Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 राजाओं 16:9 बाइबल पद की व्याख्या
2 राजाओं 16:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसकी मानकर अश्शूर के राजा ने दमिश्क पर चढ़ाई की, और उसे लेकर उसके लोगों को बन्दी बनाकर, कीर को ले गया, और रसीन को मार डाला।
2 राजाओं 16:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 16:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 9:7 (HINIRV) »
“हे इस्राएलियों,” यहोवा की यह वाणी है, “क्या तुम मेरे लिए कूशियों के समान नहीं हो? क्या मैं इस्राएल को मिस्र देश से और पलिश्तियों को कप्तोर से नहीं निकाल लाया? और अरामियों को कीर से नहीं निकाल लाया?

आमोस 1:3 (HINIRV) »
यहोवा यह कहता है: “दमिश्क के तीन क्या, वरन् चार अपराधों के कारण मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा*; क्योंकि उन्होंने गिलाद को लोहे के दाँवनेवाले यन्त्रों से रौंद डाला है।

2 राजाओं 16:9 पर विचार: यह verse क्यों महत्त्वपूर्ण है
इस आयत में विश्रुत साम्राज्यों की राजनीति और प्रभु की योजना दोनों एक साथ उजागर होती है। अश्शूर के राजा ने दमिश्क पर चढ़ाई की और इसके बाद इश्राइल की नीति-निर्मात्री शक्ति के संकेत भी प्रकट हुए। यह सूचित करता है कि विदेशी शक्ति के दबाव में भी परमेश्वर की दिनचर्या और राज्य-व्यवस्था कैसे चलती है, और कैसे राजा की गलत नीतियाँ क्षेत्रीय अस्थिरता को उकसाती हैं। इस verse से हम सीखते हैं कि ईश्वर की अनुमति के बिना एक भी सत्ता नहीं चलती; परन्तु मानव-निर्णय और दुष्कर्म भी परिणामस्वरूप आघात देते हैं।
यहाँ मूल संदर्भ क्या है?
घटना है बनाने वाले राजा कीर्ति के समय इजराइल और जुड़ाव के साम्राज्यों के बीच की राजनीतिक खींचतान। दमिश्क पर चढ़ाई और उसके बाद नेताओं की गिरफ्तारी—यह दिखाता है कि अस्थिरता और साम्राज्यगत दबाव किस प्रकार कूटनीति, शक्ति-चालित निर्णयों और परमेश्वर की योजनाओं के साथ टकराते हैं।
मुख्य संदेश
व्याख्यात्मक बिंदु
- अश्शूर का राजा दमिश्क पर काबिज हुआ; यह सत्तात्मक विस्तार का प्रतीक है और यह दर्शाता है कि बड़े साम्राज्यों की चाल अक्सर छोटे राज्य को अपने प्रभाव में ले लेती है।
- राजा के लोगों को बन्दी बनाकर लेकर जाना एक समय-सीमा को दर्शाता है जब शक्तिशाली शासन अपने नायकों और नागरिकों को विभिन्न देशों में ऐसा फैलाता है।
- यह घटना एक बार फिर ईश्वर के युद्ध-योजनाओं और इंसानी स्वार्थों के बीच संघर्ष की जीती-जागती मिसाल बन जाती है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संकेत और संक्षेप)
चर्च-आरोप/टेक-अवे
इस verse से उठने वाला एक प्रमुख मज़मून है: शक्ति-आधारित निर्णयों के परिणाम कितने भी दूर तक असर डालें, परमेश्वर की योजना सभी पर प्रभाव डालती है। नेताओं और नागरिकों के लिए यह आत्म-निरीक्षण का अवसर है कि नीतियों में कृतिक, दर्प और अधर्म के पीछे छूट नहीं मिलती; विश्वास में वस्तुस्थिति को देखने और परमेश्वर की दिशा-निर्देशों के अनुसार चलने की आवश्यकता है।
संक्षिप्त devotional reflection
जब बड़े साम्राज्य अपने प्रभुत्व को फैलाते हैं, तब भी परमेश्वर के विरुद्ध नहीं टिक पाते। हमें यह याद दिलाता है कि हमारे निर्णय चाहे कितने बड़े क्यों न हों, परमेश्वर के मार्ग के बाहर नहीं जाते; कृपा तब भी है जब परिणाम असहज हों। चलें तो उस दिशा में जो परमेश्वर को सम्मान दे और देशों के बीच शांति, न्याय व दया को बढ़ावा दें।
छोटा संदर्भ-सार
यह घटनाक्रम तब घटता है जब राजनीति और आंतरिक निर्णय बाहर की शक्तियों के साथ टकराते हैं। ईश्वर के कार्य-कलेवर में मानव-चयन और दया की भूमिका एक साथ चलते हैं, और अंततः परमेश्वर की योजना अधिक व्यापक रूप से आगे बढ़ती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry/Albert Barnes/Adam Clarke से आवश्यक टेक्स):
कृपया ध्यान दें: नीचे सीधे उद्धरण नहीं हैं, केवल सार-संकेत दिए गए हैं ताकि मूल विचार स्पष्ट रहे।
सूत्र-संदर्भ
1) विदेशी शक्तियों का बढ़ना और छोटे राज्यों पर प्रभाव; 2) दुष्ट शासन के दुष्परिणाम; 3) ईश्वर की योजना और मानव निर्णयों का समन्वय।