Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 15:1 2 राजाओं 15:2 2 राजाओं 15:3 2 राजाओं 15:4 2 राजाओं 15:5 2 राजाओं 15:6 2 राजाओं 15:7 2 राजाओं 15:8 2 राजाओं 15:9 2 राजाओं 15:10 2 राजाओं 15:11 2 राजाओं 15:12 2 राजाओं 15:13 2 राजाओं 15:14 2 राजाओं 15:15 2 राजाओं 15:16 2 राजाओं 15:17 2 राजाओं 15:18 2 राजाओं 15:19 2 राजाओं 15:20 2 राजाओं 15:21 2 राजाओं 15:22 2 राजाओं 15:23 2 राजाओं 15:24 2 राजाओं 15:25 2 राजाओं 15:26 2 राजाओं 15:27 2 राजाओं 15:28 2 राजाओं 15:29 2 राजाओं 15:30 2 राजाओं 15:31 2 राजाओं 15:32 2 राजाओं 15:33 2 राजाओं 15:34 2 राजाओं 15:35 2 राजाओं 15:36 2 राजाओं 15:37 2 राजाओं 15:38

Reader-friendly overview
2 राजा–संग्रह के इस verse में राजा्योशाफ़ (आमतौर पर प्रयुक्त नाम के अनुसार) का जीवनक्रम दिखता है: वह पच्चीस वर्ष की आयु में राजा बना और ईश्वरीय न्यायकर्ता के रूप में पंद्रह साल से अधिक समय तक यरूशलेम पर शासन करता रहा। उसकी माता का नाम यरूशा है, जिसे सादोक की बेटी कहा गया है। यह छोटे-छोटे विवरण दर्शाते हैं कि राजशाही के आरम्भ के साथ पारिवारिक पृष्ठभूमि और धार्मिक मान्यताओं की जड़ें एक साथ मजबूत थीं।
Verse in its chapter — verse discussion
यह पंक्ति राजुकाल के क्रम में एक विशिष्ट क्षण की जानकारी देती है: राजस्वार्ता के इतिहास में यह बताता है कि सत्ता संभालने के समय उसकी आयु कौनसी थी, और कितने वर्ष तक उसने राज्य किया। साथ ही उसकी माता का उल्लेख परिवार की पवित्रता और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा संकेत देता है, क्योंकि सादोक वंश के संदर्भ से यह उपस्थिति यह बताती है कि राजा के धार्मिकTraditions में उच्च-मत के पुरोहितों के साथ संबंध थे।
Main spiritual lesson
इस Verse का मूल संदेश यह है कि परमेश्वर के चयनित लोगों के जीवन में जन्म-आयु और माता-पिता के औचित्य से अधिक महत्वपूर्ण होता है उनके कर्म, विश्वास और न्यायप्रिय शासन। यरूशलेम में शासन करने के दौरान ईश्वर की योजना के अनुसार शासन की दिशा—धर्म, न्याय और नीति—स्थापित होती है। साथ ही यह भी संकेत है कि राजाओं के राजसी दायित्वों में आध्यात्मिक परंपराओं का सम्मान आवश्यक है, ताकि राज्य के लोगों को सद्गुणों के मार्ग पर चलाया जा सके।
Cross-references and connections
इन क्रॉस-रेफरेंसेस के बिंदुओं से स्पष्ट होता है कि एक राजा की जन्म-आयु और पारिवारिक पृष्ठभूमि से अधिक उसकी आस्था, नीति-निर्णय और परमेश्वर के साथ संबंध महत्व रखता है।
Careful application
धर्म-जीवन में अध्याय-आयु या माता-पिता के नाम से तुलना कम नहीं होती, परंतु हमें यह सीख मिलती है कि किस प्रकार हम अपने राज्य-जीवन—चाहे व्यावसायिक, परिवारिक या सेवक-कार्य—में ईश्वर की निर्देशना को मानें। पुत्र-राष्ट्र के बीच नेता बनने पर भी, खरी नीति और धर्मशास्त्र के अनुरूप निर्णय लेने चाहिए, ताकि समाज में न्याय और सच्चे सद्गुणों का प्रकाश बना रहे।
Summary
यह छोटा-सा विवरण हमें याद दिलाता है कि रचना की सूची में राजा के जन्म-आयु और माता का नाम कितना भी विशिष्ट क्यों न हो, वास्तविक महत्व उनकी सेवा की गुणवत्ता और परमेश्वर के साथ उनके संबंध में निहित है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने जीवन के निर्णयों में नैतिक आचार और विश्वास-आचरण को प्राथमिकता दें, ताकि हमारे राज-कार्य भी परमेश्वर के उद्देश्य Crown करें।
Note on older commentators
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसी सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संकेत यह दर्शाते हैं कि राजतंत्र में धार्मिक परंपराओं और पवित्रवंश के प्रभाव का मूल्यांकन करते समय हमें दायित्व-परिहार से नहीं, बल्कि वफादारी और न्याय के मार्ग पर चलना चाहिए। जहाँ वे उद्धरण देते हैं, वहाँ वे कहे जाते हैं कि आध्यात्मिक पृष्ठभूमि और पारिवारिक विरासत के बावजूद वास्तविक बदलाव नीति-निर्णयों और चरित्र-निर्माण में दिखना चाहिए।
Cross-Reference glimpses: परिशिष्ट सूचनाएं आगे के अध्ययन के लिए।