Old Testament
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मीका 6:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तू खाएगा, परन्तु तृप्त न होगा*, तेरा पेट जलता ही रहेगा; और तू अपनी सम्पत्ति लेकर चलेगा, परन्तु न बचा सकेगा, और जो कुछ तू बचा भी ले, उसको मैं तलवार चलाकर लुटवा दूँगा।
मीका 6:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मीका 6:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 4:10 (HINIRV) »
वे खाएँगे तो सही, परन्तु तृप्त न होंगे, और वेश्यागमन तो करेंगे, परन्तु न बढ़ेंगे; क्योंकि उन्होंने यहोवा की ओर मन लगाना छोड़ दिया है।

लैव्यव्यवस्था 26:26 (HINIRV) »
जब मैं तुम्हारे लिये अन्न के आधार को दूर कर डालूँगा, तब दस स्त्रियाँ तुम्हारी रोटी एक ही तंदूर में पकाकर तौल-तौलकर बाँट देंगी; और तुम खाकर भी तृप्त न होंगे।

व्यवस्थाविवरण 32:22 (HINIRV) »
क्योंकि मेरे कोप की आग भड़क उठी है, जो पाताल की तह तक जलती जाएगी, और पृथ्वी अपनी उपज समेत भस्म हो जाएगी, और पहाड़ों की नींवों में भी आग लगा देगी।
मीका 6:14 का अर्थ और संदर्भ
यह पद स्पष्ट भविष्यवाणी के रूप में कहता है कि ईश्वर के पास विरोधी व्यवहार के बाद भी व्यक्ति खायेगा परन्तु तृप्त न होगा, पेट जलता रहेगा, धन के साथ यात्रा करेगा परन्तु उसे बचा नहीं सकेगा, और जो कुछ बचेगा, वह तलवार से छीना जाएगा। यह स्पष्ट करता है कि बाहरी इन्द्रियों की पूर्ति अस्थायी है जबकि आत्मिक पथ पर भरोसा न करने से नुकसान स्थायी हो सकता है।
पृष्ठभूमि और सामाजिक संदर्भ
मीका के समय के यहशेष न्यायधर्म के संदेश हैं जो ईश्वरीय चेतावनी और दयालु आह्वान को जोड़ते हैं। नीतिवचनात्मक चेतावनियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि भौतिक संपत्ति और द्रवित इच्छाओं में प्रगति अस्थायी है जब व्यक्ति परमेश्वर की व्यवस्था से दूर हो।
व्यাখ्या—मुख्य बिंदुओं की व्याख्या
तीन प्रमुख क्रश-प्रेरक विचार
अन्य प्रासंगिक आयत-लिंक
1) अन्याय पर आधारित संपत्ति के संसारिक जोखिमों की चेतावनी (उद्धार के बारे में सोच): यह पंक्ति दिखाती है कि संपत्ति चाहे कितनी भी बड़ी हो, यदि दिल परमेश्वर के प्रति भरोसे से हट जाए तो न तो वह बचा पाती है न सुरक्षित रहती है।
2) दास्य और न्याय के आह्वान से जुड़ी आयतें: भौतिक सुख के पीछे न दौड़ना सिखाती हैं कि ईश्वर के नियम का पालन ही जीवन की वास्तविक सम्पदा है।
3) दीप्ति और आशीर्वाद का सही मार्ग: ईश्वर की आस्तीन में रहने से ही भयमुक्त जीवन संभव है, अन्यथा संसारिक ध्वनि और पाप का दमन चलता रहता है।
उपयुक्त पथ-प्रयोजन
इस वचन को ग्रहण करते हुए व्यक्ति को यह याद रखना चाहिए कि सही सफलता तब है जब यह ईश्वर के साथ समन्वय में हो। धन और भोजन भले मिलें, परन्तु यदि आंतरिक शांति और परमेश्वर के प्रति समर्पण नहीं है, तो उन साधनों से सन्तुष्टि नहीं मिलती। आत्मा की तृप्ति ही अंतिम सुरक्षा है।
सीधे संदर्भ और सार
यह संदर्भ भविष्यवाणी की चेतावनी है कि धर्माचरण से विमुख होकर पाए जाने वाले सुख भी क्षणिक और असुरक्षित होते हैं; परमेश्वर के निर्देश के अनुरूप जीवन ही स्थिरता देता है।
कथन उद्धरण (ऐतिहासिक तुलनात्मक टिप्पणी)
मेथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायम के आलोक में, वे सामान्यतः यह लिखते हैं कि बाहरी संपत्ति कभी-भी आंतरिक शांति और सन्तोष की जगह नहीं ले सकती; नैतिकता और धार्मिक निष्ठा ही वास्तविक सुरक्षा हैं।