Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 इतिहास 1 1 इतिहास 2 1 इतिहास 3 1 इतिहास 4 1 इतिहास 5 1 इतिहास 6 1 इतिहास 7 1 इतिहास 8 1 इतिहास 9 1 इतिहास 10 1 इतिहास 11 1 इतिहास 12 1 इतिहास 13 1 इतिहास 14 1 इतिहास 15 1 इतिहास 16 1 इतिहास 17 1 इतिहास 18 1 इतिहास 19 1 इतिहास 20 1 इतिहास 21 1 इतिहास 22 1 इतिहास 23 1 इतिहास 24 1 इतिहास 25 1 इतिहास 26 1 इतिहास 27 1 इतिहास 28 1 इतिहास 29Verse
1 इतिहास 5:1 1 इतिहास 5:2 1 इतिहास 5:3 1 इतिहास 5:4 1 इतिहास 5:5 1 इतिहास 5:6 1 इतिहास 5:7 1 इतिहास 5:8 1 इतिहास 5:9 1 इतिहास 5:10 1 इतिहास 5:11 1 इतिहास 5:12 1 इतिहास 5:13 1 इतिहास 5:14 1 इतिहास 5:15 1 इतिहास 5:16 1 इतिहास 5:17 1 इतिहास 5:18 1 इतिहास 5:19 1 इतिहास 5:20 1 इतिहास 5:21 1 इतिहास 5:22 1 इतिहास 5:23 1 इतिहास 5:24 1 इतिहास 5:25 1 इतिहास 5:26



1 इतिहास 5:26 का परिप्रेक्ष्य और अर्थ
यह पद इतिहासकारों के क्रम में उत्तरप्रांतीय इस्राएल के आरोप-प्रत्यारोप और दखल-चक्र को दर्शाता है। इजराइल के उत्तर साम्राज्य के पड़ोसियों से बार-बार संघर्ष रहे, और परमेश्वर ने उन गतिविधियों को एक विशिष्ट क्रम में संचालित किया ताकि वह योजनाबद्ध तरीके से उसकी अर्थ-धारणा के अनुसार परिणाम दे। यहाँ रूबेनियों, गादियों और मनश्शे के आधे गोत्र के लोगों को शात्तूत (अश्शूर) की सत्ता के अधीन लाकर बंधुआ कर दिया गया; यह एक ऐसी घटना है जो उन्नत इतिहास की दिशा निर्धारित करती है कि क्यों दायें-बायें विभाजन के बाद भी प्रभु के अनुसार राष्ट्रगत निर्णय चलते रहते हैं। इस verse में यह संकेत है कि परमेश्वर ने उनकी प्रतिरोधी स्थितियों का नियमन किया और उनके शासन से बाहर कर दिया ताकि उनसे दूरस्थ समाज का स्थिरता बना रहे।
केंद्रीय अर्थ
मुख्य विषय
kriya-चिन्तन (महत्त्वपूर्ण cross-references)
यही विषय क्रम में अन्य संदर्भों से जोड़ते हैं:
व्यावहारिक विचार
हमारी निजी जीवन-यात्रा में प्रभाव यह है कि कठिन परिस्थिति चाहे कितनी भी भारी हो, परमेश्वर की योजना के अनुसार उस समय का अध्ययन करें और आराम पाएँ। कभी-कभी प्रभु हमें बाहरी शक्तियों से नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन और विश्वास की दृढ़ता से मुक्त करते हैं। यह verses हमें याद दिलाते हैं कि परमेश्वर के नियंत्रण में स्थितियाँ भी परीक्षा बनकर हमारे विश्वास को संवारती हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 इतिहास के इस अंश में यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर इतिहास की धारा को अपने उद्देश्य के अनुसार निर्देशित करते हैं। अश्शूर की शक्तियों के माध्यम से रूबेनियों, गादियों और मनश्शे के आधे गोत्रों के लोगों की बंधकता उनके इतिहास का भाग है, जिससे क्षेत्रीय सत्ता-व्यवस्था बदली और आगे की घटनाएं एक नियत मार्ग पर चलीं।
संक्षिप्त प्रमुख उद्धरण (महत्वपूर्ण टिप्पणीकारों से)
यह पंक्तियाँ पूर्व-युग के टिप्पणीकारों की सामान्य अंतर्दृष्टि को संजोती हैं, जिन्हें इस पाठ के साथ जोड़ा गया है—
“परमेश्वर जो कुछ भी करता है, वह अपने सार्वभौम उद्देश्य के अनुसार होता है।” — Matthew Henry (स्वतंत्र उपयोग के लिए संचित सार)
नोट: नीचे उद्धृत पूर्ण वाक्यांश स्वतंत्र टिप्पणीकारों के रचना-उद्धरण स्वरूप में उपलब्ध है।