Old Testament
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मीका 6:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण मैं तुझे मारते-मारते बहुत ही घायल करता हूँ, और तेरे पापों के कारण तुझको उजाड़ डालता हूँ।
मीका 6:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मीका 6:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रेरितों के काम 12:23 (HINIRV) »
उसी क्षण प्रभु के एक स्वर्गदूत ने तुरन्त उसे आघात पहुँचाया, क्योंकि उसने परमेश्वर की महिमा नहीं की और उसके शरीर में कीड़े पड़ गए और वह मर गया। (दानि. 5:20)

होशे 13:16 (HINIRV) »
सामरिया दोषी ठहरेगा, क्योंकि उसने अपने परमेश्वर से बलवा किया है; वे तलवार से मारे जाएँगे, उनके बच्चे पटके जाएँगे, और उनकी गर्भवती स्त्रियाँ चीर डाली जाएँगी।

मीका 6:13 का व्याख्यान: परिणामस्वरूप घायल कर डालना
परिप्रेक्ष्य में यह पद मीका की वह चेतावनी बताता है जो परमेश्वर के लोक के पापों के कारण उनके विरुद्ध आक्रामक कार्रवाई के संकेत हैं। इस समय बाइबल में ईश्वरीय न्याय का एक ठोस रूप स्पष्ट होता है: जानबूझकर पाप के कारण व्यक्ति या राज्य पर दण्ड लागू होता है, ताकि पाप से उद्धार और नैतिक परिवर्तन मिले। यहाँ कहा गया वाक्य “इस कारण मैं तुझे मारते-मारते बहुत ही घायल करता हूँ, और तेरे पापों के कारण तुझको उजाड़ डालता हूँ” एक चेतावनी है कि पापकर्म से सतह के नीचे के नैतिक दुर्बलता बनकर व्यक्ति-समुदाय में गंभीर चोट और तबाही ला सकता है।
मुख्य अर्थ
यह verse परमेश्वर की न्याय और दया दोनों को एक साथ दर्शाता है। परमेश्वर अपने लोगों से पाप के विरुद्ध कठोर सत्य की माँग करते हैं और जब वे आचरण से दूर होते हैं, तब उनके लिए दण्ड का चरण बड़ता है। “मारते-मारते बहुत ही घायल करना” एक भावुक चित्र है जो बताता है कि लापरवाही और बार-बार के पापकर्म से चोट केवल बाहरी नहीं रहती, बल्कि आंतरिक और सामाजिक संबंधों में भी गहरी होती है।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य प्रतिलिपियाँ (cross-references)
यशैया 26:9-संदेश: न्याय और राहत के साथ परमेश्वर लोगों को ढाँचा देता है; पश्चात्ताप से उद्धार संभव है।
हबक्कुक 1:12-13: परमेश्वर अपने पवित्र और न्यायपूर्ण स्वरूप में रहते हैं; पाप के विरुद्ध क्रोध एक सिंह-खोज की तरह है, परन्तु वह पापी के लिए उद्धार की राह भी खोलते हैं।
निर्गमन 34:7: वह दया दिखाते हैं और पाप को उखाड़ते नहीं, यदि वे परिवर्तन की राह पर लौटें।
व्यावहारिक विचार
क्या मैं अपने जीवन में किसी व्यवहार, योजना या व्यवस्था के कारण दूसरों को घायल कर रहा/रही हूँ? यह पद सचेत करता है कि पाप के जाल से मुक्त होने के लिए आंतरिक परिवर्तन और नैतिक जिम्मेदारी आवश्यक है। अगर मैं गलतियों के प्रति स्पष्ट सिर झुकाकर पश्चाताप करूँ, तो परमेश्वर کی दया और स्मरण-यात्रा फिर से आरम्भ हो सकती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
मीका 6:13 दिखाता है कि पाप के कारण दण्ड और नुकसान का क्रम शुरू होता है, परन्तु यह न्याय और दया की एक पूरक तस्वीर भी है: परिवर्तन-oriented प्रतिफल के लिए प्रेरणा। समुदाय और व्यक्तियों को सजग रहने और पथ परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि उद्धार की राह खुली रहे।
पूर्वत: यह विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रचलित-उद्धरणों के तत्वों से प्रेरित एक समेकित टिप्पणी में समाहित है, जहां पाप के परिणाम और दया के अवसर एक साथ देखे जाते हैं।