2 राजाओं 15:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहूदा के राजा अजर्याह के राज्य के पचासवें वर्ष में मनहेम का पुत्र पकहयाह शोमरोन में इस्राएल पर राज्य करने लगा, और दो वर्ष तक राज्य करता रहा।

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2 राजाओं 15:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

पसंद किया गया पद: 2 राजाओं 15:23 (HINIRV)

: यहूदा के राजा अजर्याह के शासन के पचासवें वर्ष में पकहयाह नाम का व्यक्ति शोमरोन (इस्राएल के गढ़) में राज्य करने लगा और उसने दोनों वर्षों तक राज्य किया। यह कथा उस समय के उत्तरापथ-राज्यों के विखंडन के क्रम की एक कड़ी है, जब यरूसलम के बाद दोनों राज्यों के शासक क्रमशः वास्तविक सत्ता और धार्मिक-राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे थे।

ईश्वर और विश्वास के प्रकाश में पाठ का संकेत

यह गुजरते राजनैतिक काल में भी परमेश्वर की योजना, नियंत्रण और श्रद्धा की कठिन परीक्षा को दर्शाता है। शासकों के परिवर्तन से यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक बदलाव परमेश्वर के हाथ में है, और यह बदलाव सामर्थ्य-प्रतिष्ठा के बजाय नीति-नियमन और दायित्व की याद दिलाते हैं। जब राजा के पद का प्राकृतिक संकेत बनाम आध्यात्मिक आचार-व्यवहार एक साथ नहीं रहते, तब परमेश्वर के सिंहासन की स्थिरता और विश्वास का मार्ग उभरकर आता है।

महत्त्वपूर्ण शब्द/छवि स्पष्ट करना

  • : न सिर्फ राजनीतिक सत्ता, बल्कि वह आध्यात्मिक नेता के दायित्व का भी प्रकट है—जनता की नीतियों और परमेश्वर के निर्देशों के प्रति उत्तरदायित्व।
  • : एक निश्चित कालखंड के संकेत के रूप में, इतिहास में चक्र और क्रम की स्मृति देता है कि समय के विश्वासी ड्रामे कहाँ-सीमा पर आकर थमते हैं।

संबंधित पाराएं (cross-references)

- राजा–एवं सामंती सत्ता के परिवर्तन और भगवान के नियंत्रण के विचार के लिए: संदेशन 2 राजा 14:29-30; 2 राजा 17:6।

- उत्तर-दक्षिण राज्य विभाजन के दृश्य के बारे में: 1 राजा 12:20-21; 2 राजा 17:1-6।

इन संदर्भों में यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर इतिहास के बड़े ढांचे में सत्ता के परिवर्तन के पीछे काम करते हैं, और विश्वासियों को धैर्य और निष्ठा की शिक्षा मिलती है।

आज के लिए उपयोगी निष्कर्ष

- कठिन समय में भी ईश्वर की सत्ता अडिग रहती है — राजा की सत्ता एक अस्थिर पथ है, पर परमेश्वर का शासन स्थिर और भरोसेमंद है।

- धार्मिक-नीतियों में रहें और हिंसा-हृदय को छोड़कर सत्य पर टिके रहें; राजनीतिक ऊँचाइयों के बावजूद ईमानदारी और धर्मनिष्ठा की आवश्यकता बारम्बार उभरती है।

संक्षिप्त सार

पकहयाह का शासन, एक छोटे समय के लिए, इस्राएल में सत्ता के अस्थायित्व और परमेश्वर के विभाग-नियंत्रण की याद दिलाता है। यह पाठ हमें बताता है कि इतिहास के परिवर्तन में भी विश्वास को बनाए रखना कितना आवश्यक है।

नोट: नीचे के उद्धरण प्रचलित टिप्पणियों से भूमिकाओं के रूप में उपयोगार्थ हैं (केवल संपूर्ण वाक्यों में उद्धृत नहीं):

Matthew Henry के अनुसार, "जहाँ सत्ता परिवर्तन होता है, वहाँ परमेश्वर का न्याय और रीति-नीति बराबर चलते हैं।" Albert Barnes और Adam Clarke ने भी सत्ता-नियंत्रण और धार्मिक-आचरण के बीच संतुलन की महत्ता पर बल दिया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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