Old Testament
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2 राजाओं 16:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर राजा आहाज ने कुर्सियों की पटरियों को काट डाला, और हौदियों को उन पर से उतार दिया, और बड़े हौद को उन पीतल के बैलों पर से जो उसके नीचे थे उतारकर, पत्थरों के फर्श पर रख दिया।
2 राजाओं 16:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 16:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 7:23 (HINIRV) »
फिर उसने एक ढाला हुआ एक बड़ा हौज़ बनाया, जो एक छोर से दूसरी छोर तक दस हाथ चौड़ा था, उसका आकार गोल था, और उसकी ऊँचाई पाँच हाथ की थी, और उसके चारों ओर का घेरा तीस हाथ के सूत के बराबर था।

2 राजाओं 25:13 (HINIRV) »
यहोवा के भवन में जो पीतल के खम्भे थे और कुर्सियाँ और पीतल का हौद जो यहोवा के भवन में था, इनको कसदी तोड़कर उनका पीतल बाबेल को ले गए।

2 इतिहास 28:24 (HINIRV) »
फिर आहाज ने परमेश्वर के भवन के पात्र बटोरकर तुड़वा डाले, और यहोवा के भवन के द्वारों को बन्द कर दिया; और यरूशलेम के सब कोनों में वेदियाँ बनाईं।
2 राजाओं 16:17—_context और स्मरणीय तथ्य
इस पद में राजा आहाज ने मूर्तिपूजक संस्थाओं के प्रतीक बने कुर्सियों की पटरियाँ तोड़ डालीं, हौदियों को विच्छेद किया और बड़े हौद को पत्थर के फर्श पर रख दिया। यह उसे अपने पिता योआश के शासनकाल के अंतर्गत स्थापित मूर्तिपूजक विधान के विरुद्ध कदम उठाते दिखाता है। आहाज के ये कदम धार्मिक सुधार के प्रयासों का संकेत हैं, पर साथ ही यह दिखाता है कि उसने पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह मिटाने की बजाय कुछ प्रतीकात्मक क्रियाओं तक ही सीमित रहते हुए संतोष किया।
मुख्य अर्थ
विवरण यह है कि आहाज ने मंदिर और राजा के निजी देवालयों में जो मूर्तिपूजा के संकेत थे, उन्हें काट-फाड़ कर कर्तव्यनिष्ठता से हटाने का प्रयास किया। कुर्सियों की पटरियाँ (पथरियों के विरुद्ध) और बड़े हौद आदि परमेश्वर के स्थान पर मानव-निर्मित संस्थाओं के प्रतीक बने रहे। इस कर्म के पीछे एक अस्थायी सुधार की मंशा है, जिसमें शासनकाल के धार्मिक समारोहों को अधिक ईश्वर-केन्द्रित बनाना था।
मुख्य विषय-विचार
प्रमुख उपसूत्र (Cross-references)
1) 2 राजाओं 15:35— संदर्भ देता है कि कुछ स्थानों पर पूर्व राजा के समय के मंदिर-संरचना बने रहे; क्रिया-रूप में यह नया रास्ता, पुरानी व्यवस्था के विरुद्ध एक कदम था।
2) 2 राजाओं 16:10-11— आहाज ने अस्थिर धार्मिक नीतियों के बीच मूर्तिपूजा के संकेतों को हटाने की प्रक्रिया आरम्भ की; यह verse इस अभियान की प्रकृति को पुष्टि करता है।
3) 2 राजाओं 18:4— यह घटना एक larger छाया बनाती है जहाँ धार्मिक संतुलन स्थिर करने के लिए परिवार के कर्म-कुर्तव्य भी मापक बनते हैं।
अनुभवात्मक व्यावहारिकता
धर्म में सुधार कभी-कभी छोटे कदमों से शुरू होता है—परंतु सच मायने में परिवर्तन हृदय में आना चाहिए। हमारे जीवन में भी प्रत्यक्ष संकेतों के साथ आंतरिक बदलाव का संतुलन जरूरी है: प्रेरणा, विनय और निरन्तरता। यह पद हमें यह याद दिलाता है कि केवल प्रतीकों को हटाने से परिवर्तन नहीं होता, बल्कि प्रभु के लिये जीवन के हर क्षेत्र में नये नियम, नई आस्था और नई निष्ठा चाहिए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 राजाओं 16:17 न केवल एक प्रशासनिक कदम का वर्णन है, बल्कि एक चेतावनी भी है कि बाहरी क्रियाओं से आंतरिक परिवर्तन की कमी को ढका नहीं जा सकता। आहाज के कदम संदिग्ध थे—वह पुराने प्रतीकों को ही हटाता है जबकि दिली परिवर्तन के लिए सभी द्वार खुलने चाहिए।