Old Testament
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आमोस 3:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा की यह वाणी है, “जो लोग अपने भवनों में उपद्रव और डकैती का धन बटोर कर रखते हैं, वे सिधाई से काम करना जानते ही नहीं।”
आमोस 3:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 3:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 4:22 (HINIRV) »
“क्योंकि मेरी प्रजा मूर्ख है, वे मुझे नहीं जानते; वे ऐसे मूर्ख बच्चें हैं जिनमें कुछ भी समझ नहीं। बुराई करने को तो वे बुद्धिमान हैं, परन्तु भलाई करना वे नहीं जानते।”

सपन्याह 1:9 (HINIRV) »
उस दिन मैं उन सभी को दण्ड दूँगा जो डेवढ़ी को लाँघते, और अपने स्वामी के घर को उपद्रव और छल से भर देते हैं।”

भजन संहिता 14:4 (HINIRV) »
क्या किसी अनर्थकारी को कुछ भी ज्ञान नहीं रहता, जो मेरे लोगों को ऐसे खा जाते हैं जैसे रोटी, और यहोवा का नाम नहीं लेते?
आमोस 3:10 — तत्काल परिदृश्य और संदर्भ
यहोवा की यह वाणी इस समय आमोस के उद्घोषण से पहले की स्थितियों को दिखाती है: उन लोग जो धन संचय कर भवनों में सुरक्षित रखते हैं—जिन्हें डकैती और उपद्रव से कमाई हुई वस्तुओं से भरा मानते हैं—वे समाज के कमजोरों पर अत्याचार कर रहे हैं, और नीति-नियम की परवाह नहीं करते। इस पाठ में एतिहासिक संदर्भ यह है कि sweswoम समुदाय में आर्थिक असामनता और शोषण अधिक बढ़ गया था, और धार्मिक आस्थाओं के साथ- साथ सामाजिक न्याय का ढांचा ढीला हो गया था।
ईश्वर का संदेश: न्यायहित और सचेत आदेश
यह वाणी ऐसे समय दिखाती है जब परमेश्वर अपने लोगों के भीतर के अन्याय को देख कर गुस्सा और ठिकाने लगान चाहता है। आमोस के अनुसार, दिव्य दृष्टि यह नहीं कि केवल पाप की बात कर दी जाए, बल्कि यह कि धन के लिए शांति और सुरक्षा के नाम पर निर्बलों पर दबाव डालना, चोरी और धोखे से धन इकट्ठा करना—ये सब ईश्वर की दृष्टि में अस्वीकार्य है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र स्पष्ट करना
Related संदर्भ विचार
कम से कम 3 क्रॉस-रेफरेंसेज़ के साथ सम्वाद:
पाठ का वर्तमान-day अनुप्रयोग
आज के समाज में भी आर्थिक असमानता, शोषण और धंधे-धरोहर के नाम पर भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति देखने को मिलती है। इस पद से प्रेरणा मिलती है कि धार्मिक समुदायों की रीढ़ वही है जब वे धन की परे-मान्यता नहीं, बल्कि न्याय, जिम्मेदारी और दयालुता के साथ व्यवहार करते हैं। अपने समुदाय में कमजोरों के अधिकारों की सुरक्षा, भ्रष्टाचार के विरुद्ध सच बोलना, और धन-प्रथाओं में पारदर्शिता बनाए रखना ईश्वर के साथ वफ़ादारी का भाग बनता है।
हिंदी अनुवाद के साथ उद्धृत पूर्व-लेखक विचार (संक्षेप)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक domain टिप्पणीकारों के संकेतों के अनुसार: यह पाठ धार्मिक आचरण के भीतर सार्वजनिक न्याय के अभाव पर रोशनी डालता है; धर्म का वास्तविक प्रमाण तब है जब धन-सम्पत्ति के लिए शोषण बंद हो और प्रत्येक व्यक्ति के साथ ईमानदारी और दया का व्यवहार किया जाए।
निष्कर्ष: परमेश्वर की यह वाणी बताती है कि पूजा-घर के सामने सामाजिक न्याय का अनवरत पालन भी अनिवार्य है। जब धन-उपार्जन अन्यायपूर्ण हो, तब ईश्वर की भाषा स्पष्ट है: सच और दया ही असली पूंजी है, अन्यथा भव्य भवन भी विफल रहेंगे।