यिर्मयाह 51:30 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

बाबेल के शूरवीर गढ़ों में रहकर लड़ने से इन्कार करते हैं, उनकी वीरता जाती रही है; और यह देखकर कि उनके वासस्थानों में आग लग गई वे स्त्री बन गए हैं; उसके फाटकों के बेंड़े तोड़े गए हैं।

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यिर्मयाह 51:30 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 51:30 — अर्थ का संक्षिप्त परिचय

यह पद यह बताता है कि बाबेल के सेनापति और गढ़ी-घोड़ों वाले शूरवीर अपने ठिकानों पर टिके नहीं रह पाते; युद्ध की स्थिति में उनकी वीरता जाती रहती है और भय के कारण वे स्त्री-समरूपीयों की तरह व्यवहार करते हैं, जब उनके फाटकों के बेंड़े टूट जाते हैं और आग से उनके वासस्थान जल जाते हैं। यह चेतावनी है कि दुष्ट साम्राज्य का निर्भय आचरण उसकी स्वयं की तबाही का कारण बनता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यिर्मयाह ने बाबुल के विरुद्ध भविष्यवाणी करते हुए उन्होंने उद्घोष किया कि राष्ट्र-दहकती आग और विनाश उनका भाग्य है। जिस क्रम में यह verse आता है, वह दर्शाता है कि बाबुल का साम्राज्य भरोसे के ढांचे से गिर रहा है: सेनाओं की दृढ़ता कमजोर पड़ गई है, असुरक्षा और भय फैला है, और उनके संरचनात्मक ढांचे एक-एक करके ध्वस्त हो रहे हैं।

व्याख्यात्मक संकेत

  • वीरता का पल-पल प्रभावी न रहना: मिली-जुली लड़ाई-स्थितियों में भी ताकत घटती जाती है, जब पराक्रम के आधार टूटते हैं।
  • आग और क्षति का दृश्य: फाटकों के टूटना और आ जाए आग—यह उद्धरण बताता है कि वह स्थान सुरक्षित नहीं रहा; दुष्ट साम्राज्य स्वयं एक आंतरिक अस्थिरता के बीच है।
  • स्त्री-रूपक का प्रयोग: यहाँ स्त्री-रूपक भय और असहायता को उजागर करता है; यह बताने की कोशिश है कि साम्राज्य की वीरता प्रवंचना बन चुकी है, और सत्ता की प्रकृति परिवर्तनशील है।

निष्कर्ष/थीमैटिक बिंदु

  • अक्सर शक्तिशाली दिखने वाला राज्य भीतर से खोखला हो सकता है जब न्याय और परमेश्वर के निर्देश टूटते हैं।
  • विनाश का संदेश: दुष्ट शासन के प्रति अहंकार और निर्भयता अंततः विपरीत परिणाम लाती है।
  • प्रेरक संकेत: ईश्वर के विरुद्ध अन्याय के विरुद्ध सत्य और धर्म की स्थापना ही सदा बनी रहती है।

संबद्ध अंश-उद्धरण (Cross-references)

1) यिर्मयाह 50:11 — यह बताता है कि शत्रु अपने भागते समय भी अपने उद्धार की आशा रखते हैं, परन्तु उनका अंत पराजय ही है।

2) इज़राइल के न्याय के प्रतिफल के बारे में यह मानना कि दुष्ट के भवन टिके नहीं रहते; ईश्वर की योजना अंततः सत्य और न्याय में परिणत होती है।

3) भविष्यवाणी की पूर्णता पर विचार करते समय ईश्वर के नियंत्रण को याद रखना चाहिए; दुष्ट राज्य के विनाश का कहना सत्य के साथ संगत है।

व्यावहारिक Takeaway

हम यह सीखते हैं कि शक्तिशाली दिखने वाला अधर्म समय के साथ ढह सकता है; चरित्र और निष्ठा में आधारित दृढ़ता संहार के समय भी स्थिर रहती है। विश्वासियों को सदा सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर टिके रहना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर का न्याय अंततः चरितार्थ होता है।

महत्वपूर्ण उद्धरण — ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से

यदि आवश्यक हो:Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरो में उपलब्ध छोटे उद्धरण मूल पाठ से नीचे दिए गए संदर्भों में मिलते हैं—यह पाठ उनके मौलिक स्वर से प्रेरित रहते हैं और नीचे संक्षेप में उद्धरण-संदर्भित हैं:

• “वह वीरता जो बाहर से दिखती है, भी अंत में निर्बल पड़ जाती है।” (कथन-उद्धरण अनुदिष्ट छोटे अंश)

• “आग और रहने के स्थलों की क्षति, दुष्ट शासन की अस्थिर स्थिति का प्रत्यक्ष संकेत हैं।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 51:30 समानांतर पद और संबंधित वचन

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नहूम 3:13 (HINIRV) »
देख, तेरे लोग जो तेरे बीच में हैं, वे स्त्रियाँ बन गये हैं। तेरे देश में प्रवेश करने के मार्ग तेरे शत्रुओं के लिये बिलकुल खुले पड़े हैं; और रुकावट की छड़ें आग का कौर हो गई हैं।

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यिर्मयाह 50:36 (HINIRV) »
बड़ा बोल बोलनेवालों पर तलवार चलेगी, और वे मूर्ख बनेंगे! उसके शूरवीरों पर भी तलवार चलेगी, और वे विस्मित हो जाएँगे!

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यशायाह 13:7 (HINIRV) »
इस कारण सबके हाथ ढीले पड़ेंगे, और हर एक मनुष्य का हृदय पिघल जाएगा,

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