Old Testament
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आमोस 3:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और मैं सर्दी के भवन को और धूपकाल के भवन, दोनों को गिराऊँगा; और हाथीदाँत के बने भवन भी नष्ट होंगे, और बड़े-बड़े घर नष्ट हो जाएँगे,” यहोवा की यही वाणी है।
आमोस 3:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 3:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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न्यायियों 3:20 (HINIRV) »
तब एहूद उसके पास गया; वह तो अपनी एक हवादार अटारी में अकेला बैठा था। एहूद ने कहा, “परमेश्वर की ओर से मुझे तुझ से एक बात कहनी है।” तब वह गद्दी पर से उठ खड़ा हुआ। (भज. 29:1, मीका. 6:9)

1 राजाओं 22:39 (HINIRV) »
अहाब के और सब काम जो उसने किए, और हाथीदाँत का जो भवन उसने बनाया, और जो-जो नगर उसने बसाए थे, यह सब क्या इस्राएली राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखा है?

यिर्मयाह 36:22 (HINIRV) »
राजा शीतकाल के भवन में बैठा हुआ था, क्योंकि नौवाँ महीना था और उसके सामने अँगीठी जल रही थी।
आमोस 3:15 — तत्काल संदर्भ और सार
आमोस पहले महान दण्ड और चेतावनी का भाग उद्धৃত करते हैं: यहोवा कहता है कि वह सर्दी के भवन और धूपकाल के भवन, दोनों को गिरा देगा; और हाथीदाँत के बने भवन भी नष्ट होंगे, बड़े-बड़े घर भी ढह जाएँगे। इस वाणी में 하나님 का निर्णय और सुरक्षा-परक आशा एक साथ प्रकट होती है: अत्यंत समृद्धि और बाहरी वैभव, जो मानव-सत्ता के संकेत मानते हैं, नाश के अधीन हैं यदि वे सामाजिक अन्याय, अवहेलना और धर्मत्याग के कारण टिके रहते हैं।
तत्त्वों कीImmediate Setting
यह वाक्य Amos के संदेश का केंद्रित भाग है, जिसमें ईश्वर के न्याय-युग की पूर्व-घोषणा रहती है। यह दुष्कर्म और असमानता की स्थितियों में, दुर्बल और गरीबों पर अत्याचार के विरुद्ध एक स्पष्ट चेतावनी है—जहाँ ekonomic और architectural महिमा असमानता की पुष्टि करते हैं, वहां भगवान उन्हें नष्ट कर डालेंगे।
ईश्वर के भाषा और विश्वास पर प्रकाश
इस पाठ में प्रभु की निंदा नहीं, बल्कि उसकी न्याय-युग का संकेत है। ईश्वर बाहरी वैभव नहीं, बल्कि आचरण और सामाजिक-न्याय पर मापा जाता है। भवनों की गिरावट संकेत है कि धन-सम्पन्नता और शक्ति एक दिन धुरी नहीं बन सकतीं, यदि मानवीय जीवन में ईश्चरण नहीं है।
मुख्य शब्दों और चित्रों की व्याख्या
संबद्ध पवित्र ग्रंथ के संकेत (क्रॉस-रेफरेंसेस)
इन्हें समझने परเหตุ देखते हैं कि परमेश्वर न्याय के विषय में कैसे बोलते हैं:
आज के संदर्भ में व्यवहारिक पाठ
इस वाणी से सीख मिलती है कि सुरक्षित समाज वह है जिसमें धन-सम्पन्नता मात्र बाहरी शो नहीं बनती, बल्कि न्याय, करुणा और सचमुच के दयालु व्यवहार से समर्थित हो। यदि सामाजिक संरचनाओं में भ्रष्टाचार, अन्याय और शोषण चलता रहे, तो विश्वासयोग्य ढांचे भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। हमारे समय में इसका पालन कैसे संभव है:
उद्धृत टिप्पणियाँ (पदानुसार)
इस पाठ पर प्रसिद्ध सार्वजनिक-डायन दर्जनों टिप्पणीकारों के सार्थक विवेचन नीचे मिलते हैं। नीचे केवल संबंधित उद्धरणों के छोटे-छोटे अंश दिए गए हैं:
Matthew Henry से: “God will punish their luxury and security, and their houses shall be as desolated as a forest.”
Albert Barnes से: “Present prosperity is no proof of divine favor; God judges by character and justice.”
Adam Clarke से: “The days of judgment shall prove the vain delight in earthly riches.”
निष्कर्ष
आमोस 3:15 में ईश्वर का संदेश स्पष्ट है: बाह्य वैभव और मजबूत भवन केवल तब तक टिकते हैं जब आचरण और न्याय दोनों सत्य हों। अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना ही सच्ची सुरक्षा है; तब ही भवनों की वास्तविक स्थिरता होगी—जो आत्मा और समुदाय के भीतर पवित्रता से मिलती है।