Old Testament
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आमोस 3:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सिंह गरजा; कौन न डरेगा*? परमेश्वर यहोवा बोला; कौन भविष्यद्वाणी न करेगा?”
आमोस 3:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 3:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 20:9 (HINIRV) »
यदि मैं कहूँ, “मैं उसकी चर्चा न करूँगा न उसके नाम से बोलूँगा,” तो मेरे हृदय की ऐसी दशा होगी मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग हो, और मैं अपने को रोकते-रोकते थक गया पर मुझसे रहा नहीं जाता। (1 कुरि. 9:16)

आमोस 3:4 (HINIRV) »
क्या सिंह बिना अहेर पाए वन में गरजेंगे? क्या जवान सिंह बिना कुछ पकड़े अपनी मांद में से गुर्राएगा?

आमोस 1:2 (HINIRV) »
“यहोवा सिय्योन से गरजेगा और यरूशलेम से अपना शब्द सुनाएगा; तब चरवाहों की चराइयाँ विलाप करेंगी, और कर्मेल की चोटी झुलस जाएगी।”
आमतौर पर अभिव्यक्त अर्थ
Amos 3:8 में यह घोषणा एक चेतावनी-भरी जवाबदेही का संकेत है: दुष्ट बनाम सत्य के संदेशवाहक की आवाज कितनी गंभीर और तात्कालिक है—“सिंह गरजा; कौन न डरेगा? परमेश्वर यहोवा बोला; कौन भविष्यद्वाणी न करेगा?” यह वाक्य यह बताता है कि परमेश्वर की स्पष्ट आवाज को न सुनना और उसकी योजना के विरुद्ध अनुमान लगाना कितना जोखिम भरा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहह कवरेज ऐतिहासिक-धार्मिक संदर्भ में नबी अमोस के समय का है, जब इस्राएल और यहुदा की देहिया-समय की सामाजिक नैतिक गिरावट थी। अमोस के संदेश में न्याय और दया के अनुरोधों के बीच तानापानी है कि यदि परमेश्वर बोल रहे हैं तो उनके बारे में सूचना देना और उसकी योजना के अनुसार चलना क्यों आवश्यक है। यहां “सिंह गरजा” एक धारणा है कि आह्वान की तीव्रता है, और “कौन भविष्यद्वाणी न करेगा” यह संकेत देता है कि यदि इस समय संदेशवाहक चुप रहते हैं तो सचेत होकर बोलना चाहिए—परमेश्वर का आह्वान स्पष्ट है और वह बोले बिना नहीं रुकेंगे।
interpretive observations
छोटे थीमैटिक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त संबंध
1) यशायह 58:1 - आवाज उठाकर स्पष्ट बोलना चाहिए; यहाँ भी ईश्वर की आवाज और सच बोलने की ज़रूरत पर बल है।
2) यिर्मयाह 1:9-10 - भविष्यद्वाणी की सत्ता और परमेश्वर की पुष्टि; संदेशवाहक की आस्था और सच बोलने की बाध्यता बताती है कि यह निर्भर है परमेश्वर की प्रेरणा पर।
3) दानिय्यெल 9:3-4 - देव की योजना के अनुरूप दुआ और विहरन—सत्य को ढूंढना और प्रकट करना।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
जो लोग परमेश्वर की आवाज़ को सुनते हैं और सत्य की राह को अपनाते हैं, वे समाज में भरोसा बनाते हैं। यह विचारधारा सिर्फ नबी तक सीमित नहीं है, बल्कि हर चाहने वाले विश्वासी के लिए है—जो सच की मांग और न्याय की वकालत करते हैं।
टिप्पणी-उद्धरण (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरणों में से जो सीधे उपयुक्त हो सकें, वे छोटे क्रम में उद्धृत हो सकते हैं; यहाँ संक्षेप में उनके दृष्टिकोण के संकेत स्वरूप हैं: Henry कहते हैं कि दयालु संदेशवाहक की आवाज़ को अस्वीकार करना भी एक प्रकार का अपराध है; Barnes और Clarke भविष्यद्वाणी की ज़िम्मेदारी और सत्य के लिए साहस पर प्रकाश डालते हैं।