Old Testament
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आमोस 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं दमिश्क के बेंड़ों को तोड़ डालूँगा, और आवेन नामक तराई के रहनेवालों को और बेतएदेन के घर में रहनेवाले राजदण्डधारी को नष्ट करूँगा; और अराम के लोग बन्दी होकर कीर को जाएँगे, यहोवा का यही वचन है।”
आमोस 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 16:9 (HINIRV) »
उसकी मानकर अश्शूर के राजा ने दमिश्क पर चढ़ाई की, और उसे लेकर उसके लोगों को बन्दी बनाकर, कीर को ले गया, और रसीन को मार डाला।

आमोस 9:7 (HINIRV) »
“हे इस्राएलियों,” यहोवा की यह वाणी है, “क्या तुम मेरे लिए कूशियों के समान नहीं हो? क्या मैं इस्राएल को मिस्र देश से और पलिश्तियों को कप्तोर से नहीं निकाल लाया? और अरामियों को कीर से नहीं निकाल लाया?

यिर्मयाह 51:30 (HINIRV) »
बाबेल के शूरवीर गढ़ों में रहकर लड़ने से इन्कार करते हैं, उनकी वीरता जाती रही है; और यह देखकर कि उनके वासस्थानों में आग लग गई वे स्त्री बन गए हैं; उसके फाटकों के बेंड़े तोड़े गए हैं।
मुख्य व्याख्या बिंदु
आमोस 1:5 में परमेश्वर की न्यायप्रियता और राष्ट्रों के ऊपर उनका शासन-नियंत्रण उभरकर आता है। यहाँ से यह स्पष्ट होता है कि प्रभु यहोवा सामाजिक और राजनीतिक अत्याचारों पर मुकदमा चलाने वाले हैं—दमिश्क, आवेन, बेतएदेन आदि के शासक और घर-परिवार सभी उनकी sé पर होंगे। परमेश्वर के निर्णय में किसी भी नैतिक दोष-पश्चाताप से परे नहीं जाता; वह उन बंधनों को तोड़ देता है जो दूसरों पर अत्याचार बनकर बैठे हों। इस वचन का उद्देश्य न केवल ऐतिहासिक आघात को उद्घोषित करना है, बल्कि स्मरण कराना है कि प्रभु सर्वशक्तिमान अन्याय के प्रत्येक स्वरूप के विरुद्ध हुक्म देता है और दुःखित लोगों के पक्ष में न्याय की खिंचाई करता है।
पाठ-संदर्भ-परिप्रेक्ष्य (साहित्यिक संदर्भ)
ओल्ड टेस्टामेंट की पाँचवां अध्याय के पहले भाग में आमोस ने उत्तर-रेखा के देशों के विरुद्ध परमेश्वर का न्याय उद्घोष किया है। इस वचन में दमिश्क के बेंड़ों, आवेन की तराई, बेतएदेन के घर, और अराम के लोग—ये सब ध्वस्त होने वाले प्रतीक हैं जिनके लिए न्याय का डेंटिंग संकेत है। यह उद्घोषणा उन विचारों को सामने लाती है कि दया और न्याय एक ही परमपवित्र सत्ता के दो अंग हैं; शासक अपने पवित्र दायित्व का उल्लंघन करें, तो वही परमेश्वर उनके साम्राज्यों को उखाड़ देता है।
पश्चात्त्व-धार्मिक महत्व और सिध्दांत
यह पाठ मानवीय शक्तियों के दुरुपयोग पर स्वतः उत्तरदायित्व के सिद्धांत को स्थापित करता है। सभी राष्ट्र-राज्यों को यह याद दिलाया गया है कि पृथ्वी की सत्ता परमेश्वर के नियंत्रण के अधीन है, और यदि बल-शक्ति या धन-ताकत से अन्याय बढ़ता है, तो वह ऊँचे दाम वसूल करेगा। साथ ही, यह भविष्यसूचक संकेत है कि परमेश्वर के न्याय का दरवाजा खोला जाएगा, ताकि उन लोगों को जो दीन-दुखी हैं, स्वतंत्रता और सुरक्षा मिल सके।
यहोवा के निर्णय और उद्धार की दिशा
वचन बताता है कि न केवल नगर-नगर विनष्ट होंगे, बल्कि उन राजसी इमारतों के पीछे बैठे लोग भी अपनी शर्तों पर पछतावा अनुभव करेंगे। इससे स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की योजना सामाजिक समरसता और न्यायपूर्ण व्यवस्था ही है, जहां दीन-हीन की सहायता और अत्याचार में कमी हो।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में) और उनके अर्थ
• दानिश्वर की अदालत का एक सामान्य तस्वीर—यहोवा पक्षपात नहीं करता; दुष्कर्मों पर सजा निश्चित है।
• सच्चे धार्मिकता के साथ सामाजिक न्याय का संयोजन—यहोवा न्याय के साथ प्रेम भी देता है, और दीन-हीन के अधिकारों की रक्षा करता है।
• भविष्य में दुनिया की आशा—न्याय के युग के आगमन का संकेत जो सब जगह सत्य और शांति लाएगा।
आत्म-मनन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
आमोस 1:5 एक स्पष्ट स्मृति दिलाता है कि परमेश्वर न्यायप्रिय है और अन्याय पर अधिकार रखता है। न केवल धड़ते शक्तिशाली शासन बल्कि उनके घर भी जो अत्याचार में लिप्त हैं, अंततः उसे सुघड़ कर देंगे। इसके साथ यह संदेश भी है कि न्याय के साथ दया और समाजिक उद्धार का मार्ग भी खुला है, ताकि दीन-हीन को सहारा मिले और गलत के विरुद्ध सत्य का शासन बने।
महत्वपूर्ण उद्धरणों की पुष्टि (कर्ता-उद्धरण)
नोट: नीचे दिये गए उद्धरण महत्त्वपूर्ण टिप्पणीकारों से सीधे संदर्भ-आकार में लिए गये हैं; मूल पाठ के संपूर्ण उद्धरण नहीं हैं।
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Cross-references: अन्याय के परिणाम और परमेश्वर की न्यायप्रिय योजना पर संकेत देती हैं—यही कारण है कि यह वाक्य पाठक को दया, न्याय और श्रद्धा के बीच संतुलन बनाने को प्रेरित करता है।