Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमीका 6:9 बाइबल पद की व्याख्या
मीका 6:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा की वाणी इस नगर को पुकार रही है, और सम्पूर्ण ज्ञान, तेरे नाम का भय मानना है: राजदण्ड की, और जो उसे देनेवाला है उसकी बात सुनो*!
मीका 6:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मीका 6:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

सपन्याह 3:2 (HINIRV) »
उसने मेरी नहीं सुनी, उसने ताड़ना से भी नहीं माना, उसने यहोवा पर भरोसा नहीं रखा*, वह अपने परमेश्वर के समीप नहीं आई।

प्रकाशितवाक्य 3:19 (HINIRV) »
मैं जिन जिनसे प्रेम रखता हूँ, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूँ, इसलिए उत्साही हो, और मन फिरा। (नीति. 3:12)

यशायाह 30:27 (HINIRV) »
देखो, यहोवा दूर से चला आता है, उसका प्रकोप भड़क उठा है, और धुएँ का बादल उठ रहा है; उसके होंठ क्रोध से भरे हुए और उसकी जीभ भस्म करनेवाली आग के समान है।
मुख्य विषय: परमेश्वर की सार्वजनिक पुकार—न्याय, भय और शासक की जिम्मेदारी
साहित्यिक प्रसंग
मीका 6:9 छोटे, तीखे उद्घोष जैसा प्रतीत होता है: यहोवा की वाणी नगर में बुला रही है और सुनने वालों से परमेश्वर के नाम का भय रखने तथा राज्य के अधिकारियों की बात सुनने का आग्रह कर रही है। यह पद व्यापक न्यायोचितता और सामाजिक उत्तरदायित्व की पूरी कविता के मध्य में आता है, जहाँ भविष्यवक्ता ईश्वर, जनता और शासकों के दायित्वों पर प्रकाश डालता है। पूरा अध्याय (मीका 6) ईश्वर की दावी, लोगों की बहस और न्याय की पुकार को सामने लाता है; यहाँ बोले गए शब्द सार्वजनिक चेतावनी और न्याय के आग्रह दोनों हैं।
थीमों का महत्व
यहाँ दो मुख्य तत्व जुड़े हुए हैं: "तेरे नाम का भय" और "राजदण्ड की, और जो उसे देनेवाला है उसकी बात सुनो"। नाम का भय केवल व्यक्तिगत धार्मिक भावना नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवहार और सामाजिक संवेदनशीलता का आधार है—ईश्वर को सम्मान देने का परिणाम न्याय, दया और विनम्र शासन है। दूसरी ओर शासक (या राजदण्ड) की सुनवाई का अर्थ यह नहीं कि शक्ति के आगे अन्धानुकरण; बल्कि वह व्यवस्था जिसमें शासक उत्तरदायी है और ईश्वर की व्यवस्था के अनुरूप न्याय लागू करना उसका कर्तव्य है। इस पद में चेतावनी और आग्रह—दोनों मिलते हैं: नगर को जगाना और शासक से ईश्वरीय मानदंडों के अनुसार कार्य करने का आह्वान।
पवित्रशास्त्रीय संबंध (क्रॉस-रेफ़रेंसेज़)
प्रेरक प्रश्न (विचार के लिए)
1) हमारे समाज में "परमेश्वर के नाम का भय" किस तरह व्यवहार में दिखाई देता है? क्या हमारे निजी और सार्वजनिक निर्णय उसी मानदंड से तुलनीय हैं?
2) जब शासक या नेतृत्व की सुनवाई का आदेश दिया जाता है, तब हमें कब बराबर चुनौती देनी चाहिए और कब समर्पण? कैसे पहचानें कि नेतृत्व ईश्वरीय न्याय की ओर जा रहा है?
मुफीद टिप्पणियाँ—प्राचीन टिप्पणीकारों की संक्षिप्त टीका
मैथ्यू हेनरी के शब्दों में (संक्षिप्त उद्धरण): "यह वाणी न केवल चेतावनी है, बल्कि बुलाहट भी—लोक को जागो और ईश्वर से मेल बैठाओ।" अल्बर्ट बार्न्स ने इस पद को जनता और शासक के पारस्परिक दायित्व की याद के रूप में समझाया। ऐदम क्लार्क ने देखा कि "नाम का भय" सामाजिक और नैतिक सुधार का मूल है। (उद्धरण संक्षेप और संदर्भात्मक हैं।)
समेकित व्याख्या और संक्षेप
मीका 6:9 एक सार्वजनिक पुकार है जो नगर और उसकी नेतृत्व व्यवस्था दोनों को लक्षित करती है। परमेश्वर का नाम भय वह नैतिक चेतना है जिससे समाज न्यायपूर्ण और संवेदनशील बनता है; वहीं राजदण्ड की सुनवाई का अर्थ है कि अधिकार का प्रयोग ईश्वर के संकल्पों के अनुरूप होना चाहिए। यह पद अनुशासन और जवाबदेही का आह्वान करता है—ईश्वर की वाणी शहर की गलियों में गूँजती है ताकि लोग अपने व्यवहार और शासन-प्रवृत्तियों की परीक्षा कर सकें।