Old Testament
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जकर्याह 14:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उस दिन वह जैतून के पर्वत पर पाँव रखेगा, जो पूर्व की ओर यरूशलेम के सामने है; तब जैतून का पर्वत पूरब से लेकर पश्चिम तक बीचोंबीच से फटकर बहुत बड़ा खड्ड हो जाएगा; तब आधा पर्वत उत्तर की ओर और आधा दक्षिण की ओर हट जाएगा।
जकर्याह 14:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 14:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 11:23 (HINIRV) »
तब यहोवा का तेज नगर के बीच में से उठकर उस पर्वत पर ठहर गया जो नगर की पूर्व ओर है।

मीका 1:3 (HINIRV) »
क्योंकि देख, यहोवा अपने पवित्रस्थान से बाहर निकल रहा है, और वह उतरकर पृथ्वी के ऊँचे स्थानों पर चलेगा।

जकर्याह 14:10 (HINIRV) »
गेबा से लेकर यरूशलेम के दक्षिण की ओर के रिम्मोन तक सब भूमि अराबा के समान हो जाएगी। परन्तु वह ऊँची होकर बिन्यामीन के फाटक से लेकर पहले फाटक के स्थान तक, और कोनेवाले फाटक तक, और हननेल के गुम्मट से लेकर राजा के दाखरस कुण्डों तक अपने स्थान में बसेगी।
जकर्याह 14:4 का वास्तविक अर्थ
इस वाक्य का सीधा भाव है: उस दिन जैतून के पर्वत पर ईश्वर के पाँव टिकेंगे, और पूर्व की ओर यरूशलेम के सामने स्थित यह पर्वत विभक्त होकर पूरब से पश्चिम तक एक बड़ा गड्ढा बना देगा; पर्वत का हिस्सा उत्तर और एक हिस्सा दक्षिण की दिशा में हिल जाएगा। इसका मतलब है कि ईश्वर की उपस्थिति से होने वाला सुप्त प्रभाव क्षेत्र में परिवर्तन करेगा और यरूशलेम के भू-आकृत्य में निर्णायक परिवर्तन दिखेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोवा के दूत ने जकर्याह को भविष्यवाणी में यह दृश्य दिया है ताकि यहूदियों के लिए एक महान उद्धार और राजसी अधिकार की कल्पना स्पष्ट हो सके। यह भाग उस समय की शांति और न्याय की योजना को संकेत करता है जब परमेश्वर अपनी सत्ता से पृथ्वी को पुनः सुव्यवस्थित करेंगे। जैतून का पर्वत संदर्भ के रूप में यरूशलेम के पवित्र नगर का प्रतीक है—जहाँ परमेश्वर के निवास के साथ सीधे सम्बद्धता बनी रहती है।
व्याख्यात्मक बिंदु
कथन से सीखने योग्य पाठ
अन्य समझी जाने योग्य दृष्टांत (क्रॉस-रेफरेंस)
1) दृश्यों में “पर्वत का फटना” एक पुरानी तस्वीर है जिसमें परमेश्वर की असीम शक्ति से शत्रुओं का भाग्य और राष्ट्रों कीBorders पिघल जाती हैं—यह पुराने और नए समझ के बीच परिवर्तन की पुष्टि करता है।
2) न्याय के राज्य की वाचा: पवित्र शास्त्र यह दिखाता है कि परमेश्वर के शासन में न्याय स्थापित होगा, जिससे दुष्टों के नकारात्मक प्रभाव कम होंगे।
3) शांति का युग: यीशु मसीह के राज में शांति का पूर्ण अनुभव संभव होता है, क्योंकि उनका शासन प्रेम, न्याय और सच्चाई पर आधारित है।
सार-निष्कर्ष
जकर्याह 14:4 एक उद्घोष है कि परमेश्वर की महिमा और उसकी योजना से पृथ्वी का भू-आकृतिक व शासन-ढांचा परिवर्तनशील है। यह भविष्यसूचक संकेत देता है कि ईश्वर अपने राज्य को पूर्ण रूप से स्थापित करेंगे, और उसके साथ शांति तथा न्याय का नया युग आयेगा। इस दृश्य में वर्तमान कठिनाइयों के बीच भी आशा बनाए रखनी चाहिए कि परमेश्वर का तख़्त स्थिर है और वह अपने लोगों के लिए उद्धार की राह खोलेगा।
उद्धरण नोट: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारियों की शैली से प्रेरित बिंदु संकलित हैं; इन स्रोतों के सीधे शास्त्रीगणित उद्धरण आवश्यक स्थानों पर संक्षित और संदर्भित हैं—क्योंकि यहाँ पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया, बल्कि उनके विचारों का सार प्रस्तुत किया गया है.
संक्षिप्त संदर्भ
यहोश्व-परीक्षित उद्धार और यरूशलेम की अंतिम स्थिति के लिए अन्य संदर्भ: दानियेल 2, मत्ती 24, प्रकाशित 19-22।