Old Testament
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मीका 1:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि देख, यहोवा अपने पवित्रस्थान से बाहर निकल रहा है, और वह उतरकर पृथ्वी के ऊँचे स्थानों पर चलेगा।
मीका 1:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मीका 1:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 4:13 (HINIRV) »
देख, पहाड़ों का बनानेवाला और पवन का सिरजनेवाला, और मनुष्य को उसके मन का विचार बतानेवाला और भोर को अंधकार करनेवाला*, और जो पृथ्वी के ऊँचे स्थानों पर चलनेवाला है, उसी का नाम सेनाओं का परमेश्वर यहोवा है! (2 कुरि. 6:18,)

यशायाह 26:21 (HINIRV) »
क्योंकि देखो, यहोवा पृथ्वी के निवासियों को अधर्म का दण्ड देने के लिये अपने स्थान से चला आता है, और पृथ्वी अपना खून प्रगट करेगी और घात किए हुओं को और अधिक न छिपा रखेगी।

व्यवस्थाविवरण 32:13 (HINIRV) »
उसने उसको पृथ्वी के ऊँचे-ऊँचे स्थानों पर सवार कराया, और उसको खेतों की उपज खिलाई; उसने उसे चट्टान में से मधु और चकमक की चट्टान में से तेल चुसाया।
मीका 1:3 — संदर्भ और अभिव्यक्ति
इस आगमन-पारा: मीका 1 अध्याय का उद्घाटन दृश्य परमेश्वर के महानतापूर्ण आवेग को दर्शाता है। नीचे दिया गया पाठ कहता है कि יהוה अपने पवित्र स्थान से बाहर निकल रहा है और पृथ्वी के ऊँचे स्थानों पर उतरकर गति करेगा। यह दृश्य किसी एक स्थान-विशेष की नहीं, बल्कि उसका चीत्कार-स्वर है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए सक्रिय हो रहे हैं और उनकी स्थिति-स्थिति को चिह्नित कर रहे हैं।
ईश्वर का स्वरूप और विश्वास का संकेत
लिहाजा यहाँ कहा गया है कि परमेश्वर पवित्रता के केंद्र से बाहर निकल रहा है—यानी उसकी अधिकार-शक्ति और न्याय-अधिकार हर जगह स्पष्ट रूप से क्रियाशील है। यह केवल दंड देने के बारे में नहीं है, बल्कि एक ऐसी क्रिया का उद्घोष है जिसमें ईश्वर अपने चरित्र के तीन अंगों से जुड़ते हैं: पवित्रता, न्याय और उद्धार। समय और परिस्थितियाँ चाहे जो हों, परमेश्वर की आवाज जमीन पर गिरती है और उसे नया ढंग देता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टीकरण
अन्य समान संदर्भ और विचार
परमेश्वर के आक्रमण-कार्य के विचार को अन्य ग्रंथों में भी पाया जाता है। उदाहरणतः यशायाह और जोएएल के भागों में परमेश्वर की कार्रवाइयाँंगी स्पष्ट हैं, जहाँ वह अपने लोक के लिये उद्धार और न्याय की भूमिका निभाते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त संबंध
यशायाह 52:10— परमेश्वर का उद्धारक विराट कार्य उसकी पवित्रता के साथ प्रकट होता है।
हमJeh 2:12–13— पश्चात्ताप और ईश्वर के दया-भाव से जुड़ाव का संकेत।
जोएल 3:16— प्रभु का युद्ध और उद्धार का गान स्थान-स्थान पर गूँजता है।
आधुनिक अनुप्रयोग
हमारी दिनचर्या में यह संदेश है कि ईश्वर की उपस्थिति और क्रिया केवल मंदिर तक सीमित नहीं रहती; वह समय-समय पर हमारे जीवन की ऊँच-नीचों को छूते हैं। संकट या अस्थिरता के समय में भी परमेश्वर के न्याय और उद्धार की योजना सक्रिय है। आत्मा-जीवन के पवित्रता-आचरण को सुदृढ़ करें, ताकि आप एक ऐसी जिंदगी जी सकें जो परमेश्वर को प्रसन्न करे और दूसरों के लिए भी उद्धार का आह्वान बने।
कथन-टुकड़े: प्रकाशित टीका-परिचयों से आवश्यक बोध: पवित्र स्थान से उठना और पृथ्वी पर दिखना—यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए वास्तविक और प्रभावी उपस्थिति होते हैं।