Old Testament
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2 राजाओं 16:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः आहाज ने दूत भेजकर अश्शूर के राजा तिग्लत्पिलेसेर के पास कहला भेजा, “मुझे अपना दास, वरन् बेटा जानकर चढ़ाई कर, और मुझे अराम के राजा और इस्राएल के राजा के हाथ से बचा जो मेरे विरुद्ध उठे हैं।”
2 राजाओं 16:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 16:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 15:29 (HINIRV) »
इस्राएल के राजा पेकह के दिनों में अश्शूर के राजा तिग्लत्पिलेसेर ने आकर इय्योन, आबेल्वेत्माका, यानोह, केदेश और हासोर नामक नगरों को और गिलाद और गलील, वरन् नप्ताली के पूरे देश को भी ले लिया, और उनके लोगों को बन्दी बनाकर अश्शूर को ले गया।

1 राजाओं 20:32 (HINIRV) »
तब वे कमर में टाट और सिर पर रस्सियाँ बाँध कर इस्राएल के राजा के पास जाकर कहने लगे, “तेरा दास बेन्हदद तुझ से कहता है, 'कृपा कर के मुझे जीवित रहने दे।'” राजा ने उत्तर दिया, “क्या वह अब तक जीवित है? वह तो मेरा भाई है।”

1 राजाओं 20:4 (HINIRV) »
इस्राएल के राजा ने उसके पास कहला भेजा, “हे मेरे प्रभु! हे राजा! तेरे वचन के अनुसार मैं और मेरा जो कुछ है, सब तेरा है।”
सीधे अर्थ की प्रत्यक्ष प्रस्तुति
2 राजाओं 16:7 में आहाज ने अश्शूर के राजा तिग्लत्पिलेसेर के पास संदेश भेजा कि वह उसे अपना दास समझे, परन्तु यह अनुरोध अपनी सुरक्षा के लिए था—जैसे कि वह अराम के राजा और इस्राएल के राजा के विरुद्ध उठे फौरन खतरे से बचना चाहता था।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना इस्राएल के बिन्यामीन के राजा आहाज़ के समय की है, जब साम्राज्य आधे से अधिक अस्थिर था और पड़ोसी शक्तियाँ प्रभावी हो रही थीं। तिग्लत्पिलेसेर II का साम्राज्य यहूदियों के भीतर से आ रहे दबावों के बीच असूर की एक सतर्क-शाहत है। आहाज़ ने अपने स्तर-पर बचने की एक असुरक्षित योजना के लिए अश्शूर के राजा से मदद माँगी, ताकि वह अपने दास के रूप में नहीं, बल्कि कृपापात्र बनकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। यह कदम परमेश्वर के उद्देश्य से एक विरोधाभासी संकेत बन गया, क्योंकि भविष्य में यह मार्ग इस्राएल की स्वतंत्रता और विश्वास की परीक्षा को प्रभावित करेगा।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संयुक्त विचारों के साथ पाठ
हे सबसे महान के भक्त, आहाज़ की यह टिप्पणी हमें यह सिखाती है कि संकट के समय चढ़ाई-योजना बनाना मानवीय निर्णयों की सीमा को नहीं तोड़ता। परमेश्वर के सामने सुरक्षा का एकमात्र मार्ग विश्वास और परमावश्यकता की आराधना है, न कि बाहरी दूतों और समझौतों के साथ समझौते।
संभावित क्रॉस-रेफरेंसेस
छोटा निष्कर्ष एवं व्यावहारिक पाठ
हमारे संकट के समय भी परमेश्वर की इच्छा पर टिके रहने की शिक्षा देती है: सुरक्षा और सत्ता के लिए तुरंत उपाय ढूंढना गलत नहीं, परंतु वह उपाय परमेश्वर की अगुवाई और विश्वास के आधार पर होना चाहिए। आहाज़ का उदाहरण यह सच याद दिलाता है कि भरोसा केवल राजनीतिक जोड-तोड़ में नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ सीधी-सच्ची आस्था में है।
पूर्व-धार्मिक टिप्पणियाँ (संदर्भ-उद्धरण के रूप में)
अंदरूनी टिप्पणियों मेंMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संक्षिप्त उद्धरण आवश्यक हो तो दिए जा सकते हैं: “यह परमेश्वर के नियन्त्रण से बाहर नहीं; वह चाहे तो राजा-राय को भी बदल सकता है,” आदि।