1 इतिहास 5:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उनके विरुद्ध इनको सहायता मिली, और हग्री उन सब समेत जो उनके साथ थे उनके हाथ में कर दिए गए, क्योंकि युद्ध में इन्होंने परमेश्‍वर की दुहाई दी थी और उसने उनकी विनती इस कारण सुनी, कि इन्होंने उस पर भरोसा रखा था।

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1 इतिहास 5:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 इतिहास 5:20 पर टिप्पणी

पवित्र इतिहास के इस हिस्से में हम दाऊद के समय के एक युद्ध-प्रकरण के बीच देखते हैं कि ईश्वर ने किन उपायों से युध्ध में सहायता दी। यहाँ हギयों के विरुद्ध यहूदियों ने रोशनी से प्रभु पर भरोसा रखा, और परमेश्वर ने उनकी विनती सुनकर उन्हें विजय दी। इतिहास बताता है कि परमेश्वर की दया और विश्वास में दृढ़ता रखने वाले अपने समय के साथ कदम मिलाते हैं; और जब लोग प्रभु की दुहाई देते हैं, तब वह मदद के तेल के समान उनकी राह को प्रकाशित करता है।

केंद्रीय अर्थ

यह वचन बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों की विनती सुनते हैं और विश्वास के कारण उनकी ओर से प्राप्त सहायता को सफल बनाते हैं। जब इन्होंने परमेश्वर पर भरोसा रखा, तब उनकी दुहाई सुनकर उन्होंने उन्हें विजय दी। यह संदेश यह भी संकेत करता है कि विजय केवल सैन्य शक्तियों से नहीं, ईश्वर की कृतियों और विश्वासयोग्यता से आती है।

मुख्य विषय

  • ईश्वरीय सहायता: संकट के समय परमेश्वर कैसे सहायता भेजते हैं।
  • विश्वास की भूमिका: परमेश्वर पर भरोसा रखने से बाधाओं में भय नहीं रहता और विजय के मार्ग खुलते हैं।
  • कुशल प्रार्थना: विनती के समय ईश्वर के गुण—दयालुता, न्याय और प्रतिदान—सुनाई देते हैं।

सप्तक cross-references (संदर्भ)

• यहूदियों के विश्वास और ईश्वर की सहायता के उदाहरण के लिए 2 क्रांतियाँ 20:17-18 के समान आत्मिक संदेश की याद दिलाता है कि प्रभु में विश्‍वास करने से विजय मिलती है।
• प्रतिज्ञा-आस्था के महत्व पर दृष्टि डालने हेतु चवन 3:18 से प्रेरणा मिलती है कि प्रेम में निर्भीक रहना चाहिए; विश्वास से परमेश्वर सहायता करते हैं।
• दाऊद के उत्पत्ति-उद्धार के प्रसंगों में से एक के रूप में नीतिहित उदाहरणों में Ps 46:1-2 की तरह परमेश्वर “युद्ध के समय तुम्हारा सहायक” होने का स्मरण मिलता है।

संभावित व्यावहारिक प्रतिफल

विजय के लिए अपने जीवन में प्रभु पर निर्भर रहें। जब भी कठिनाइयों से घिर जाएँ, प्रभु से विनती करें और विश्वास बनाए रखें कि वह आपकी सहायता के लिए सचेत है। गर्वीले आत्म-बल पर निर्भर रहने के बदले, परमेश्वर के प्रति भूषण और नम्रता से प्रार्थना करें; तब उत्साह और आशा का मार्ग खुलता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

1 इतिहास 5:20 स्पष्ट करता है कि परमेश्वर ने उनकी विनती सुनकर उनके साथ किया, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर पर भरोसा रखा। यह संदेश आज भी है—निरंतर प्रार्थना और विश्वास से ईश्वर की सहायता मिलती है, और भयमुक्त विजय संभव होती है।

प्रश्न-विचार

  • आप कब पूरजोर संकट के समय ईश्वर पर भरोसा करते रहे हैं?
  • आप अपनी प्रार्थना में ईश्वर की कृपा कैसे अनुभव कर सकते हैं?

नोट: नीचे उद्धरण उल्लेख केवल संदर्भ के लिए हैं — Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समानतापूर्ण टिप्पणियों से संकलित हैं और विशिष्ट वाक्यों के संक्षेप में उपयोग किए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 5:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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