Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 7:1 1 राजाओं 7:2 1 राजाओं 7:3 1 राजाओं 7:4 1 राजाओं 7:5 1 राजाओं 7:6 1 राजाओं 7:7 1 राजाओं 7:8 1 राजाओं 7:9 1 राजाओं 7:10 1 राजाओं 7:11 1 राजाओं 7:12 1 राजाओं 7:13 1 राजाओं 7:14 1 राजाओं 7:15 1 राजाओं 7:16 1 राजाओं 7:17 1 राजाओं 7:18 1 राजाओं 7:19 1 राजाओं 7:20 1 राजाओं 7:21 1 राजाओं 7:22 1 राजाओं 7:23 1 राजाओं 7:24 1 राजाओं 7:25 1 राजाओं 7:26 1 राजाओं 7:27 1 राजाओं 7:28 1 राजाओं 7:29 1 राजाओं 7:30 1 राजाओं 7:31 1 राजाओं 7:32 1 राजाओं 7:33 1 राजाओं 7:34 1 राजाओं 7:35 1 राजाओं 7:36 1 राजाओं 7:37 1 राजाओं 7:38 1 राजाओं 7:39 1 राजाओं 7:40 1 राजाओं 7:41 1 राजाओं 7:42 1 राजाओं 7:43 1 राजाओं 7:44 1 राजाओं 7:45 1 राजाओं 7:46 1 राजाओं 7:47 1 राजाओं 7:48 1 राजाओं 7:49 1 राजाओं 7:50 1 राजाओं 7:51



1 राजाओं 7:23 — ढाला हुआ बड़ा हौज़
इस वचन में शालूम-सी परिभाषित बनावट वाली एक विशिष्ट वस्तु का वर्णन है: एक बड़े ढाले के आकार का हौज़, जो गोल था, दस हाथ चौड़ा किन्तु बार-बार गिनती में एक संपूर्ण मंदिर-निर्माण के भाग के रूप में उपलब्ध कराया गया। यह पाठ यह दर्शाता है कि परमेश्वर के मंदिर की व्यवस्था और उसकी पवित्रता के लिए मनुष्य ने किस प्रकार विस्तृत और सूक्ष्म कल्पनाओं से युक्त योजना बनाई।
स्पष्ट दृष्य: तुरंत सेटिंग
यह पद परमेश्वर के द्वारा मध्य-पूर्व की राजधानी के महानार्षी-निर्माणकार्य का भाग है। वास्तु-निर्माण में यह हौज़—ढाला हुआ, गोलाकार, चौड़ाई और ऊँचाई की स्पष्ट मात्राओं के साथ—सामग्री, शिल्प और प्रयोग-ज्ञान की बारीकियाँ दर्शाता है। यह अलग से एक धार्मिक-उपकरण नहीं, बल्कि तीर्थ-स्थल के लिए मानक माप-योजना का हिस्सा है।
क्या सिखाता है: विश्वास और ईश्वर-आस्थामत्ता
यह आयतन और गोलाकारता का विवरण परमेश्वर के पवित्र स्थान के लिए सटीकता और व्यवस्था को महत्व देने का संकेत देता है। जैसे इस्क्रिप्चर में अनेक बार कहा गया है कि परमेश्वर का आकर्षण और प्रभुत्व क्रम-पालन और परिशुद्धता के साथ प्रकट होता है, उसी प्रकार यह हौज़ भी योजना के हर भाग में क्रम और समरूपता दर्शाता है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर के निर्माण-कार्य के लिए मनुष्य को भी एक व्यवस्थित और समर्पित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
शब्दावली और चित्रों की व्याख्या
अन्य प्रमुख संदर्भ
1) प्रार्थनास्थल की पवित्रता और सुसंगत वास्तुकला पर जोर देता हुआ अन्य निर्माण-विवरण: भजनशाला और मंदिर आंतरिक संरचना के निर्देश एक समान ध्येय—पवित्रता और व्यवस्था—की पुष्टि करते हैं।
2) परमेश्वर के साक्ष्यों में पूर्व-निर्धारित विधान और योजना की सत्ता: हर वस्तु की बनावट में उद्देश्य निहित होता है, जो ईश्वर-निर्मित व्यवस्था के अनुरूप चलता है।
3) विश्वास की प्रायोगिकता: मानवीय कारीगरी से परमेश्वर की महिमा प्रकट हो, यह दर्शाने के लिए क्षेत्रीय और कलात्मक विश्वसनीयता आवश्यक है।
प्रयोग-जीवन के लिए निष्कर्ष
आज के संदर्भ में यह पाठ हमारे लिए कहता है कि हमारे जीवन के हर क्षेत्र में—परिवार, कार्य, समाज—हम क्रमबद्ध और पवित्रता-आधारित योजना अपनाएं। परमेश्वर की योजना के अनुरूप अपने समय-संयोजन और संसाधनों का उपयोग करें; उद्देश्य स्पष्ट, तकनीकीता सुसंगत और समर्पण पूर्ण हो।
कई सांसारिक Cross-References (संक्षेप)
- समझाने के लिए: भवन-निर्माण और पवित्रता का संगम दिखाने वाले पुरानी-वचन-विशेष; - आराधना-सज्जा में क्रम और संतुलन की आवश्यकता; - निकलने वाले परिणामों में ईश्वर-उच्चता का प्रमाण।
नोट: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के साफ उद्धरण आवश्यक हो तो नीचे दिए गए स्रोतों से उनकी संक्षिप्त पंक्तियाँ पहले से उपलब्ध हो सकती हैं; यहाँ हमने उनका अर्थ-गूढ़ संकेत एकीकृत किया है।