Old Testament
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मीका 7:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हाय मुझ पर! क्योंकि मैं उस जन के समान हो गया हूँ जो धूपकाल के फल तोड़ने पर, या रही हुई दाख बीनने के समय के अन्त में आ जाए, मुझे तो पक्की अंजीरों की लालसा थी, परन्तु खाने के लिये कोई गुच्छा नहीं रहा।
मीका 7:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मीका 7:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 9:10 (HINIRV) »
मैंने इस्राएल को ऐसा पाया* जैसे कोई जंगल में दाख पाए; और तुम्हारे पुरखाओं पर ऐसे दृष्टि की जैसे अंजीर के पहले फलों पर दृष्टि की जाती है। परन्तु उन्होंने बालपोर के पास जाकर अपने को लज्जा का कारण होने के लिये अर्पण कर दिया, और जिस पर मोहित हो गए थे, वे उसी के समान घिनौने हो गए।

यशायाह 28:4 (HINIRV) »
और उनकी भड़कीली सुन्दरता का मुर्झानेवाला फूल जो अति उपजाऊ तराई के सिरे पर है, वह ग्रीष्मकाल से पहले पके अंजीर के समान होगा, जिसे देखनेवाला देखते ही हाथ में ले और निगल जाए।

यशायाह 24:13 (HINIRV) »
क्योंकि पृथ्वी पर देश-देश के लोगों में ऐसा होगा जैसा कि जैतून के झाड़ने के समय, या दाख तोड़ने के बाद कोई-कोई फल रह जाते हैं।
मीका 7:1 संदर्भ में संक्षिप्त परिचय
यह पद मीका की पुस्तक के विशिष्ट प्रकोपी क्षण की ओर संकेत करता है—जब भविष्यवक्ता नहीं, बल्कि एकपीड़ित, निराश व्यक्ति के हृदय में धैर्य और व्यवस्था के टूटने की अनुभूति उजागर होती है. पंक्तियाँ एक व्यक्तिगत अनुभाव को प्रकट करतीं हैं जिसमें दयनीय आकांक्षा बनाम अस्थिर वास्तविकता का संघर्ष दिखता है: एक मजबूत भोजन की लालसा, परन्तु उपलब्ध गुच्छों का अभाव.
मूल भावार्थ
पंक्ति एक असंतोषजनक अवस्था को चित्रित करती है—धूपकाल की फसल पूरी तरह कटाई से पहले ही मनुष्य के भीतर एक तीव्र खाद्य अभाव बन जाता है. मिजाज यह है कि जो आशीर्वाद और अवसर प्रतीक्षा करते थे, वे अब उपलब्ध नहीं दिखते; यह एक आंतरिक कमी की अनुभूति है जो भविष्य की उम्मीदों को ध्वस्त कर देती है.
दो-तीन मुक्तिमुख्य विषय
क्रॉस-रेफरेन्स (संक्षेप में) और उनसे जुड़ा विचार
यशायाह और पतरस के दूसरे अध्यायों में अस्थिर समय में भी ईश्वर की जीवित प्रतिज्ञा का स्मरण किया गया है; इन संदर्भों से यह समझ बनती है कि कठिन समय में हमारी प्राथनाएं और भरोसा एक ऐसे divine refueling के लिए तैयार रहते हैं जो क्षणभर के लिए नहीं, बल्कि स्थायी आशा देता है।
विवेकपूर्ण विचार और जीवन व्यवहार
इस verse के दौरान भक्त को यह याद रखना चाहिए कि हमारी वास्तविक पूंजी आशीर्वादों पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा पर टिकी है. कठिन समय में भी, अपनी जरूरतों के प्रति ईमानदार रहते हुए, भगवान की सहभागिता को ढूंढना आवश्यक है—उसी में संतोष और धैर्य का स्रोत है.
संक्षिप्त समापन
मीका 7:1 एक सूचित सच को उजागर करता है—जब जीवन के सुख छोटे पड़ जाते हैं, तब भी परमेश्वर का शासन निरंतर रहता है. यह verse हमें सादगी, आत्मविनय और भगवान पर निर्भर रहने की सीख देता है, ताकि हमें अस्थायी कमी के बावजूद ईश्वर के स्थायी प्रेम की अनुभूति हो सके.
महत्वपूर्ण उद्धरण (हिस्टोरिकल कमेंटेटर से)
इस पाठ के संदर्भ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलनों से संगत विचार मिलते हैं: वे यह समझाते हैं कि अभाव के क्षण लोग अपनी लालसाओं के अनुरोधों के पीछे भागते हैं, परन्तु परमेश्वर की व्यवस्था में भी जीवनरस रहता है जो अस-dependent पर निर्भर नहीं रहता. अगर आप संक्षिप्त उद्धरण पाते हैं, तो उसे आवश्यक रूप सेahkan नोट किया गया है.
2-3 क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
यशायाह 50:10; मत्त 6:25-34; लूका 12:22-31—ये संदर्भ सुझाते हैं कि कठिन समय में नहीं, बल्कि परमेश्वर के राज्य और उसकी कृपा की दिशा में भरोसा रखें, ताकि दैनंदिन आवश्यकता पूरी हो सके और आत्मा को शांति मिले.