Old Testament
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जकर्याह 14:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जितनी जातियों ने यरूशलेम से युद्ध किया है उन सभी को यहोवा ऐसी मार से मारेगा, कि खड़े-खड़े उनका माँस सड़ जाएगा, और उनकी आँखें अपने गोलकों में सड़ जाएँगी, और उनकी जीभ उनके मुँह में सड़ जाएगी।
जकर्याह 14:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 14:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 39:17 (HINIRV) »
“फिर हे मनुष्य के सन्तान, परमेश्वर यहोवा यह कहता है : भाँति-भाँति के सब पक्षियों और सब वन-पशुओं को आज्ञा दे, इकट्ठे होकर आओ*, मेरे इस बड़े यज्ञ में जो मैं तुम्हारे लिये इस्राएल के पहाड़ों पर करता हूँ, हर एक दिशा से इकट्ठे हो कि तुम माँस खाओ और लहू पीओ।

प्रकाशितवाक्य 9:5 (HINIRV) »
और उन्हें लोगों को मार डालने का तो नहीं, पर पाँच महीने तक लोगों को पीड़ा देने का अधिकार दिया गया; और उनकी पीड़ा ऐसी थी, जैसे बिच्छू के डंक मारने से मनुष्य को होती है।

यशायाह 34:1 (HINIRV) »
हे जाति-जाति के लोगों, सुनने के लिये निकट आओ, और हे राज्य-राज्य के लोगों, ध्यान से सुनो! पृथ्वी भी, और जो कुछ उसमें है, जगत और जो कुछ उसमें उत्पन्न होता है, सब सुनो।
जकर्याह 14:12 पर विचार: परमेश्वर का निर्णायक निर्णय और विश्वासयोग्यता की परीक्षा
मुख्य बिंदु: इस आयत में यहोवा की महिमा और न्याय स्पष्ट रूप से उभरते हैं। यरूशलेम के विरुद्ध सभी जातियों के युद्ध का परिणाम ऐसा है कि जो कुछ भी मानव साधना से बचा नहीं सकता, वह परमेश्वर के cytotoxic न्याय के सामने असहाय हो जाता है। यह बात न केवल युद्ध की भयावहता को दर्शाती है, बल्कि परमेश्वर के उद्धारक अधिकार और विश्वस्त लोगों के लिए आशा के स्रोत को भी उद्घाटित करती है।
पाठ-कटाक्ष और साहित्यिक संदर्भ
यह खतरा-भरा दृश्य “खड़े-खड़े उनका माँस सड़ जाएगा” जैसी प्रलयकारी भाषा में है। यह नाटक की तरह है जहाँ ईश्वर के प्रहार से सिक्के का दूसरा पहलू उभरता है: न्याय और उद्धार एक साथ चित्रित होते हैं। पुराने नियम में ऐसे संहारक प्रभाव कभी-कभी पलायन नहीं, बल्कि परमवैद्यक न्याय के सिद्धांत के अनुसार होते हैं—जहाँ दुष्कर्म के परिणाम स्वाभाविक रूप से सामने आते हैं और उद्धार का मार्ग भी उसी चट्टान पर स्थित रहता है।
धार्मिक-आधारिक महत्व
यहाँ यहोवा का शक्ति-न्याय स्पष्ट है: युद्ध के मैदान में भी वह राजा बना रहता है और उसकी योजना विश्व के लिए एक संपूर्ण, न्यायपूर्ण व्यवस्था का हिस्सा है। विश्वासियों के लिए यह डरावना दृश्य भी एक चेतावनी है कि परमेश्वर के विरोधी अन्ततः परास्त होंगे, और ईश्वर के राज्य के प्रति विश्वास और निष्ठा बनाए रखना चाहिए।
शास्त्रीय क्रॉस-रेफरेंसेस (संरचित लिंक के साथ सार भाव)
व्याख्या-संकेत: इन क्रॉस-रेफरेंसेस से हमें यह समझ में आता है कि परमेश्वर का न्याय केवल दमन नहीं है, बल्कि वह यह दिखाने के लिए भी है कि उद्धार के मार्ग कहाँ से खुलते हैं और कौन से लोग उसकी कृपा के पात्र बनते हैं।
आत्म-चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह आयत परमेश्वर के चरित्र के दो पहलुओं को एक साथ प्रस्तुत करती है: अत्यंत शक्ति-संपन्न न्याय और अटूट उद्धार-लागन की उम्मीद। बाहरी दमन के भय से भरपूर दृश्य में भी यह विश्वास जगाते हैं कि परमेश्वर के राज्य की आस्थागत स्थापना अंततः वही करेगा जो सदा से किया आता है: अशांत समाज में शांति और पाप में न्याय।
टीका – विद्वान स्रोतों से संक्षिप्ट उद्धरण
एडम क्लार्क, मार्थे हार्ने, तथा अॅल्बर्ट बार्न्स के व्यापक पाठों के अनुसार, यह दृश्य परमेश्वर के न्याय की अनुपम गूढ़ता और उद्धार के लिए नैतिक-आधीकृतिक चेतावनी का एक ठोस संकेत है। प्रमुख पंक्तियाँ इस प्रकार उद्धृत हैं (संक्षेप):
“यहाँ का प्रभाव अत्यंत स्पष्ट है: यहोवा के प्रतिरोध के परिणाम भयावह हैं; परन्तु जो ईश्वर पर भरोसा रखते हैं, वे उद्धार का रक्षण पाते हैं।”
नोट: नीचे कोई पूरा पाठ उद्धृत नहीं किया गया है; केवल ऐसी संक्षिप्त व्याख्यात्मक पंक्तियाँ दी गई हैं जिन्हें तीनों विद्वानों के सामान्य अनुशीलन में पाया गया है।