Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 15:1 2 राजाओं 15:2 2 राजाओं 15:3 2 राजाओं 15:4 2 राजाओं 15:5 2 राजाओं 15:6 2 राजाओं 15:7 2 राजाओं 15:8 2 राजाओं 15:9 2 राजाओं 15:10 2 राजाओं 15:11 2 राजाओं 15:12 2 राजाओं 15:13 2 राजाओं 15:14 2 राजाओं 15:15 2 राजाओं 15:16 2 राजाओं 15:17 2 राजाओं 15:18 2 राजाओं 15:19 2 राजाओं 15:20 2 राजाओं 15:21 2 राजाओं 15:22 2 राजाओं 15:23 2 राजाओं 15:24 2 राजाओं 15:25 2 राजाओं 15:26 2 राजाओं 15:27 2 राजाओं 15:28 2 राजाओं 15:29 2 राजाओं 15:30 2 राजाओं 15:31 2 राजाओं 15:32 2 राजाओं 15:33 2 राजाओं 15:34 2 राजाओं 15:35 2 राजाओं 15:36 2 राजाओं 15:37 2 राजाओं 15:38



2 राजा 15:29 का तात्पर्य और संदर्भ
यह पद उस समय का वर्णन करता है जब राजा पेकह के शासन काल में आसूरी साम्राज्य के शक्तिशाली तिग्लत्पिलेसेर ने इस्राएल के कई नगरों पर आक्रमण करके उन्हें नष्ट किया और जनता को बन्दी बनाकर असशूर की ओर ले गया। यह घटनाक्रम एक बड़े साम्राज्य के विस्तार और इस्राएली राजाओं के कमजोर अवस्था के साथ जुड़ा है, जो उत्तर-राज्य इजराइल की दशा को दर्शाता है।
मुख्य अर्थ ( central meaning )
वर्ष 734–732 ईसा पूर्व के आस-आस के समय इजराइल पर आक्रमणकारी आकाश अंबर के तटस्थ नहीं रहे, और उत्तरी राज्य के भीतर के नगर भी व्याप्त इस्लामी नहीं बल्कि असशूर के अधिकार में चले गए। यह विवरण यह दिखाता है कि यह समय इस्राएल के लिए एक क्रमिक पराजय और आत्मविश्वास घटाने वाला था; राष्ट्रीय सुरक्षा कमजोर पड़ गई और गृहतपर्णी संस्थाएं टूटने लगीं।
दो-तीन प्रमुख थीम (themes)
संदर्भित पाठों के साथ कड़ियाँ (Related cross-references)
• दृढ़ता और विश्वास के महत्व पर स्मरण: इस प्रकार के आक्रमणों के समय भविष्य-आशाओं को बनाए रखने के निर्देश मिलते हैं; आपसी सहायता और परमेश्वर पर भरोसा महत्वपूर्ण रहते हैं।
• दक्षिण राज्य के विरुद्ध पड़ना: आसूरी आक्रमणों के लिये उत्तर-राज्य का पड़ना एक समान चर्चित घटना है जो ईश्वर के निर्णयों के बावजूद विश्वासयोग्यताओं की ज़रूरत पर प्रकाश डालता है।
• विनाश के समय में परमेश्वर की न्याय योजना: कठिन समय में परमेश्वर की योजना और राज्य-निर्भरता का अभीष्ट स्पष्ट होता है।
व्यवहारिक विचार (Practical reflection)
कठिन समय में भी परमेश्वर के वचनों पर टिके रहने का महत्व इस पंक्ति से प्रकट होता है — भले ही बाहरी द्वार टूट जाएं, आंतरिक विश्वास और परमेश्वर के प्रति समर्पण मजबूत रह सकता है। अपने जीवन के छोटे-छोटे नगरों और अवसरों को भी इस रूप में देखें कि कैसे आप परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप अपने विश्वास को बनाए रख सकते हैं।
संक्षिप्त समापन (Brief closing summary)
2 राजा 15:29 वह सूचना है कि आक्रमणों और बन्दीकरण के कारण उत्तर-राज्य इस्राएल की राजनीति और समाज पूरी तरह से विचलित हुई। यह एक स्मरण है कि शक्तिशाली साम्राज्यों के सामने भी परमेश्वर के निर्णय और धर्म-आत्मा की सुरक्षा आवश्यक रहती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (quotes from public-domain commentators)
Adam Clarke और Matthew Henry की बताई विशेष शिक्षाएं इस प्रकार एकीकृत की जाती हैं: Clarke यह दिखाते हैं कि सत्ता की अस्थिरता और निर्भरता—परमेश्वर की निरपेक्षता के सामने—सदा सही मार्ग दिखाती है; Henry ने सामान्यतः यह कहा है कि चूँकि मसीही प्रतीक्षा में विपत्तियाँ आती हैं, मनुष्य को आश्रय परमेश्वर में करना चाहिए और दैवीय न्याय के संदर्भ में डर नहीं करना चाहिए। यदि आपके पाठ में इन टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण उपलब्ध हों, तो वे नीचे संकलित होंगे, परंतु पूर्ण पाठ नहीं प्रस्तुत किया गया है।