Old Testament
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मीका 6:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तू बोएगा, परन्तु लवनें न पाएगा; तू जैतून का तेल निकालेगा, परन्तु लगाने न पाएगा; और दाख रौंदेगा, परन्तु दाखमधु पीने न पाएगा। (यूह. 4:37, आमोस. 5:11, व्य. 28:38-40)
मीका 6:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मीका 6:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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सपन्याह 1:13 (HINIRV) »
तब उनकी धन सम्पत्ति लूटी जाएगी, और उनके घर उजाड़ होंगे; वे घर तो बनाएँगे, परन्तु उनमें रहने न पाएँगे; और वे दाख की बारियाँ लगाएँगे, परन्तु उनसे दाखमधु न पीने पाएँगे।”

आमोस 5:11 (HINIRV) »
तुम जो कंगालों को लताड़ा करते, और भेंट कहकर उनसे अन्न हर लेते हो, इसलिए जो घर तुम ने गढ़े हुए पत्थरों के बनाए हैं, उनमें रहने न पाओगे; और जो मनभावनी दाख की बारियाँ तुम ने लगाई हैं, उनका दाखमधु न पीने पाओगे।

यिर्मयाह 12:13 (HINIRV) »
उन्होंने गेहूँ तो बोया, परन्तु कँटीली झाड़ियाँ काटे, उन्होंने कष्ट तो उठाया, परन्तु उससे कुछ लाभ न हुआ। यहोवा के क्रोध के भड़कने के कारण तुम अपने खेतों की उपज के विषय में लज्जित हो।”
सारांश-परिचय
मीका 6:15 में भविष्यदाई चेतावनी दी जा रही है: लोग परिश्रम और उपज की आशा रखेंगे, परन्तु वे उन आशीर्वादों का आनंद न उठा पाएँगे जिनकी वे अपेक्षा करते हैं। वचन भूमि और उपज के प्रतीक के माध्यम से घोषित न्यायिक वियोग और दण्ड का चित्र प्रस्तुत करता है—खेतों की कृषि, जैतून और अंगूर से रहित होना आत्मिक और भौतिक दोनों दोषों का परिणाम है।
शब्दों का संदर्भ और अध्याय में स्थान
यह पदमीका की उस भविष्यवाणी का हिस्सा है जिसमें यहोवा अपने लोगों के खिलाफ अदालत खड़ी करता है (मीका 6:1-5 की न्यायालयीय छवि)। अध्याय के मध्य भाग में परमेश्वर ने इज़राइल की अन्यायपूर्ण ज़िन्दगी, पूजा के बहाने अधर्म और सामाजिक दुराचार की आलोचना की है। 6:15 उस परिणाम को दर्शाता है जब लोग पुनर्स्थापना की अपेक्षा रखते हैं परन्तु उनके पापों का बोझ उनकी आशाओं को ध्वस्त कर देता है।
प्रमुख आध्यात्मिक शिक्षा
मुख्य शिक्षा यह है कि बाहरी कर्म या आर्थिक प्रयत्न परमेश्वर के अप्रसन्न होने को दूर नहीं कर सकते। वास्तविक तौबा, न्याय और दया की आवश्यकता है; वरना भले ही मेहनत हो, आशीर्वाद और आनंद का वंचित होना निश्चित है। उपज के खोने का प्रतीकात्मक अर्थ यह भी है कि ईश्वर की अनुग्रह-आशा केवल कर्मठता पर नहीं बल्कि ईश्वर की स्मरणीयता और पालन पर निर्भर करती है।
प्रासंगिक समान पद और तुलना
व्याख्या के बिंदु
“तू बोएगा, परन्तु लवनें न पाएगा” — अनर्थी परिश्रम का चित्र; बुवाई करने पर भी कटाई न होना न्यायिक उपशम का सूचक। “जैतून का तेल निकालेगा, परन्तु लगाने न पाएगा” — जैतून के तेल से समृद्धि और शांति का प्रतीक जुड़ा है; परन्तु यहाँ उसे लगाने का अवसर नहीं मिलेगा, यानि स्थिर या दीर्घकालिक लाभ न मिलेगा। “दाख रौंदेगा, परन्तु दाखमधु पीने न पाएगा” — आनंद और उत्सव के साधन तो होंगे परन्तु स्वयं आनन्द वसूल न कर पाने का दर्द।
अनुप्रयोग — आज के पाठक के लिए
हमारे कर्म और प्रयास यदि न्याय, दया और सच्चाई के बिना हों तो वे शाश्वत लाभ नहीं दे सकते। व्यक्तिगत जीवन में यह चुनौती है कि क्या हमारी परिश्रम की प्रेरणा स्वार्थ, दिखावा या परमेश्वर के प्रति निष्ठा है। समाज में भी समान है: धार्मिक परंपराएँ और आर्थिक गतिविधियाँ यदि करुणा और ईमानदारी से बांधी न जाएँ, तो उनका फल विफलता और शून्यता बन सकता है। वास्तविक सुधार तौबा, धार्मिक सच्चाई और सामाजिक न्याय के माध्यम से होता है।
नोट्स — पारंपरिक टिप्पणी से सम्बन्ध
मैथ्यू हेनरी का संक्षेप यही है कि बाहरी कर्म परमेश्वर की ओर लौटने का स्थान नहीं ले सकते; उनका शब्द बहुत संक्षेप में बताता है कि सच्ची तौबा आवश्यक है। (एक सटीक उद्धरण: "External duties, without internal change, will avail nothing.")
अल्बर्ट बार्न्स और ऐडम क्लार्क ने भी इस पद के न्यायिक स्वर पर ध्यान केन्द्रित किया; दोनों बताते हैं कि प्रतीकात्मक उपज का वञ्चित होना दण्ड के वास्तविक परिणाम को दर्शाता है।
निष्कर्ष
मीका 6:15 हमें चेतावनी देता है कि केवल श्रम या धार्मिक क्रियाएँ परमेश्वर की कृपा का विकल्प नहीं हैं। परमेश्वर की अपेक्षा न्याय, दया और विनम्रता से मुहँ मोड़ने की नहीं, बल्कि दिल से लौट आने की है। जब यह न हो तो बाहरी समृद्धि भी अंदरुनी सुख प्रदान नहीं कर पाती।