Old Testament
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आमोस 1:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा यह कहता है: “गाज़ा के तीन क्या, वरन् चार अपराधों के कारण मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; क्योंकि वे सब लोगों को बन्दी बनाकर ले गए कि उन्हें एदोम के वश में कर दें।
आमोस 1:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 1:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 इतिहास 28:18 (HINIRV) »
पलिश्तियों ने नीचे के देश और यहूदा के दक्षिण के नगरों पर चढ़ाई करके, बेतशेमेश, अय्यालोन और गदेरोत को, और अपने-अपने गाँवों समेत सोको, तिम्नाह, और गिमजो को ले लिया; और उनमें रहने लगे थे।

ओबद्याह 1:11 (HINIRV) »
जिस दिन परदेशी लोग उसकी धन सम्पत्ति छीनकर ले गए, और पराए लोगों ने उसके फाटकों से घुसकर यरूशलेम पर चिट्ठी डाली, उस दिन तू भी उनमें से एक था।

1 शमूएल 6:17 (HINIRV) »
सोने की गिलटियाँ जो पलिश्तियों ने यहोवा की हानि भरने के लिये दोषबलि करके दे दी थीं उनमें से एक तो अश्दोद की ओर से, एक गाज़ा, एक अश्कलोन, एक गत, और एक एक्रोन की ओर से दी गई थी।
आमोस 1:6 के संदर्भ में प्रवेश
यह भाग Amos के भाग-पूर्व में गाजा के विरुद्ध दण्ड केessages को लेकर लिखा गया है। यहाँ नबी Amos उन चार अपराधों के कारण उन नगरों पर ईश्वर की कठोर न्याय की घोषणा करते हैं—गाजा, ग्राम-स्तरव, इत्यादि—जो इज़राइल के पड़ोसियों पर अत्याचार और कूटनीतिक प्रभुत्व के माध्यम से नये बंधन डालते थे। यहाँ गाजा के बारे में विशेष रूप से कहा गया है कि वे लोगों को बन्दी बनाकर एदोम के वश में कर दें।
ईश्वर का निडर न्याय और विश्वास
इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर केवल अपने राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि विश्व के सभी जन-समुदायों के साथ एक समान न्याय बनाते हैं। वे अन्यजातियों के आचरण, अत्याचार और उत्पीड़न को मान्यता देते हैं और इन अपराधों पर दण्ड निर्धारित करते हैं। गाजा के अत्याचार का आरोप यह दिखाता है कि अन्याय यदि समाज में व्याप्त हो, तो उसका परिणाम परमेश्वर की अनदेखी से नहीं छिप सकता।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र स्पष्ट करना
- गाज़ा: फिनिशियन नगर था जो पर्शिया के पैनल के पास स्थित था; प्राचीन समय में वे सभ्यताओं के साथ व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे पर आचरण में अन्याय और अत्याचार के लिए भी बदनाम थे।
- तीन क्या, वरन् चार अपराध: बार-बार अपराधों की गिनती से यह दिखाने की कोशिश है कि अपराध कितने ही बार दोहराए जाएँ, तब भी दंड से बचना संभव नहीं।
- एदोम के वश में कर दें: यह दिखाता है कि दास-स्थिति और बलपूर्वक नियंत्रण के साधन न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि नैतिक रिज़ॉल्यूशन और स्वतंत्रता के विरुद्ध है।
अन्य प्रासंगिक बाइबल पाठ
यहोवा के न्याय की सार्वभौमिकता पर विचार के लिए इनमें से कुछ संदर्भ मददगार हो सकते हैं: - यहोजा 34:1-2 (जाति-न्याय और भागीदारी) - पतरस 2:12 (धर्म के अनुपालन की आवश्यकता) - यहोशू 23:15-16 (आखिरकार दण्ड की सत्यता)
आज के जीवन में अनुप्रयोग
हम रोजमर्रा के रिश्तों और समाज-व्यवस्था में अन्याय के विरुद्ध खड़े हों। अमानवीय खेल, अत्याचार या दबाव के सामने चुप रहने की प्रवृत्ति का भी विरोध करें। ईश्वर के न्याय के पैंतरे आचरण का एक मानक बनते हैं—कर्म, दया और सत्य के साथ जीवन जीना।
खास उद्धरण (मैथ्यू हेनरी, अर्बन Barnes, एडम क्लार्क)
यहाँ संहितागत टिप्पणी के लिए चुने गए विशिष्ट उद्धरण केवल वही हैं जिनकी सार्वजनिक-डोमेन पाठ में उपलब्धता है: - Matthew Henry: “The Lord is righteous in all His ways.” (संरक्षित संक्षेप) - Albert Barnes: “God will not leave unpunished those who oppress the weak.” - Adam Clarke: “Sin under every form invites the judgment of Heaven.”
कहावों के रूप में, यदि उपलब्ध हों, तो पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं; किन्तु इन टिप्पणीकारों के विचारों को मौलिक रूप से पाठ के संदर्भ में समाहित किया गया है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में और व्याख्या सहित)