Old Testament
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मीका 6:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्या अब तक दुष्ट के घर में दुष्टता से पाया हुआ धन और छोटा एपा घृणित नहीं है?
मीका 6:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मीका 6:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 3:10 (HINIRV) »
यहोवा की यह वाणी है, “जो लोग अपने भवनों में उपद्रव और डकैती का धन बटोर कर रखते हैं, वे सिधाई से काम करना जानते ही नहीं।”

आमोस 8:5 (HINIRV) »
जो कहते हो, “नया चाँद कब बीतेगा कि हम अन्न बेच सके? और विश्रामदिन कब बीतेगा, कि हम अन्न के खत्ते खोलकर एपा को छोटा और शेकेल को भारी कर दें, छल के तराजू से धोखा दे,

अर्थ का सीधा सार
मिका 6:10 में कहा गया है कि दुष्ट के घर में दुष्टता से कमाया गया धन और छोटा एपा घृणित है; इसका सीधा मतलब यह है कि ईश्वर की नैतिक कसौटी पर जो धन और पदार्थ अयोग्य रास्तों से आए हैं, वे परमेश्वर के सामने मूल्यहीन हैं और उनका पवित्र जीवन से कोई स्थाई जुड़ाव नहीं रहता।
संcontextual पृष्ठभूमि
मिका नबू ने यरूशलेम और यहूदा के सामाजिक-आर्थिक भ्रष्टाचार को उद्घाटित किया। समय के अनुरूप, प्रभु के दासों पर छल, धूर्तता और धन के दुरुपयोग का दबाव बढ़ रहा था। मिका 6 में भगवान अपने peuple से पूछते हैं कि वे किस प्रकार भली-भांति सेवा करने के लिए तैयार हैं: क्या वे याचना-प्रार्थना और विश्वास के साथ अपने जीवन को समर्पित करें, या धन के मोह में फँसकर अपनी आस्था को compromis करें?
व्याख्यात्मक अभिवेधन
यह वाक्य तीन-केंद्रित विचार देता है. पहला, दुष्ट के घर से प्राप्त धन की अस्थिरता: सामग्री भौतिक लाभ कितनी भी बड़ी लगें, वे आत्मिक स्थिरता नहीं देते। दूसरा, छोटा एपा का अर्थ है पवित्रता के साथ समझौता और धार्मिक रीति-रिवाजों के बाहरी चिह्न, जो भीतरी नैतिकता के विपरीत होते हैं। तीसरा, यह सभी ईश्वर के निष्ठा-प्रश्न से जुड़ा है: क्या हमारा धन और धर्म सिर्फ दिखावटी हैं, या हमारा आचरण ईश्वर के निर्देशों के अनुसार है?
छोटी थीम-सूची
संबद्ध अंश और उनके विचार
यहां समकक्ष विचार कुछ प्रसिद्ध पवित्र-टीका से मिलते हैं:
Matthew Henry (जो पवित्र शास्त्र के नैतिक अनुपालनों पर गहराई देता है) ने स्पष्ट किया है कि धन की प्राप्ति यदि अन्यायपूर्ण तरीकों से हुई हो तो वह ईश्वर के निकट नहीं आ सकती; बाहरी धार्मिकता से भीतर की पवित्रता अधिक मूल्यवान है। (सूचना: Henry के विशिष्ट संक्षिप्त वाक्यों को उद्धृत नहीं किया गया है, केवल उनके सामान्य सिद्धांत का संकेत दिया गया है।)
Albert Barnes ने कहा है कि यह कथन सत्य का परीक्षण है—क्या हमारा धन और स्मारक धार्मिकता वास्तविक हैं, या केवल दिखावे के साधन? (संक्षेप में Barnes के नैतिक व्याख्यान का संकेत।)
Adam Clarke ने इस संदर्भ में कहा कि दुष्ट के घर का आचरण और धन, जहां से आया है, ईश्वर के सामने अवमान्य है यदि वह अन्याय के माध्यम से हो। (कथन के सार का उल्लेख।)
युक्त निर्देश और संदर्भ
– संदर्भ 1: मिका 6:6-8 — प्रार्थना, बलिदान, और नैतिक जीवन के बीच संतुलन का पाठ।
– संदर्भ 2: माला 3:8-10 — धन का भ्रस्टाचार और परमेश्वर के आशीर्वाद के सचेत स्थान।
– संदर्भ 3: याकूब 5:1-6 — धनी के शोषण और अन्याय पर क्रोध और दया का संदेश।
व्यावहारिक निष्कर्ष
आप जिस धन या संसाधन को प्रभु की सेवा के लिए दें, उसका मार्ग नैतिक और सच्चा होना चाहिए। बाहरी आस्था के साथ भीतर की पवित्रता को न छोड़ें; धन की दृष्टि से निर्णय लेते समय सत्यप्रियता और दयालुता को प्राथमिकता दें। ईश्वर के साथ आपकी नैतिकता और ईमानदारी ही असली आशीर्वाद का स्रोत है।