Old Testament
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मीका 6:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि वे ओम्री की विधियों पर, और अहाब के घराने के सब कामों पर चलते हैं; और तुम उनकी युक्तियों के अनुसार चलते हो; इसलिए मैं तुझे उजाड़ दूँगा, और इस नगर के रहनेवालों पर ताली बजवाऊँगा, और तुम मेरी प्रजा की नामधराई सहोगे।
मीका 6:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मीका 6:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 51:51 (HINIRV) »
'हम व्याकुल हैं, क्योंकि हमने अपनी नामधराई सुनी है*; यहोवा के पवित्र भवन में विधर्मी घुस आए हैं, इस कारण हम लज्जित हैं।'

यिर्मयाह 7:24 (HINIRV) »
पर उन्होंने मेरी न सुनी और न मेरी बातों पर कान लगाया; वे अपनी ही युक्तियों और अपने बुरे मन के हठ पर चलते रहे और पीछे हट गए पर आगे न बढ़े।

1 राजाओं 16:25 (HINIRV) »
ओम्री ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था वरन् उन सभी से भी जो उससे पहले थे अधिक बुराई की*।
मीका 6:16 पर टिप्पणी— “ओम्री की विधियाँ” और अहाब के घराने के चाल-चलन के साथ चलना
मुख्य बिंदु— इस पदकथन के पीछे यह विवाद स्पष्ट है: परमेश्वर अपने लोगों से उन आदर्शताओं, अदालतों और सामाजिक-धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुरूप चलने की अपेक्षा रखता है जो ईमानदारी, न्याय और सत्य के आधार पर स्थापित हैं; परन्तु योनातिवर्तित समाज में वे लोग, जो ओम्री और अहाब के घराने के मार्ग पर चलते हैं, व्यवहारिक रूप से अस्वीकृत हैं। नतीजा यह है कि प्रभु उन लोगों के लिए कठोर दंड निर्धारित करता है जो राजनीतिक सत्ता और सामाजिक दबाव के कारण पवित्र विधान से विचलित हो जाते हैं।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेचर काउंटेक्स्ट)
इस वाक्य में मीक़ा प्रेषित करते हैं कि इस नगर के नागरिक ओम्री (ओमर) की अपनी विधियों और अहाब की घराने की नीतियों पर चलते आ रहे हैं, जो कि धार्मिकता के नाम पर नैतिक विवेक को खो देते हैं। इसके पीछे असल बात यह है कि धार्मिक चिह्न और राजनीतिक सत्ता की संयुक्त चाल ने स्थानीय समाज को भ्रष्ट कर दिया है। राशिवारणा में यह दिखता है कि परमेश्वर न्याय के लिए नहीं डराता, बल्कि उनके मिलने वाले परिणामों के कारण दंड देता है।
आत्मिक-गर्भधारण (थियोलॉजिकल महत्त्व)
यह वाक्य यह चेतावनी देता है कि धर्म के आडंबर और सामाजिक दबाव के कारण व्यक्ति अपने नैतिक चिह्नों से फिसल सकता है। परमेश्वर को केवल धार्मिक क्रिया-कलाप नहीं, बल्कि सत्यपूर्ण पथ का पालन चाहिए—जो करुणा, न्याय और भलाई के रास्ते पर चले। अहाब परिवार के साथ चलना, दायित्व से विमुख होकर, सत्ता के पीछे भागना है; ऐसी चाल से समुदाय के नैतिक ढांचे में खामियाँ आती हैं और परमेश्वर की योजना असफल होती है।
पवित्रशास्त्रीय जोड़ (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या
इन संदर्भों में दिखता है कि ईश्वर सत्य, निष्पक्षता और विश्वास पर टिके रहने को महत्त्व देता है, भले ही समाज के दबाव कितने भी बढ़े हों।
आत्म-अन्वेषण के प्रश्न (Reflection Questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
मीका 6:16 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर एक ऐसे समुदाय की मांग करता है जहाँ धर्म केवल दिखावा नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में न्याय, सत्य और प्रेम के साथ चलता हो। ओम्री की विधियों और अहाब के घराने के मार्ग पर चलना, परमेश्वर की दृष्टि में विश्वासघात है, और परिणामस्वरूप नगर के लिए दंड और अभिशाप निर्धारित होते हैं। विश्वासी जन्म से ही नीतिपूर्ण, सचेत और करुणामय जीवन जीएं, ताकि परमेश्वर की प्रजा एक नई और सत्यपूर्ण पहचान बना सके।
याद रखें: यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन मूल्यांकनों से प्रेरित सार-संकलन है।
अनुमत उद्धरण (short quotes)— यदि आवश्यक हो तो उपलब्ध—
Matthew Henry: “...(state and ways of Omri and the house of Ahab... the people walked in their counsels” (संक्षेप सार)
Albert Barnes: “The conduct of Omri’s dynasty, and the wicked policies... revealed judgment”
Adam Clarke: “They walked in the steps of the idolatrous family; therefore judgment must come”