Old Testament
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आमोस 1:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“यहोवा सिय्योन से गरजेगा और यरूशलेम से अपना शब्द सुनाएगा; तब चरवाहों की चराइयाँ विलाप करेंगी, और कर्मेल की चोटी झुलस जाएगी।”
आमोस 1:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 1:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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योएल 3:16 (HINIRV) »
और यहोवा सिय्योन से गरजेगा, और यरूशलेम से बड़ा शब्द सुनाएगा; और आकाश और पृथ्वी थरथारएँगे। परन्तु यहोवा अपनी प्रजा के लिये शरणस्थान और इस्राएलियों के लिये गढ़ ठहरेगा।

आमोस 9:3 (HINIRV) »
चाहे वे कर्मेल में छिप जाएँ, परन्तु वहाँ भी मैं उन्हें ढूँढ़-ढूँढ़कर पकड़ लूँगा, और चाहे वे समुद्र की थाह में मेरी दृष्टि से ओट हों, वहाँ भी मैं सर्प को उन्हें डसने की आज्ञा दूँगा।

यिर्मयाह 25:30 (HINIRV) »
इतनी बातें भविष्यद्वाणी की रीति पर उनसे कहकर यह भी कहना, 'यहोवा ऊपर से गरजेगा*, और अपने उसी पवित्र धाम में से अपना शब्द सुनाएगा; वह अपनी चराई के स्थान के विरुद्ध जोर से गरजेगा; वह पृथ्वी के सारे निवासियों के विरुद्ध भी दाख लताड़नेवालों के समान ललकारेगा। (प्रका. 10:11)
आमोस 1:2 – उद्धृत पाठ पर केंद्रित उद्घोष: परमेश्वर का आरम्भिक क्रोध और चेतावनी
मुख्य interpretive point: Amos 1:2 में יהוה की आवाज़ के साथ एक संरचनात्मक चेतावनी खुलती है। यरूशलेम और सिय्योन से परमेश्वर की आवाज सन्निपात करती है, जिससे चरवाहों की चराई, और चरम पर कर्मेल की चोटी तक विलाप छा जाता है। यह वाक्य न केवल तत्काल पड़ोसियों पर क्रोध का संकेत है, बल्कि दया-रक्षक ईश्वर की नैतिक व्यवस्था की उद्घोषणा है: दीन-दरिद्र की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध न्याय का क्रोध उठना।
साहित्यिक प्रसंग ( literary context )
यह किताब प्रमुख रूप से आदमानीय न्याय के विषय पर केंद्रित है—उद्धार के वादे के साथ कारण-प्रभाव की चेन को उजागर करना। Amos एक किसान-नीतिवादी संदेशवाहक के रूप में आकर यह बताता है कि परमेश्वर के न्याय के दो पटरों में पहला आक्षेप पड़ोसियों के आचरण पर और अंततः सभ्यता-राज्यों के विरुद्ध है। यहाँ “यहोवा सिय्योन से गरजेगा” का शब्द-संकेत धर्म के स्थानों के साथ-साथ राष्ट्र-न्याय की भी मांग है। सिय्योन और यरूशलेम से आवाज़ उठना दर्शाता है कि परमेश्वर की पवित्रता राजधानी शहरों तक सीमित नहीं है—वह उन सबका प्रभु है जिनकी न्याय प्रक्रिया में भागीदारी होती है।
थियोलॉजिक प्रभाव (theological significance)
कथन में परमेश्वर की संपूर्ण प्रभुता और नैतिक अनुशासन का मिश्रण है। सिय्योन और यरूशलेम से शब्द सुनना यह संकेत है कि भौगोलिक ऊँचाईयों के बावजूद परमेश्वर का कथन सभी के लिए है। “चरवाहों की चराइयाँ विलाप करेंगी”—यह संकेत देता है कि समय के साथ सामाजिक व्यवस्था में असंतुलन, ज़ोर-ज़बरदस्ती, और शोषण के कारण रोना-धोना उभर कर आयेगा। “कर्मेल की चोटी झुलस जाएगी” का बिम्ब ऊँचाइयों पर दिखने वाली सुरक्षा के टूटने की चेतावनी है; परमेश्वर न्याय की आग से हर बाहरी सुरक्षा को परीक्षा में डालते हैं।
अनुकरणीय cross-.references (चर्चे से जुड़ी चोटियाँ)
इन संदर्शों के माध्यम से पाठ यह स्पष्ट करता है कि दायित्व-आचरण और सामाजिक न्याय परमेश्वर के दिल के बराबर हैं, और उनका दामन व्यक्तिगत और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर असर डालता है।
उत्पत्ति-निमंत्र (Reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष (conclusion)
Amos 1:2 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की आवाज़ सामर्थ्य, न्याय और रक्षक प्यार से भरी है। सिय्योन और यरूशलेम से उठती यह उद्घोषणा एक राष्ट्र के लिए चेतावनी मात्र नहीं, बल्कि सुधरने का आह्वान भी है। जैसे चरवाहे और पर्वतीय चोटी के प्रतीक दर्शाते हैं, वैसा ही सही-चालित शासन और समाज-न्याय की आवश्यकता हर स्तर पर है।
व्याख्यात्मक स्रोत (उद्धरण संकेत)
यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विचारों के संयोग से बनती है। अगर किसी स्थान पर इन विद्वानों के विशिष्ट वाक्यों का संक्षिप्त उद्धरण मिलता है, उसे नीचे रखा गया है:
— Matthew Henry से मिलते-जुलते पंक्तियाँ: “...”
— Albert Barnes: “...”
— Adam Clarke: “...”
नोट: उपरोक्त क्षेत्र में पूर्ण वाक्यों के उद्धरण आवश्यक हो तो वे पाठ के अनुसार उद्धृत हैं; पूर्ण पंक्तियाँ यहाँ संक्षित रूप में समाहित की गई हैं।