास 20:13 2 इतिहास 20:14 2 इतिहास 20:15 2 इतिहास 20:16 2 इतिहास 20:17 2 इतिहास 20:18 2 इतिहास 20:19 2 इतिहास 20:20 2 इतिहास 20:21 2 इतिहास 20:22 2 इतिहास 20:23 2 इतिहास 20:24 2 इतिहास 20:25 2 इतिहास 20:26 2 इतिहास 20:27 2 इतिहास 20:28 2 इतिहास 20:29 2 इतिहास 20:30 2 इतिहास 20:31 2 इतिहास 20:32 2 इतिहास 20:33 2 इतिहास 20:34 2 इतिहास 20:35 2 इतिहास 20:36 2 इतिहास 20:37



सीधे अर्थ का संकेत
2 इतिहास 20:3 में कहा गया है कि यहोशापात डर गया और यहोवा की खोज में लग गया, तथा पूरे देश में उपवास का प्रचार करवाया। इसका मूल संदेश यह है कि संकट के समय ईश्वर के साथ संयोजन और पुकार ही सुरक्षा की दिशा है, उपवास और प्रार्थना से मन परिवर्तन और दर्शन प्राप्त होता है।
पृष्ठभूमि
यहोशापात एक समृद्ध और शक्तिशाली राजा था, पर मोर्चे पर धमकियों से घिर गया। इस समय 그의 पहले कदम में भय था, पर उसने तुरंत ईश्वर के पास जाने का निर्णय लिया। यह घटनाक्रम यहूदाओं के बीच सामूहिक आस्थागत प्रतिक्रिया की दिशा निर्धारित करता है—जोश और एकता के साथ प्रभु की खोज।
व्याख्यात्मक बिंदु
मुख्य थीम्स (संक्षित सूची)
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भित पंक्ति-संदर्भ के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण)
- नीतिवचन 3:5-6: भरोसा परमेश्वर पर है; भय के क्षणों में भी; मार्गदर्शन मिल सकता है जब हम पूर्णतया उसे भरोसा करें।
- निर्गमन 14:14: प्रभु स्वयं युद्ध करेगा, यह तत्व यह दिखाता है कि प्रार्थना और निर्भयता के साथ ईश्वर के कार्य होते हैं।
- डीनोद 20:8-9: सामूहिक रणनीति और भगवान के निर्देश का महत्त्व, जो समाजिक प्रयासों को दृढ़ बनाते हैं।
समाप्ति-उपदेश (व्यावहारिक takeaway)
खतरे के समय डर को रोककर, समुदाय-केंद्रित प्रार्थना और उपवास से परमेश्वर के सामने विनय और निर्देश प्राप्त करें। यह परिस्थिति चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हो, ईश्वर के साथ आने और उसकी खोज जारी रखने से आशीष और सुरक्षा मिलती है।
नोट्स
इस पाठ का शाब्दिक संदर्भ और शब्द-चित्र यह दर्शाते हैं कि भय होते हुए भी आध्यात्मिकता को स्थिर रखना और पूरे समुदाय के लिये खुले हृदय से प्रभु को ढूंढ़ना महत्त्वपूर्ण है।
कठोर उद्धरण (संक्षेपित):Matthew Henry/Albert Barnes/Adam Clarke से शाब्दिक कथन उपलब्ध होने पर, इन्हें इस पंक्ति में संक्षेप में शामिल किया गया है; यदि उपलब्ध हो तो वे स्पष्ट रूप से उद्धृत होंगे।