Old Testament
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आमोस 1:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा यह कहता है: “सोर के तीन क्या, वरन् चार अपराधों के कारण मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; क्योंकि उन्होंने सब लोगों को बन्दी बनाकर एदोम के वश में कर दिया और भाई की सी वाचा का स्मरण न किया।
आमोस 1:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 1:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 23:1 (HINIRV) »
सोर के विषय में भारी वचन। हे तर्शीश* के जहाजों हाय, हाय, करो; क्योंकि वह उजड़ गया; वहाँ न तो कोई घर और न कोई शरण का स्थान है! यह बात उनको कित्तियों के देश में से प्रगट की गई है।

1 राजाओं 9:11 (HINIRV) »
तब सुलैमान ने सोर के राजा हीराम को जिस ने उसके मनमाने देवदार और सनोवर की लकड़ी और सोना दिया था, गलील देश के बीस नगर दिए।

योएल 3:4 (HINIRV) »
“हे सोर, और सीदोन और पलिश्तीन के सब प्रदेशों, तुम को मुझसे क्या काम? क्या तुम मुझ को बदला दोगे? यदि तुम मुझे बदला भी दो, तो मैं शीघ्र ही तुम्हारा दिया हुआ बदला, तुम्हारे ही सिर पर डाल दूँगा।
आमोस 1:9 – तीन क्यों, वरन् चार अपराध
यहवाक्य Amos के ओशा के समय के आसन्न न्याय और दंड के संदेश का एक भाग है। इस अध्याय में भविष्यवक्ता आमोस उत्तर-उत्तर में पड़ने वाले राष्ट्रों के अपराधों पर ईश्वर के निर्णय को प्रस्तुत कर रहा है, ताकि इस्राइलिक समुदाय को सामाजिक अन्याय और अत्याचार से सचेत किया जाए। विशेष रूप से यहाँ तय है कि किसी देश के दुष्कर्मों पर परमेश्वर अत्याचार नहीं करेगा, भले ही उसने अन्य राष्ट्रों के विरुद्ध एक-एक करके कितने भी अपराध क्यों न किए हों; पात्र दोषों पर ईश्वर के दंड का क्रम स्पष्ट होता है।
ईश्वर के अधर्म-विरोधी क्रोध और नियमबद्ध न्याय
इस संदेश में यह स्पष्ट है कि परमेश्वर प्रताड़ना, दमन और अन्याय के विरुद्ध एक स्पष्ट नियम के साथ काम करते हैं। पहले चार अपराधों के कारण न छोड़ने की बात, “सोर के तीन क्या, वरन् चार अपराध” जैसी फ्रेमिंग से यह साफ होता है कि अपराध पर दंड की डोर एक क्रम में आगे बढ़ती है—परमेश्वर अनुचितताओं के लिए देर तक चुप नहीं रहते। यह न केवल लोक-व्यवस्था के लिए चेतावनी है, बल्कि उनके दयालुता और न्याय की भी गूंज है: वह जिस प्रकार से दुष्टों के कर्मों को गिनते हैं, उनके परिणाम भी क्रमबद्ध होते हैं।
शब्दों की समझ और छवि
“सोर के तीन क्या, वरन् चार अपराध” एक पैटर्न है जिसका उद्देश्य अधिकाधिक अपराधों की गिनती से कठोरता दिखाना है—परमेश्वर के न्याय का क्रम अबाध है। यहोवा की भाषा में “चार” की प्रस्तुति एक पूर्णता का संकेत भी है; वह मानवीय अत्याचारों को बेमेल नहीं छोड़ते। साथ ही अदालत के इस भाग में “एदोम के वश में कर देना” और “भाई की सी वाचा का स्मरण न किया” जैसे बोधक शब्द भी साथ हैं। यहाँ सामुदायिक विशिष्टता है: दोस्ती, भाईचारा, और करुणा के पथ से भटकना समाज को गिरा देता है, और ईश्वर इन्हीं व्यवधानों को सचेत तरीके से उद्घाटित करते हैं।
अन्य प्रस्थान पंक्तियाँ (Cross-references)
इन संदर्भों से समरूपता यह है कि सामाजिक अन्याय के विरुद्ध ईश्वर की चिंता और दंड की व्यवस्था स्थिर है, परछाइयों में भी करुणा की राह खुली रहती है।
जीवन-प्रयोजन और आज के संदर्भ में
आज के पाठ के अनुसार: - निष्पादन से पहले व्यवस्था और कमजोरों की सुरक्षा की मांग है; नीति के पीछे नैतिक सिद्धांत निहित हैं, न कि हावभाव-आडंबर। - बहिश्त-प्रथा, भागीदारी का उल्लंघन, और भाई-बंधव के साथ विश्वासघात समाज को नष्ट करते हैं; सामाजिक शिक्षक बनकर परमेश्वर צדקה और न्याय दोनों की महिमा दिखाते हैं। - व्यक्तिगत व्यवहार में हमारे लिए सीख यह है कि सत्ता या शक्ति मिलने पर भी अपने से अधिक कमजोरों के अधिकारों, सच्चाई और साहस के साथ ईमानदार रहना चाहिए।
sammanish सार
ईश्वर एक समान न्यायी हैं: जो अत्याचार करता है, उसका दंड समय के साथ आता है; जो अन्याय से चुप रहते हैं, वे भी इन सचेत दायित्वों से मुक्त नहीं रहते। परमेश्वर की इच्छा है कि समाज सत्य, प्रेम और वचनों के प्रति उत्तरदायी बने।
नोट: यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से संक्षिप्त उद्धरण चाहते हैं, तो वे स्पष्ट रूप से इस प्रकार हैं — “यह वह नहीं जो हम चाहते हैं, बल्कि वह जो ईश्वर कहता है” आदि—परन्तु यहाँ मूल संदेश बिना शब्द-चिह्न के ही प्रस्तुत है; आवश्यक हो तो मैं उनमें से छोटे-छोटे उद्धरण डाल दूँगा, परन्तु पूर्ण वचन नहीं दूँगा।