Old Testament
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जकर्याह 14:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
लोग उसमें बसेंगे क्योंकि फिर सत्यानाश का श्राप न होगा; और यरूशलेम बेखटके बसी रहेगी। (प्रका. 22:3)
जकर्याह 14:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 14:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 22:3 (HINIRV) »
फिर श्राप न होगा, और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उसकी सेवा करेंगे। (जक. 14:11)

यिर्मयाह 23:5 (HINIRV) »
“यहोवा की यह भी वाणी है, देख ऐसे दिन आते हैं जब मैं दाऊद के कुल में एक धर्मी अंकुर उगाऊँगा*, और वह राजा बनकर बुद्धि से राज्य करेगा, और अपने देश में न्याय और धर्म से प्रभुता करेगा।

प्रकाशितवाक्य 21:4 (HINIRV) »
और वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा*; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं।” (यशा. 25:8)
जकर्याह 14:11 पर्याय: क्यों यह वचन मायने रखता है
यह वचन यरूशलेम के लंबे समय तक शांत और सुरक्षित रहने के आश्वासन का हिस्साभाग है। भविष्यवाणी में कहा गया है कि राजधानी ऐसी राह पर नहीं चलेगी जहाँ दुष्कर्म या अभिशाप फैलें, बल्कि लोग वहां बसेंगे और सत्यानाश का श्राप नहीं होगा। यह संकेत करता है कि परमेश्वर की योजनाओं के तहत वह शहर, जो आज भी संकटों का केंद्र रहा है, विश्वपूर्ण शांति की स्थिति में विकसित होगा।
原 ctxt: संदर्भ और मूल संदेश
परिप्रेक्ष्य में जकर्याह के संदेश का केंद्रीय विषय—युद्ध, आक्रमण और विनाश के विचारों के बीच परमेश्वर का अभय और उद्धार है। लौटते समय, यरूशलेम के पास की धरती पर शांति का राज स्थापित होगा; लोग वहाँ सुरक्षित और निर्भय जीवन बितेंगे क्योंकि ईश्वर का अनुशासन और आदर्श शासन क्रियाशील होगा। इस संदर्भ में “येरूशलेम बेखटके बसी रहेगी” वह स्थिति है जिसमें नगर के भीतर हर प्रकार के भय, आतंक और अभिशाप से मुक्ति मिली होती है।
मुख्य संदेश: विश्वास और भविष्य के लक्ष्य
इस वचन का मुख्य संदेश है—ईश्वर की सरकार में शांति और सुरक्षा का स्थाई निवास। जो लोग प्रभु की योजना के अनुरूप जीवन जीते हैं, वे सत्यानाश के प्रभावों से मुक्त रहते हैं और यरूशलेम में सत्य और धर्मिकता का वातावरण बना रहता है। यह प्रभु के राज्य के स्वाद और अनुभूति की पुष्टि करता है कि तब शांति का वास्तविक और व्यापक चिह्न स्थापित होगा।
थीम्स और संरचना के साथ सहारा देने वाले विचार
प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
1) प्रकाशितवाक्य 22:3 में विश्वस्त और निष्कलंक जीवन के लिये शांति की स्थिरता का चित्रण—जहाँ मसीह का राज्य पूर्णता में रहेगा।
2) यशायाह 60:18-19—आतंक के स्थान पर प्रभु के प्रकाश और सम्मान का बोलबाला।
3) जमूर 14:9—युद्ध और वैमनस्य के स्थान पर न्याय और झुकाव की बुनियाद।
स्वतंत्र टिप्पणी: हिंदी पाठक के लिए सरल सार
जकर्याह के संदर्भ मेंamate यह संकेत है कि परमेश्वर अपनी राजधानी और विचारधारा के अनुसार एक ऐसी सामाजिक स्थिति बनाता है जिसमें भय, अभिशाप और संकट पीछे छूट जाते हैं। लोगों का स्थायी निवास, सुरक्षा और परमेश्वर के राज्य के अनुरूप जीवन, यह सब मिलकर एक ऐसी दुनिया का चित्र प्रस्तुत करते हैं जहाँ लोग एकजुट हों और ईश्वर का नाम महिमा पाएं।
स्वरचित devotional reflection
जब हम वर्तमान जीवन के तनावों से गुजरते हैं, तब यह वचन स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर की योजना में शांति संभव है—न सिर्फ औपचारिक शांति, बल्कि हृदय और समुदाय की गहराई तक पहुंचने वाली असली शांति। मैं प्रेरित होता हूँ कि मैं भी अपने घर, अपने घर-परिवार और अपने समुदाय में सच, प्रेम और ईश्वर के près‑state के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करूँ। यरूशलेम में जिस प्रकार सत्यानाश के श्राप का अंत हो गया, वैसा ही आज मेरे कर्मों में भी हो, ताकि मैं ईश्वर के राज्य के आकाशीय नमूने बनूँ।
नोट: नीचे दिए कुछ उल्लेखित उद्धरण Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से होने की स्थिति में वे छोटे अंश के रूप में शामिल हैं।