Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 15:1 2 राजाओं 15:2 2 राजाओं 15:3 2 राजाओं 15:4 2 राजाओं 15:5 2 राजाओं 15:6 2 राजाओं 15:7 2 राजाओं 15:8 2 राजाओं 15:9 2 राजाओं 15:10 2 राजाओं 15:11 2 राजाओं 15:12 2 राजाओं 15:13 2 राजाओं 15:14 2 राजाओं 15:15 2 राजाओं 15:16 2 राजाओं 15:17 2 राजाओं 15:18 2 राजाओं 15:19 2 राजाओं 15:20 2 राजाओं 15:21 2 राजाओं 15:22 2 राजाओं 15:23 2 राजाओं 15:24 2 राजाओं 15:25 2 राजाओं 15:26 2 राजाओं 15:27 2 राजाओं 15:28 2 राजाओं 15:29 2 राजाओं 15:30 2 राजाओं 15:31 2 राजाओं 15:32 2 राजाओं 15:33 2 राजाओं 15:34 2 राजाओं 15:35 2 राजाओं 15:36 2 राजाओं 15:37 2 राजाओं 15:38



सीधे अर्थ का संक्षिप्त परिचय
2 राजाओं 15:13 में भनक देता है कि यहूदा के राजा उज्जियाह के शासन के उत्तरार्ध में याबेश के पुत्र शल्लूम ने शोमरोन में शासन शुरू किया, मात्र एक महीना ही उसका शासन रहा। इसका मतलब है कि सत्ता के टकराव और राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति बनी, और राजगद्दी एक नई गिनती के साथ बदली दिखी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ उत्तरी राज्य इस्राइल (यशायाह के उत्तर) की अस्थिरता को दर्शाता है। शोमरोन, जो इस्राइल का प्राचीन राजधानी था, यहां सत्ता परिवर्तन का प्रतीक बनता है। उत्तर-राज्य में राजवंशों के बीच आंतरिक विवाद और बाहरी दबाव के चलते अकसर छोटे-छोटे शासनकाल आते रहे। यह घटना उज्जियाह के वर्षों के भीतर घटित होने के कारण יהुद्ध के प्रभुत्व और राजनीतिक स्थिति पर प्रभाव डालती है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
सारगर्भित विचार
संबद्ध बाइबिल संदर्भ (संक्षिप्त व्याख्या के साथ)
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम भी अपने जीवन में आंतरिक सुरक्षा को सही आधार—यानी परमेश्वर के विश्वास और वचन—पर टिकाने की सीख लें। जब सत्ता या स्थिति अस्थिर हो, तब आत्म-संयम और नैतिक दृढ़ता बनाए रखना जरूरी है।
क्रॉस-रेफरेन्स (संक्षेप में, संदर्भों के अर्थगत संबंध)
‑ 2 राजाओं में अन्य राजा-परिवर्तनों के पाठक-चिन्ह: यह दिखाता है कि सत्ता के परिवर्तन समय-समय पर होते रहे, पर परमेश्वर की योजना में क्रम बना रहता है।
‑ यहूदी राजाों के पतन और दुष्ट-राजाओं के उदाहरण: नीतिगत निर्णयों से अधिक आस्था और परमेश्वर-आदेश की महत्ता उजागर होती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जहाँ उपलब्ध हो, केवल संक्षिप्त अंश)
इस विषय पर प्रसिद्ध पुरातन टिप्पणीकार Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सटीक छोटे उद्धरण उपलब्ध हों तो वही उद्धृत किए जाते हैं; नीचे केवल संकेत-आधार पर उपयुक्त हिदायत दी गई है:
नोट: इन पाठों के संक्षिप्त सारांश में उनके विचारों के समान स्वरुप के अवलोकन दिए गए हैं, पर सटीक उद्धरण यहाँ शामिल नहीं किए गए हैं ताकि मूल पाठ की ताजगी बनी रहे।